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तीरंदाजी एकाग्रता, धैर्य व परिश्रम का मिश्रण

एक वर्ष पहले
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सिल्ली| महाभारत में अर्जुन को श्रेष्ठ धनुर्धारी बताया गया है। क्योंकि अर्जुन ने अपने परिश्रम और लगन से घूमती हुई मछली के आंख पर सटीक निशाना लगाया था। ऐसा ही प्रयास राजधानी रांची के सिल्ली स्थित बिरसा मुंडा आर्चरी सेंटर में देखने को मिल रहा है। अर्जुन अवार्ड से सम्मानित अभिषेक वर्मा सेंटर के बच्चों को आचार्य द्रोण की तरह प्रशिक्षित कर रहे हैं। अभिषेक वर्मा सेंटर के बच्चों को तकनीकी रूप से प्रशिक्षण कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि तीरंदाजी एकाग्रता, धैर्य और परिश्रम का मिश्रण है। खिलाड़ी को एकाग्र होने की जरूरत है ताकि निशाना सही जगह पर लगे। धैर्य खिलाड़ियों को निशाने पर तीर लगाने की समझ देता है और परिश्रम से खिलाड़ी बिना किसी परेशानी के हर बार सटीक निशाना लगा सकता है।
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