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डाउनलोड करेंस्विट्ज़रलैंड स्थित एचएसबीसी के प्राइवेट बैंक ने दुनिया के कई राजनेताओं, जानी-मानी हस्तियों और अपराधियों को कर बचाने या फिर कर की चोरी करने में मदद की थी.
बीबीसी और कुछ अंतरराष्ट्रीय मीडिया संस्थानों को लीक किए गए दस्तावेज़ों के अनुसार इन हस्तियों में कई भारतीय ख़ाताधारक के भी नाम हैं.
इस मामले में भारत के वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कहा, “60 के ख़िलाफ़ मुकदमे चल रहे हैं. स्विस ऑथोरिटी का कहना है कि वो चुराए गए डेटा पर वो कार्रवाई नहीं करते हैं. लेकिन उन्होंने अब माना है कि यदि अतिरिक्त सबूत दिए जाएँ तो वो सहयोग देंगे.\"
जेटली ने सोमवार को मीडिया को बताया, “ये पैसा और खाते 2006-2007 के हैं जिनके बारे में 2010 में जानकारी आई थी. इन मामलों में पेनल्टी और सज़ा की कार्रवाई 2014 से चल रही है. रेवेन्यू डिपार्टमेंट इन लोगों के संपर्क में है. स्विट्ज़रलैंड में सरकार ने माना है कि जिन लोगों ने कर चोरी की बात मानी है, उनके संदर्भ में भी वे कार्रवाई में सहयोग करेंगे.”
एचएसबीसी मामले में सारे अकाउंट 2007 के हैं.
उनका ये भी कहना था कि अधिकतर नाम वही हैं जो भारत सरकार के पास पहले से हैं, लेकिन केवल नाम से अदालती कार्रवाई नहीं हो पाएगी.
वित्त मंत्री ने कहा कि कुछ नए नाम आए हैं, सबूत जुटाने होंगे और यदि वे भारतीय नागरिक हैं और उनका अकाउंट है तो मुकदमा चलेगा.
मामले की छानबीन करने वाली संस्था \'अंतरराष्ट्रीय कंसोर्टियम ऑफ़ इन्वेस्टिगेटिव जर्नलिस्ट्स\' में 45 दशों के करीब 140 पत्रकार शामिल हैं.
इसमें फ्रांस के जाने माने अखबार \'ली मोंद\', ब्रिटेन की बीबीसी और द गार्डियन अखबार, अमरीकी कार्यक्रम 60 मिनट्स, भारतीय अख़बार इंडियन एक्सप्रेस और 45 से अधिक मीडिया संस्थान मिलकर जानकारी जुटा रहे हैं.
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