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डाउनलोड करेंजयपुर. शहर में 100 करोड़ रुपए की घटिया सड़क बनाने पर तीन एडिशनल चीफ इंजीनियरों ने फील्ड में जाकर सैंपल जांच की। जांच रिपोर्ट के बाद दो साल पहले 87 इंजीनियरों को नोटिस दिया था। मामला उछला तो इसमें केवल 31 इंजीनियरों को चार्जशीट प्रस्तावित की। ज्यादातर इंजीनियर डेपुटेशन पर जेडीए आए थे तो इन्हे चार्जशीट नहीं मिली। अभी तक एक भी इंजीनियर पर कार्रवाई नहीं हुई। सभी आरोपी पहले की तरह उसी जगह काम कर रहे हैं। घटिया सड़क बनाने वाली ठेकेदार फर्मों को भी टेंडर बदस्तूर जारी हैं। यूडीएच ने एक जेईएन सहित चार की चार्जशीट प्रस्ताव खारिज कर दी। इस आधार पर सभी को बचाने की कवायद हो रही है। हाल यह है कि जेडीए की इंजीनियरिंग व प्रशासन विंग के अफसर आरोपी इंजीनियरों व ठेकेदारों पर सख्त कार्रवाई करने के बजाय नाम छुपाने में लगे हुए हैं। उन्हें आरोपी इंजीनियरों की बदनामी का डर है। ऐसे में पूरे प्रशासन विंग को सख्त हिदायत दे रखी है कि नाम उजागर नहीं हो।
यूडीएच को दी रिपोर्ट : जेडीए
जेडीए के एडिशनल कमिश्नर ओपी बुनकर का कहना है कि ज्यादातर इंजीनियर यूडीएच व दूसरे विभागों के थे, वहां पर जांच रिपोर्ट व चार्जशीट प्रस्ताव भिजवा दिए है। जेडीए ने कुछ को चार्जशीट भी दी है। आगे का निर्णय उच्च स्तर से ही किया जाएगा।
ये मिली थीं खामियां : जांच में कई जगह सड़कों की मोटाई कम पाई गई तो कई जगह डामर व बिटुमिन तय मानकों से नहीं था।
इंजीनियरों को नोटिस, कॉन्ट्रैक्टरों का बचाव
घटिया सड़क कॉन्ट्रैक्टरों ने बनाई। लेकिन जेडीए में केवल इंजीनियरों को नोटिस देकर चार्जशीट की कार्रवाई की, कॉन्ट्रैक्टर फर्मों के खिलाफ कुछ नहीं हुआ। सैंपल फेल वाली सभी फर्म जेडीए में काम कर रही है।
चीफ इंजीनियर व सुनवाई के बाद यूडीएच ने तीन एक्सईएन व एक जेईएन की चार्जशीट प्रस्ताव को ड्राॅप कर दिया। इसको आधार बना कर दूसरे इंजीनियर भी जेडीसी व यूडीएच में अपील करने की तैयारी कर रहे है। उनका कहना है कि एक ही तरह के अपराध में चार्जशीट ड्राप हुई है तो उनको भी बरी किया जाएगा।
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