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एपल ने सफारी को और सिक्योर बनाया, अब फेसबुक जैसी सोशल साइट्स नहीं ले पाएंगी यूजर्स का डेटा

ब्राउजिंग करते समय एक पॉप अप विंडो ओपन होगी, जिसमें यूजर से उनकी परमिशन मांगी जाएगी।

dainikbhaskar.com | Last Modified - Jun 05, 2018, 05:27 PM IST

एपल ने सफारी को और सिक्योर बनाया, अब फेसबुक जैसी सोशल साइट्स नहीं ले पाएंगी यूजर्स का डेटा

गैजेट डेस्क। एपल ने अपनी सालाना डेवलपर कॉन्फ्रेंस में कई बड़े अनाउंसमेंट किए। कंपनी के वाइस प्रेसिडेंट क्रैग फेडरिगी ने सोशल साइट के द्वारा डेटा कलेक्शन को खतरनाक बताते हुए इसे रोकने के लिए अपने डिफॉल्ट ब्राउजर सफारी को पहले से ज्यादा सिक्योर और प्राइवेट किया है। इस साल आने वाले आईफोन, आईपैड और मैक के लिए सॉफ्टवेयर अपडेट में सफारी पहले से ज्यादा सिक्योर हो जाएगा, जिससे फेसबुक जैसी सोशल साइट्स यूजर्स के डेटा का यूज नहीं कर पाएंगी।

डेटा यूज करने से पहले यूजर की लेनी होगी परमिशन

- क्रैग फेडरिगी ने सोमवार को डेवलपर कॉन्फ्रेंस में सफारी वेब ब्राउजर का डेमो देते हुए बताया कि ब्राउजिंग करते हुए एक पॉप-अप विंडो खुलेगी, जो फेसबुक समेत सोशल नेटवर्किंग साइट्स से डेटा शेयर करने से पहले यूजर की परमिशन मांगेंगी।
- उन्होंने बताया कि सोशल साइट्स पर शेयर बटन होती हैं, जो वेब कंटेंट को शेयर करती हैं, लेकिन इससे यूजर्स का डेटा भी शेयर होता है। लेकिन अब यूजर पर डिपेंड करेगा कि वो सोशल साइट्स के साथ किस तरह का डेटा शेयर करना चाहते हैं।
- कंपनी ने अपने नए सिस्टम के बारे में भी बताया जो वेब ब्राउजिंग के जरिए यूजर्स के बारे में जानकारी इकट्ठी होने से रोकता है। क्रैग ने बताया कि जब हम किसी साइट पर विजिट करते हैं, तो एडवर्टाइजर्स यूजर्स को ट्रैक करने के लिए एक 'फिंगरप्रिंट' क्रिएट करता है लेकिन सफारी ऐसा करने से रोकेगा।

2011 में इंटीग्रेशन जोड़ा, 2017 में हटाया

- एपल ने 2011 में iOS 5 लॉन्च किया था, इसमें कंपनी ने ट्विटर इंटीग्रेशन को जोड़ा। इसके बाद अगले साल iOS 6 लॉन्च किया, जिसमें फेसबुक के लिए और 2013 में iOS 7 में लिंक्डइन और वीमियो के लिए इंटीग्रेशन जोड़ा।
- ये इंटीग्रेशन iOS सेटिंग से ही यूजर्स के सोशल मीडिया अकाउंट्स को लॉग-इन कर सकते थे। इसके साथ ही आईफोन यूजर्स फेसबुक और ट्विटर के साथ अपने कॉन्टेक्ट सिंक कर सकते थे, लेकिन इस फीचर को कंपनी ने 2017 में iOS 11 में हटा दिया।

फेसबुक ने 60 कंपनियों के साथ

- फेसबुक ने डिवाइस बनाने वाली 60 कंपनियों के साथ डेटा शेयर करने का समझौता किया था, इनमें एप्पल और माइक्रोसॉफ्ट जैसी कंपनियां शामिल थीं।
- एक रिपोर्ट के मुताबिक, फेसबुक ने इन कंपनियों के साथ उपभोक्ताओं ही नहीं, उनके दोस्तों की जानकारियां भी साझा की थीं और इससे निजता खतरे में पड़ी।
- ये खुलासा ऐसे वक्त में हुआ है, जब फेसबुक 8.7 करोड़ लोगों का डेटा गलत तरीके से शेयर करने के मामले में आलोचनाओं का सामना कर रही है। हालांकि, फेसबुक ने इन समझौतों का बचाव करते हुए कहा कि इससे किसी भी तरह से निजता को खतरा पैदा नहीं हुआ।
- फेसबुक ने कहा कि कुछ पार्टनर यूजर्स और दोस्तों का डेटा अपने सर्वर पर स्टोर नहीं करते हैं। जहां भी डेटा रखा जाता है, उसका संचालन कंपनियों के बीच हुए सख्त समझौतों के तहत होता है।

कंपनियों ने दी सफाई

एप्पल:प्रवक्ता ने कहा कि कंपनी बिना फेसबुक एप्लीकेशन खोले सोशल नेटवर्क पर तस्वीरें पोस्ट करने वाला फीचर उपभोक्ता को उपलब्ध कराने के लिए फेसबुक द्वारा उपबल्ध कराए निजी डेटा पर निर्भर है। पिछले साल सितंबर के बाद से हमारे फोन में डेटा तक इस तरह की पहुंच नहीं है।

सैमसंग और अमेजन:दोेनों कंपनियों ने डेटा शेयरिंग पार्टनरशिप के बारे में जवाब देने से इनकार कर दिया।

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