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10 कहानियां: 3 साल की मेहनत के बाद बना था पहला iPhone, इसे बनाने वाली टीम को भी नहीं पता था किस पर काम कर रहे हैं / 10 कहानियां: 3 साल की मेहनत के बाद बना था पहला iPhone, इसे बनाने वाली टीम को भी नहीं पता था किस पर काम कर रहे हैं

DainikBhaskar.com

Sep 12, 2018, 09:07 PM IST

पहला iPhone पेश समय शायद स्टीव जॉब्स को भी नहीं पता रहा होगा कि एक दिन यह दुनिया में राज करेगा।

10 secret stories about apple and iphone
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गैजेट डेस्क. एपल का सालाना इवेंट बुधवार को होने जा रहा है, जिसमें कंपनी इस साल के तीन iPhone लॉन्च करेगी। 11 साल पहले एपल ने अपना पहला iPhone लॉन्च किया था। ये एक ऐसा डिवाइस था, जो टचस्क्रीन था और 2G नेटवर्क पर काम करता था। इसके बाद से ही कंपनी हर साल iPhone में नई टेक्नोलॉजी और इनोवेशंस जोड़ती रही है। जब स्टीव जॉब्स ने दुनिया के सामने पहला iPhone पेश किया था तब शायद उन्हें भी नहीं पता होगा कि एक दिन iPhone इस दुनिया में राज करेगा। आज फिर से दुनिया के सामने नए iPhone सामने आने वाले हैं और इसी मौके पर हम iPhone से जुड़ी कुछ ऐसी कहानियां बताने जा रहे हैं, जिसके बारे में आपने शायद ही कभी सुना हो।

1. जॉब्स को ही था बस iPhone का आइडिया: ब्रायन मर्चेंट ने 'द वन डिवाइस : द सीक्रेट ऑफ द आईफोन' नाम से एक किताब लिखी है। इस किताब में उन्होंने लिखा है कि iPhone बनाने का आइडिया सिर्फ स्टीव जॉब्स को ही पता था और उन्होंने इस बात को किसी से शेयर नहीं किया था। जॉब्स ने जब पहले iPhone बनाने का सोचा तो इसके लिए एक टीम बनाई थी, जिसको लेकर जॉब्स की शर्त थी कि इस टीम में कंपनी के बाहर का कोई भी आदमी शामिल नहीं होगा।

2. टीम को भी नहीं पता था किस पर काम हो रहा है: स्टीव जॉब्स ने अपने इस प्रोजेक्ट का नाम 'प्रोजेक्ट पर्पल' रखा था। इसके लिए कूपरटिनो में एक बिल्डिंग को लिया गया। इस बिल्डिंग के पास रहने वाले लोगों को भी नहीं पता था कि इसमें क्या काम चल रहा है। इसके साथ ही प्रोजेक्ट पर्पल में शामिल टीम के लोगों को भी इस बारे में नहीं पता था कि वे किस पर काम कर रहे हैं।

3. किसी को बाहर जाने की इजाजत नहीं थी: जब कूपरटिनो की एक बिल्डिंग में पहले iPhone को बनाने का काम शुरू हुआ, उससे पहले ही जॉब्स ने शर्त रख दी थी कि टीम को दिन-रात काम करना होगा। इस टीम के किसी भी सदस्य को उस बिल्डिंग से बाहर जाने की इजाजत नहीं थी। दरअसल, जॉब्स नहीं चाहते थे कि किसी को भी इस बारे में पता चले।

4. तीन साल की मेहनत के बाद आया था पहला iPhone: स्टीव जॉब्स ने iPhone बनाने वाली टीम को बस इतना ही बताया था कि ये अब तक का सबसे बड़ा प्रोडक्ट होगा। इसके बाद हजारों इंजीनियर्स की टीम दिन-रात मेहनत करती रही और तीन साल बाद 29 जून 2007 को दुनिया ने पहला iPhone देखा।

5. पहले iPhone की लॉन्चिंग के दौरान नशे में थे एपल के इंजीनियर्स: 9 जनवरी 2007 को जब स्टीव जॉब्स सेन फ्रांसिस्को के मॉस्कॉन सेंटर में दुनिया का पहला आईफोन लॉन्च कर रहे थे उस समय एपल के इंजीनियर्स और मैनेजर्स नशे में धुत थे। वे ऑडियंस में बैठकर स्कॉच और विस्की पी रहे थे। न्यूयॉर्क टाइम्स में छपी खबर के मुताबिक, लॉन्च के समय इंजीनियर्स नर्वस और डरे हुए थे। क्योंकि जॉब्स स्टेज पर दुनिया के सामने पहला iPhone पेश कर रहे थे और अगर डिवाइस में कोई गड़बड़ी हुई या डेमो दिखाते समय फोन ठीक से परफॉर्म नहीं कर पाया तो बाद में उन्हें जॉब्स के गुस्से का शिकार होना पड़ेगा।

6. पहले iPhone में थी कई कमियां: दुनिया का पहला iPhone पेश करने के लिए स्टीव जॉब्स जो हैंडसेट स्टेज पर लेकर गए थे, उसमें कई कमियां थीं। वह डिवाइस वीडियो या सॉन्ग तो प्ले कर सकता था, लेकिन अगर उसपर पूरा वीडियो क्लिप प्ले किया जाता तो वह क्रैश हो सकता था। लॉन्चिंग के समय जिन ऐप्स का डेमो दिया गया था वे सभी पूरी तरह से डेवलप नहीं हो पाए थे। इंजीनियर्स को डर था कि वे डेमो दिखाते समय ही क्रैश न हो जाएं।

7. जॉब्स ने सॉफ्टवेयर टीम को दीवार पर सिर मारने को कहा था: एपल की सॉफ्टवेयर टीम ने iOS, सलाइड टू अनलॉक, टच म्यूजिक प्लेयर, बाउंस बैक इफेक्ट और टेक्स्ट मैसेज कनवर्सेशन का व्यू बदलने जैसे कई फीचर्स बनाए। लेकिन जब उन्होंने जॉब्स के सामने इसे पेश किया तो सॉफ्टवेयर टीम को दीवार में सिर मारने को कहा गया क्योंकि जॉब्स को फोन में वे फीचर्स नहीं मिल पाए थे जो उन्हें चाहिए थे। इसके बाद iPhone की सॉफ्टवेयर टीम तब तक ऐसे कमरे में बैठकर सॉफ्टवेयर बनाती रही जिसमें खिड़की भी नहीं थी। ऐसा तब तक चला जब तक कि जॉब्स को फोन में वे सभी फीचर्स नहीं मिल गए जिनकी उन्होंने कल्पना की थी।

8. आईफोन प्रोजेक्ट: जॉब्स चाहते थे कि एपल का प्रोडक्ट दिखने में 'COOL' हो। कंपनी ने फोन का प्रारूप बनाने के लिए लगभग 150 मिलियन डॉलर (लगभग 947 करोड़ 55 लाख रुपए) खर्च किए। जॉब्स के सामने आईफोन के कई प्रारूप पेश किए गए लेकिन उन्होंने सभी को सिरे से नकार दिया। इसके बाद जॉब्स और एप्पल के डिजाइन गुरु जॉनी एल वे ने मिलकर एक ऐसा आईफोन बनाया जिसकी बॉडी एल्युमिनियम से बनी थी। बनने के बाद उन्हें इस बात का एहसास हुआ कि एल्युमिनियम बॉडी फोन में रेडियो फ्रिक्वेंसी को आने से रोकेगी। इसके बाद कई डिजाइन्स को रिजेक्ट करने के बाद जॉब्स ने पहले आईफोन की डिजाइन को फाइनल किया था।

9. जॉब्स ने पहले आईपॉड को फिश टैंक में फेंक दिया था: जब एपल अपना पहला आईपॉड लॉन्च करने की तैयारी में थी। इंजीनियर्स ने रात-दिन एक करके आईपॉड का प्रारूप तैयार किया। लेकिन जब इसे जॉब्स के अप्रूवल के लिए उनके सामने पेश किया गया तो उनका रिएक्शन चौंकाने वाला था। उन्होंने आईपॉड को उठाया और पास रखे फिश टैंक में फेंक दिया। इसे पानी में फेंकने का कारण बताते हुए जॉब्स ने कहा कि इसका वजन बहुत ज्यादा है और यह साइज में भी बड़ा है। इंजिनियर्स ने उन्हें समझाने की कोशिश की कि इससे छोटा आईपॉड नहीं बनाया जा सकता। ये सुनकर जॉब्स कुछ सेकंड के लिए चुप रहे। इसके बाद उन्होंने पानी में पड़े आईपॉड की तरफ इशारा करते हुए कहा कि इसमें से बुलबुले निकल रहे हैं, इसका मतलब है कि इसमें अभी भी जगह है और इसे और छोटा बनाया जा सकता है।

10. एपल प्रोडक्ट्स में 'i' का इस्तेमाल: एपल ने पहली बार Mac कंप्यूटर में 'i' का शब्द का यूज किया था और इसे iMac के नाम के साथ लॉन्च किया था। इसे लॉन्च करते हुए स्टीव जॉब्स ने कहा था कि जब MacIntosh फेल हो गया था तो हम एक ऐसे कंप्यूटर पर काम कर रहे थे, जिसमें इंटरनेट का इस्तेमाल किया जा सके। इसमें इंटरनेट से 'i' लिया गया।' इसके बाद से ही एपल के हर प्रोडक्ट्स में 'i' का इस्तेमाल किया जाने लगा।

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