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डाउनलोड करेंरांची. विधानसभा सचिवालय के सहायकों को प्रमोशन देने में बड़ी गड़बड़ी का खुलासा हुआ है। जब इन्हें प्रमोशन दिया गया, उस समय उनकी नियुक्ति मामले की ही जांच चल रही थी। न्यायिक आयोग का नोटिस मिलने के बाद विधानसभा सचिवालय की नींद खुली। 75 सहायकों को प्रशाखा पदाधिकारी बनाने के मामले की जांच कर रहे आयोग ने विधानसभा के तत्कालीन अध्यक्ष शशांक शेखर भोक्ता समेत अन्य अफसरों को नोटिस देकर पूछा है कि जब नियुक्तियों की जांच चल रही थी, तो आरोपियों को प्रमोशन कैसे दिया। आयोग की सहमति के बिना प्रक्रिया शुरू की और इसमें तमाम गड़बड़ियां हुई। ऐसे में प्रमोशन को अवैध क्यों नहीं माना जाए।
न्यायिक आयोग के अध्यक्ष विक्रमादित्य प्रसाद ने जारी किया है नोटिस
#इन अफसरों को भी नोटिस
- सुशील कुमार सिंह, अपर सचिव
- विजय प्रसाद कुंअर, अपर सचिव
- रविन्द्र कुमार सिंह, संयुक्त सचिव
- गुरुचरण सिंकू, उप सचिव
- महेश नारायण सिंह, अवर सचिव
- जयप्रकाश पिंगुवा, प्रशाखा पदाधिकारी
आयोग ने कहा-आपकी संलिप्तता क्यों नहीं मानी जाए
- आयोग ने नोटिस में कहा है कि इन लोगों ने विशिष्ट व्यक्तियों के करीबियों को प्रशाखा पदाधिकारी में प्रमोशन देने के लिए वर्ष 2014 में नियम विरुद्ध तरीके से प्रमोशन देने का प्रस्ताव बनाया। इसे अध्यक्ष ने अनुमोदित कर दिया। मामले में आपकी संलिप्तता क्यों नहीं मानी जाए।
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