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डाउनलोड करेंजोधपुर। इनके पास कोई निर्धारित रूट मैप नहीं है और ना ही कोई बैकअप प्लान। इन्हें नहीं पता कि बीच रास्ते में कब रिक्शा खराब हो जाए, कब मार्ग भटक जाएं या कहीं फंस जाएं, लेकिन पर्यावरण बचाने की मुहिम को लेकर छह विदेशी कोच्चि से जैसलमेर तक के सफर को रिक्शा से तय कर रहे हैं। जुनून और जज्बा ऐसा कि रास्ते में आई हर एक चुनौती को मात देते हुए उत्साह के साथ रिक्शा रन की यह टीम 12 दिन की एडवेंचर जर्नी तय कर जोधपुर पहुंची। कलरफुल पेंट किए इन रिक्शा में म्यूजिक के लिए स्पीकर्स भी लगे हैं। इन रिक्शा में सवारी करते हुए ये भारत के विभिन्न कल्चर को एंजॉय कर रहे हैं। एडवेंचर ड्राइव के साथ कूल अर्थ का दे रहे मैसेज
- रिक्शा-रन एक एनजीओ है जो पर्यावरण संरक्षण की जागरुकता फैलाने व चेरिटी के लिए भारत, श्रीलंका और नेपाल में रिक्शा रन आयोजित करता है। भारत में जनवरी, अप्रैल और अगस्त में इसके टूर होते हैं। इसमें पार्टिसिपेट करने वाले टूरिस्ट अपने-अपने ऑटो रिक्शा को खूब सजाकर लाते हैं। हर बार अलग-अलग रूट होता है। पिछली बार 14 से 27 अगस्त को करीब 3500 किलोमीटर का रिक्शा रन आयोजित हुआ जो केरल से जैसलमेर के बीच था। इस बार यह करीब 2500 किमी का है जो एक अप्रैल को कोच्चि से शुरू हुआ है और 15 अप्रैल को जैसलमेर में पूरा होगा। हर मेंबर को चेरिटी के लिए फंड जुटाने का लक्ष्य होता है।
ऐसे तय कर रहे है सफर
- अपना एक्सपीरियंस शेयर करते हुए न्यूजीलैंड के मेहुल, फिल, प्रशांत और इंग्लैंड के सेई ने बताया कि उन्हें इंडिया व खासतौर से जोधपुर के लोग खूब फ्रेंडली लगे। जोधपुर में भीतरी शहर की छोटी-छोटी गलियां उनके लिए किसी आश्चर्य से कम नहीं रही। शुक्रवार सुबह ये फॉरेनर्स रिक्शा से ही मेहरानगढ़ गए और वहां फोर्ट विजिट किया। इन्होंने बताया कि लंबी जर्नी के कारण वे थक गए हैं इसलिए जोधपुर में ज्यादा टाइम नहीं दे पाएंगे। शुक्रवार दोपहर बाद यह टीम पोकरण के लिए रवाना हो गई। जैसलमेर पहुंच कर ये अपनी जर्नी पूरी करेंगे।
कभी पूजा में लिया हिस्सा तो कभी खेला क्रिकेट
- न्यूजीलैंड के स्टीवन ने बताया कि कोच्चि से गोवा, बेलगाम, सतारा, लोनावाला, दमन, सूरत और उदयपुर होते हुए यह टीम जोधपुर पहुंची। टीम में कोई बिल्डर है तो कोई इंजीनियर है और कोई बिजनेसमैन। वे जिस भी सिटी या विलेज में स्टे करते हैं, वहां के लोकल कल्चर को फील कर उसे एंजॉय करते हैं। अब तक समुद्र, जंगल, घाटी, वादियां, गांव और शहर घूमते हुए यहां पहुंचे हैं। उन्होंने बताया कि यदि उन्हें गली में बच्चे क्रिकेट खेलते मिल जाएं तो उन्हीं के साथ खेलने लग जाते हैं और किसी मंदिर में पूजा की आवाज आए तो वहां भी पहुंच जाते हैं।
राह में कम नहीं आई बाधा
- रिक्शा रन की इस टीम ने अपना जर्नी एक्सपीरियंस शेयर करते हुए बताया कि कई बार उनकी रिक्शा में मैकेनिकल प्रॉब्लम आ जाती है तो कई बार कोई टर्न ऑफ मिस कर जाते, जिससे ज्यादा चलना पड़ा। उदयपुर से जोधपुर आते हुए हुए भी एक टर्न ऑफ मिस हो गया। इस कारण उन्हें 25 किमी लंबा चक्कर लेना पड़ा। फिल ने बताया, सूरत में उनकी रिक्शा खराब हुई तो उसे ट्रक में लोड करना पड़ा और इस तरह उन्हें भी 10 घंटे ट्रक का ही सफर तय करना पड़ा जो बिल्कुल कंफर्टेबल नहीं रहा।
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