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डाउनलोड करेंअर्जेंटीना ने ऑनलाइन खरीददारी पर नए प्रतिबंध लागू किए हैं. यह क़दम विदेशी मुद्रा भंडार में और ज़्यादा कमी को रोकने के लिए उठाया गया है.
पिछले साल अर्जेंटीना के मुद्रा भंडार में करीब 30 प्रतिशत तक की गिरावट हुई थी.
अंतरराष्ट्रीय वेबसाइट्स से ऑनलाइन सामान खरीदने वाले किसी भी व्यक्ति को सीमा शुल्क कार्यालय में एक हलफ़नामा प्रस्तुत करना होगा. इसके बाद ही उन्हें वहां से सामान मिलेगा. यह प्रक्रिया हर खरीद पर दोहराई जाएगी.
राष्ट्रपति क्रिस्टीना फर्नांडीज़ डी किरचनर की सरकार ने विदेशी मुद्रा में कारोबार पर अनेक प्रतिबंध लागू किए हैं.
(पढ़ेंः\'गांव उबारेंगे आर्थिक बदहाली के संकट से\')
ऑनलाइन खरीददारीअमेज़न और ईबे जैसी वेबसाइट्स से ख़रीदा जाने वाला सामान अब सीधे डाक से लोगों के घरों तक नहीं पहुंचेगा. आयात करने वाले लोगों को सीमाशुल्क कार्यालय से अपना सामान प्राप्त करना होगा.
हर व्यक्ति को विदेशों से 25 डॉलर (लगभग 1,547 रुपये तक) की टैक्स फ्री खरीदारी की अनुमति दी गई है, लेकिन सीमाशुल्क कार्यालय के अधिकारियों के लिए हर उपभोक्ता का रिकॉर्ड रखना काफ़ी मुश्किल हो रहा है.
एक बार 25 डॉलर की सीमा तक पहुंचने के बाद हर ऑनलाइन उपभोक्ता को अंतरराष्ट्रीय वेबसाइट से खरीदे गए हर सामान पर 50 फ़ीसदी टैक्स चुकाना होगा.
ब्यूनस आयर्स में बीबीसी संवाददाता इगैनिको डि लॉस रेयेस कहते हैं कि सरकार को उम्मीद है कि नए क़दमों से सीमाशुल्क अधिकारियों के लिए आयात कर को लागू करने में सहूलियत होगी.
विदेशी मुद्रा भंडारफर्नांडीज़ के 2011 में दोबारा चुने जाने के एक हफ़्ते बाद ही मुद्रा पर नियंत्रण के नए उपायों को लागू किया गया था.
ताज़ा नियमों में क्रेडिट कार्ड के जरिए विदेशों से होने वाली खरीददारी पर 35 फ़ीसदी सीमाशुल्क लागू किया गया है.
सरकारी प्रयासों के बावजूद अर्जेंटीना का मुद्रा भंडार 30 अरब डॉलर के स्तर से नीचे आ गए हैं, यह 2006 में पहुंचे न्यूनतम स्तर से भी कम है.
मुद्रा नियंत्रण 80 के मध्य तक अधिकांश देशों में सामान्य सी बात थी, लेकिन अर्जेंटीना में 1991 में इसे बंद कर दिया गया था. वित्त मंत्री डोमिंगो कावलो ने डॉलर के साथ-साथ स्थानीय मुद्रा पेस्को को भी बढ़ावा देना शुरू किया था.
लेकिन दस साल बाद यह योजना विफल हो गई थी और अर्जेंटीना की सरकार को अपनी मुद्रा का अवमूल्यन करना पड़ा था.
अंत में बैंक खातों को फ़्रीज़ करना पड़ा था और सरकार अपने ऋणों का भुगतान नहीं कर सकी थी. इसके बाद से सरकार विदेशी कर्ज या ऋणों को आकर्षित करने के लिए संघर्ष कर रही है.
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