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अगर ग्रहों के दोष दूर नहीं होंगे तो कड़ी मेहनत भी हो जाती है बेकार, अंतिम पड़ाव पर पहुंचकर बिगड़ सकते हैं काम

नौ ग्रहों के नौ मंत्र, सही तरीके से कर लेंगे जाप तो दूर हो सकता है दुर्भाग्य

Danik Bhaskar | Jul 09, 2018, 06:54 PM IST
ज्योतिष में सूर्य, चंद्र, मंगल, ज्योतिष में सूर्य, चंद्र, मंगल,

रिलिजन डेस्क. ज्योतिष में सूर्य, चंद्र, मंगल, बुध, गुरु, शुक्र, शनि और राहु-केतु नौ ग्रह बताए गए हैं और इन सभी ग्रहों का अलग-अलग फल होता है। अगर कुंडली में इन ग्रहों की स्थिति शुभ नहीं है तो व्यक्ति को परेशानियों का सामना करना पड़ता है। ग्रह दोषों के कारण कड़ी मेहनत के बाद भी सफलता नहीं मिलती है, कई बार अंतिम पड़ाव पर पहुंचकर पूरा काम बिगड़ जाता है। उज्जैन के ज्योतिषाचार्य पं. मनीष शर्मा के अनुसार 9 ग्रहों के 9 मंत्र बताए गए हैं। इन मंत्रों के जाप से दुर्भाग्य दूर हो सकता है। जानिए ये मंत्र कौन-कौन से हैं और जाप की विधि…

मंत्र
सूर्य मंत्र - 'ऊँ सूर्याय नम:'
लाभ - सुबह जल्दी उठें और स्नान के बाद सूर्य को अर्घ्य देकर इस मंत्र का जाप करें। इस मंत्र के शुभ असर से पद, यश, सफलता, तरक्की सामाजिक प्रतिष्ठा, स्वास्थ्य, संतान सुख प्राप्त हो सकता है।
चंद्र मंत्र - 'ऊँ सोमाय नम:'
लाभ - मंत्र के जाप से मानसिक परेशानियां दूर होती हैं। पेट व आंखों की बीमारियों में राहत मिलती है।
मंगल मंत्र - 'ऊँ भौमाय नम:'
लाभ - इस मंत्र के जाप से भूमि, संपत्ति और विवाह से जुड़ी बाधाएं दूर हो सकती हैं।
बुध मंत्र - 'ऊँ बुधाय नम:'
लाभ - ये मंत्र बुद्धि और धन लाभ देता है। घर या कारोबार की आर्थिक समस्याएं व निर्णय क्षमता बढ़ाता है।
गुरु मंत्र - 'ऊँ बृहस्पतये नम:'
लाभ - मंत्र के जाप से वैवाहिक जीवन में सुख बना रहता है। सौभाग्य बढ़ता है।
शुक्र मंत्र - 'ऊँ शुक्राय नम:'
लाभ - इस मंत्र से वैवाहिक की परेशानियां दूर हो सकती हैं।
शनि मंत्र - 'ऊँ शनैश्चराय नम:'
लाभ - ये मंत्र शनिदेव की कृपा दिलवाता है। शनिदेव भक्त की सभी समस्याएं दूर हो सकती हैं।
राहु मंत्र - 'ऊँ राहवे नम:'
लाभ - यह मंत्र जाप मानसिक तनाव, विवादों को दूर करता है।
केतु मंत्र - 'ऊँ केतवे नम:'
लाभ - ये मंत्र जाप रिश्तों के तनाव को दूर करता है, जीवन में सुख-शांति बढ़ाता है।
मंत्र जप की सामान्य विधि
- जिस ग्रह के लिए मंत्र जप करना है, उस ग्रह की विधिवत पूजा करें।
- पूजा घर में या किसी मंदिर में कर सकते हैं। आसन पर बैठकर पूजा करें और प्रतिमाओं पर फूल, चावल, प्रसाद, वस्त्र, कुमकुम, माला आदि चीजें चढ़ाएं। धूप-दीप जलाएं।
- पूजा में संबंधित ग्रह के मंत्र का जाप करें। मंत्र जप की संख्या कम से कम 108 होनी चाहिए। जाप के लिए रुद्राक्ष की माला का उपयोग किया जा सकता है।