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इन्फर्टिलिटी के लिए खराब लाइफस्टाइल भी है जिम्मेदार

कई स्टडीज से साबित हो चुका है कि स्मोकिंग या धूम्रपान फर्टिलिटी खासकर पुरुषों की फर्टिलिटी के लिए घातक है।

Danik Bhaskar | Aug 24, 2018, 12:45 PM IST

हेल्थ डेस्क. दुनियाभर में इन्फर्टिलिटी बढ़ती जा रही है। इस मामले में भारत भी अपवाद नहीं है। यहां भी इन्फर्टिलिटी के मामले बढ़ते जा रहे हैं। पुरुष और महिलाएं दोनों ही इससे प्रभावित हैं। कई स्टडीज और रिसर्च में साबित हो चुका है कि इन्फर्टिलिटी की समस्या में बढ़ोतरी की वजह है खराब लाइफस्टाइल।

इन 7 वजहों से इन्फर्टिलिटी बढ़ रही है

1- ज्यादा स्मोकिंग करना

2- ज्यादा शराब पीना

एक लिमिट से ज्यादा शराब पीने से पुरुषों में टेस्टोस्टेरॉन नामक हॉर्मोन का स्तर कम हो जाता है। टेस्टोस्टेरॉन मेल हॉर्मोन होता है। इसकी कमी से इन्फर्टिलिटी और नपुंसकता का खतरा बढ़ जाता है।

3- नींद पूरी ना होना

आज की भागदौड़ वाली लाइफस्टाइल के कारण कई लोग पूरी नींद नहीं ले पाते हैं। कई एक्सपर्ट इस पर एकमत हैं कि हर व्यक्ति को रोजाना कम से कम 7 घंटे जरूर सोना चाहिए। पर्याप्त नींद नहीं लेने से शरीर में टॉक्सिक पदार्थ उत्पन्न होते हैं। इससे स्ट्रेस और डिप्रेशन बढ़ता है जिससे पुरुषों और महिलाओं दोनों की फर्टिलिटी कम होती है।

4- अधिक स्ट्रेस और टेंशन लेना

ज्यादा स्ट्रेस और टेंशन के कारण शारीरिक क्षमता पर असर पड़ता है। ज्यादा स्ट्रेस से पुरुषों में टेस्टोस्टेरॉन नामक हॉर्मोन का स्तर कम हो सकता है जो नपुंसकता की वजह बनता है। वहीं, जनरल ह्यूमन प्रोडक्शन की रिपोर्ट के अनुसार लगातार स्ट्रेस में रहने वाली महिलाओं में इन्फर्टिलिटी की संभावना बढ़ जाती है।

5-मोटापा

आज की लाइफस्टाइल के कारण मोटापा बढ़ रहा है। ज्यादा मोटे पुरुषों में टेस्टोस्टेरॉन नामक हॉर्मोन का स्तर कम हो जाता है। इससे फर्टिलिटी पर नकारात्मक असर पड़ता है। मोटापे से ही मधुमेह होने की आशंका भी बढ़ती है जो पुरुषों में नपुसंकता (इम्पोटेंसी और इरेक्टाइल डिस्फंक्शन) की वजह बनता है। नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ की एक रिपोर्ट के अनुसार महिलाओं में भी मोटापे की वजह से इन्फर्टिलिटी बढ़ रही है।

6- बढ़ती उम्र

लाइफस्टाइल में बदलाव के कारण दंपती प्रेग्नेंसी की लेट प्लानिंग करने लगे हैं। बढ़ती उम्र का असर भी खासकर महिलाओं की फर्टिलिटी पर पड़ता है। महिलाओं की फर्टिलिटी उम्र बढ़ने के साथ घटती जाती है। उम्र बढ़ने के साथ-साथ अंडों का उत्पादन तो कम होता ही है, अंडों की उत्तमता भी घटती जाती है। उन्नत मातृ आयु में अंडों में क्रोमोसोमल एब्नॉर्मलिटिज की आशंका भी रहती है जिसकी वजह से या तो गर्भधारण करने में दिक्कत हो सकती है या फिर गर्भपात की आशंका बढ़ जाती है।

7-जंक फूड

इन दिनों जंक फूड का चलन भी बढ़ रहा है। जंक फूड में जरूरी पोषक तत्व जैसे फोलिक एसिड, विटामिन बी-12 और ओमेगा-3 फैटी एसिड्स की मात्रा कम होती है जिसका हानिकारक असर महिलाओं की फर्टिलिटी पर पड़ता है। इसी तरह इनमें नमक और प्रिजर्वेटिव काफी ज्यादा होते हैं जिससे स्पर्म काउंट कम होता है, साथ ही स्पर्म की शक्ति भी कमजोर होती है।

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