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जिस कोच में चारों तरफ लगी थी आग उसी बोगी में बैठी थी ये डिप्टी कलेक्टर, सुनाई आपबीती- कैसा भयानक था वो मंजर

3 वर्ष पहले
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ग्वालियर. नई दिल्ली से ग्वालियर आ रही एपी एसी एक्सप्रेस सुबह 11.45 बजे लाइन क्लियर न होने से बिरला नगर पर रुकी। थोड़ी देर में सिग्नल हुआ, गाड़ी आगे बढ़ी अचानक कोच बी-6 से किसी ने चेन खींच दी जिससे गाड़ी फिर रुक गई। कोच बी-7 के टॉयलेट से धुआं उठ रहा था। कोच अटेंडेंट, मेंटेनेंस अमला कोच पर पहुंचा। इंजन से सातवें नंबर के कोच से धुआं उठता देख ड्राइवर व सहायक ड्राइवर भी अग्निशमन यंत्र लेकर पहुंचे लेकिन चार में से सिर्फ एक यंत्र ही काम कर सका। इस बीच आग पूरे कोच में फैल चुकी थी। तत्काल ग्वालियर स्टेशन और झांसी कंट्रोल को सूचना दी गई। बी-7 कोच में उत्तराखंड से ट्रैकिंग कर लौट रहे मप्र के 39 ट्रेनी डिप्टी कलेक्टर भी यात्रा कर रहे थे। हादसे में दो कोच पूरी तरह जल गए लेकिन कोई जनहानि नहीं हुई है।  डिप्टी कलेक्टर आरती यादव ने बताई आंखों देखी....


- हादसे के बाद ट्रेन 4.10 घंटे बाद 4 बजे दो कोच बिरलानगर स्टेशन पर छोड़कर झांसी की ओर रवाना हो गई।

- हादसे के कारण दोनों ओर के ट्रैक पर 4 घंटे तक भोपाल जाने वाली ट्रेनें मथुरा, आगरा व मुरैना में खड़ी रहीं।

- अग्निकांड की जांच के लिए मुख्य संरक्षा अधिकारी एसके कश्यप अपनी टीम के साथ मंगलवार को ग्वालियर पहुचेंगे। 

 

आंखों देखी : स्टाफ सजग होता तो बच जाते कोच

- वाश रूम में मुझे वाश बेसिन के नीचे दीपक की लौ जैसी आग लगती दिखी और उसमें से धुआं निकल रहा था।

- बाहर आकर मैंने इसकी सूचना कोच अटेंडेंट को दी। उसने कहा ट्रेन रुकने पर कई बार धुआं उठता है। अगर वह समय पर ध्यान देता तो कोच नहीं जलते।  
-आरती यादव, डिप्टी कलेक्टर विदिशा (यात्री)

 

ओएचई लाइन डाउन होने से आगे नहीं बढ़ी गाड़ी

अग्निशमन यंत्र के जरिए आग बुझाने के प्रयास सफल नहीं हो पाए। हमने बी-5 कोच की कपलिंग काटकर बी-6 कोच से अलग करने का प्रयास किया ताकि गाड़ी को आगे बढ़ाया जा सके। लेकिन ओएचई लाइन डाउन हो गई, गाड़ी भी आगे नहीं बढ़ा पाए। कुछ ही देर में तार पिघलकर नीचे गिर गया।   
-धर्मेंद्र, एपी एसी एक्सप्रेस के सहायक पायलट

 

 

अग्निशमन यंत्र ठीक होते तो नहीं भड़कती आग
यात्री की सूचना पर कोच अटेंडेंट व मेंटेनेंस अमले ने टॉयलेट से उठ रहे धुएं को काबू करने के लिए कोच बी-7 और बी-6 में लगे 2-2 अग्निशमन यंत्र का उपयोग किया, लेकिन चार में से एक यंत्र ही चला। 3 अग्निशमन यंत्र खराब थे। ड्राइवर भी अग्निशमन यंत्र लेकर पहुंचे लेकिन तब तक आग पूरे टॉयलेट में फेल चुकी थी।

 

पहले फोन नहीं उठा, फिर देर से पहुंची दमकल
स्टेशन मैनेजर ने दमकल दस्ते को फोन किया लेकिन फोन नहीं उठा। उसके बाद पुलिस कंट्रोल रूम को सूचना दी गई। इसके बावजूद घटनास्थल पर पहली दमकल 35 मिनट बाद पहुंची, इसका भी पाइप फटा था। दूसरी दमकल 5 मिनट बाद पहुंची तो उसका पानी जल्द खत्म हो गया। इससे आग पर काबू नहीं पाया जा सका।

 

पेंट्रीकार स्टाफ और सेना के जवानों ने की यात्रियों की मदद

बी-7 व बी-6 कोच में सेना के 20 जवान भी यात्रा कर रहे थे और बी-7 कोच के पास पेंट्रीकार लगा हुआ था। सेना के जवान व पेंट्रीकार के कर्मचारियों ने यात्रियों का सामान निकालने में मदद की। पेंट्रीकार का सामान कांच फोड़ कर जल्दी-जल्दी निकाला गया। ओएचई लाइन टूट कर ट्रेन पर गिरी जिससे करंट के डर से सेना के जवान व अन्य लोग फिर कोच में नहीं घुसे जिससे यात्रियों का सामान निकालने वाले जवानों का सामान भी कोच में जल गया।