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एपल की किसी भी डिवाइस पर क्रिप्टोकरंसी की माइनिंग नहीं होगी, कंपनी ने बनाए ये 5 नियम

क्रिप्टोकरंसी की माइनिंग होने से डिवाइस की बैटरी जल्दी खत्म हो जाती थी।

dainikbhaskar.com | Last Modified - Jun 13, 2018, 01:04 PM IST

एपल की किसी भी डिवाइस पर क्रिप्टोकरंसी की माइनिंग नहीं होगी, कंपनी ने बनाए ये 5 नियम

गैजेट डेस्क। अमेरिकी टेक्नोलॉजी कंपनी एपल की किसी भी डिवाइस पर अब क्रिप्टोकरंसी की माइनिंग नहीं होगी। इनमें आईफोन से लेकर आईपैड और मैक कंप्यूटर भी शामिल है। इसके लिए कंपनी ने ऐप स्टोर से उन सभी ऐप को प्रतिबंधित कर दिया है, जो क्रिप्टोकरंसी की माइनिंग करती थीं। साथ ही ऐप स्टोर के लिए नई गाइडलाइंस भी जारी की हैं। दरअसल, माइनिंग होने से आईफोन या आईपैड की बैटरी तेजी से खत्म होती थी और डिवाइस भी गर्म हो जाता था।

क्रिप्टोकरंसी के लिए बनाए 5 नियम

1. वॉलेट : एप पर वर्चुअल करेंसी की स्टोरेज की जा सकती है, बशर्ते वे डेवलपर संस्थान द्वारा दिए गए हों।

2. माइनिंग : करेंसी माइनिंग वाले उन्हीं एप को इजाजत होगी जो डिवाइस के बाहर प्रोसेसिंग करते हैं। जैसे क्लाउड-बेस्ड माइनिंग।

3. एक्सचेंज : एप के जरिए एक्सचेंज पर क्रिप्टोकरेंसी का ट्रांजैक्शन किया जा सकता है। करेंसी एक्सचेंज ही देगा।

4. आईसीओ : एप पर बैंक, सिक्युरिटी फर्म या स्वीकृत वित्तीय संस्थानों के इनिशियल कॉइन ऑफरिंग को ही इजाजत होगी।

5. करेंसी : क्रिप्टोकरेंसी एप से दूसरे एप डाउनलोड करने जैसे दूसरे काम के लिए वर्चुअल क्वाइन नहीं दिया जा सकेगा।

आसान नहीं है आईफोन से क्रिप्टो माइनिंग

- आईफोन या आईपैड के जरिए क्रिप्टोकरेंसी की माइनिंग पहले भी आसान नहीं थी, क्योंकि माइनिंग में बिजली की बहुत खपत होती है।
- उदाहरण के लिए माइनिंग प्रोसेसर एंटीमाइनर एस9 दो फ्रिज और एक टीवी के बराबर बिजली खर्च करता है।

एक बिटकॉइन बनाने में 200 यूनिट बिजली खर्च

- बिटकॉइन माइनिंग के लिए 2017 में 20,000 गीगावाट बिजली का इस्तेमाल हुआ। यह पूरे आयरलैंड में खपत होने वाली बिजली के बराबर है। वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम के मुताबिक बिटकॉइन में बिजली की खपत हर महीने 25% बढ़ रही है।
- इस रफ्तार से 2019 में इसमें पूरे अमेरिका और 2020 में पूरी दुनिया की खपत के बराबर बिजली खर्च होगी। एक बिटकॉइन बनाने में 200 यूनिट बिजली खर्च होती है।

क्या है बिटकॉइन?

- बिटकॉइन की शुरुआत जनवरी 2009 में हुई थी। इस वर्चुअल करेंसी का इस्तेमाल कर दुनिया के किसी कोने में किसी व्यक्ति को पेमेंट किया जा सकता है और सबसे खास बात यह है कि इस भुगतान के लिए किसी बैंक को माध्यम बनाने की भी जरूरत नहीं पड़ती।

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