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डाउनलोड करेंजोधपुर। आसाराम प्रकरण में फैसले की नजदीक आती तिथि ने राज्य सरकार की नींद उड़ा कर रख दी है। आसाराम प्रकरण का फैसला कोर्ट पच्चीस अप्रेल को सुनाएगा। फैसले के दिन देशभर से बड़ी संख्या में आसाराम के समर्थकों का जोधपुर में जमावड़ा लगने की आशंका पुलिस व प्रशासन को सता रही है। डेरा प्रमुख गुरमीत राम रहीम को एक मामले में सजा सुनाए जाने के बाद व्यापक स्तर पर हुई हिंसा को ध्यान में रख राज्य सरकार ने हाईकोर्ट में एक अपील दायर कर इस मामले का फैसला जेल में ही आसाराम के समक्ष सुनाए जाने का आग्रह किया है। इस पर हाईकोर्ट ने आसाराम के वकील से अपना जवाब मांगा है। पच्चीस को आएगा फैसला…
- एक नाबालिग छात्रा के यौन उत्पीड़न के आरोप में आसाराम साढ़े चार साल से जोधपुर जेल में बंद है। इस प्रकरण से जुड़ी सुनवाई ट्रायल कोर्ट में पूरी हो चुकी है और कोर्ट ने पच्चीस अप्रेल को फैसला सुनाने की तिथि तय कर दी है। साढ़े चार साल की अवधि में आसाराम को कोर्ट में पेश किए जाने के दौरान देशभर से बड़ी संख्या में उनके समर्थक जोधपुर आते रहे है। आसाराम के बेकाबू समर्थक हमेशा पुलिस के लिए परेशानी का सबब बने रहे। समर्थकों को काबू में करने को पुलिस ने कई बार डंडे फटकारे, लेकिन इनकी संख्या पर अंकुश नहीं लग पाया।
राज्य सरकार ने दायर की अपील
- स्थानीय पुलिस प्रशासन खुलकर बता नहीं पा रहा है कि पच्चीस अप्रेल को फैसला सुनाए जाने के दौरान आसाराम के कितने समर्थकों के जोधपुर आने की संभावना है। लेकिन माना जा रहा है कि यह संख्या एक लाख को पार कर सकती है। ऐसे में कानून व्यवस्था बनाए रखने में दिक्कत आ सकती है। इसे ध्यान में रख राज्य सरकार ने शुक्रवार को एक हाईकोर्ट में एक अपील कर इस फैसले को जेल के भीतर ही सुनाए जाने की अपील की। उनका तर्क था कि आसाराम के समर्थकों की बड़ी संख्या के कारण शहर की कानून व्यवस्था गड़बड़ा सकती है। आसाराम के समर्थकों के कारण शहर के लोगों को परेशान नहीं किया जा सकता है।
- आसाराम के वकील महेश बोड़ा ने इसका प्रतिवाद किया और कहा कि ऐसा कोई प्रावधान नहीं है। जब सुनवाई नियमित कोर्ट में हो सकती है तो फैसला भी वहीं पर सुनाया जा सकता है। दोनों पक्ष को सुनने के बाद हाईकोर्ट के न्यायाधीश गोपालकृष्ण व्यास और न्यायाधीश रामकृष्ण सिंह की खंडपीठ ने उनसे लिखित में अपना जवाब पेश करने को कहा। बोड़ा ने इसके लिए थोड़ा समय मांगा। खंडपीठ ने उनसे मंगलवार तक अपना जवाब पेश करने को कहा है। अगली सुनवाई मंगलवार को ही होगी।
यह है प्रावधान
- कुछ विशिष्ट मामलों में हाईकोर्ट जेल में फैसला सुनाने का आदेश जारी कर सकता है। आसाराम समर्थकों के शहर में बढ़ते उत्पात को ध्यान में रख हाईकोर्ट पूर्व में इस मामले की सुनवाई जेल में कराने का आदेश जारी कर चुका है। बाद में आसाराम की अपील पर उन्हें कुछ शर्तों की पालना करने पर ही नियमित कोर्ट में सुनवाई का हाईकोर्ट ने आदेश दिया था.
- आसाराम के वकील महेश बोड़ा का मानना है कि हाईकोर्ट ऐसा आदेश जारी कर सकता है, लेकिन उसकी एक प्रक्रिया है। इसके लिए पहले उसे नोटिफिकेशन जारी करना पड़ता है। इस मामले में इसकी पालना नहीं की गई। सिर्फ फैसले के लिए कोर्ट को जेल में शिफ्ट नहीं किया जा सकता है।
इस कारण पुलिस की उड़ी नींद
- गत वर्ष अगस्त में डेरा प्रमुख गुरमीत राम रहीम को एक रेप केस में अदालत ने दोषी करार दिया था। इसके बाद उनके समर्थक हिंसा पर उतर आए थे। इस कारण बड़ी संख्या में लोग मारे गए थे और व्यापक स्तर पर तोड़फोड़ होने से भारी नुकसान हुआ था। इसके बाद अदालत ने सजा की घोषणा जेल में ही कोर्ट लगाकर की थी। ताकि कानून व्यवस्था न बिगड़े। पुलिस अब आसाराम के समर्थकों से घबरा कर जेल में ही सजा का फैसला सुनवाना चाहती है ताकि समर्थकों को आसानी से नियंत्रित रखा जा सके।
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