बाकला की सब्जी किस्म बीएयू से विकसित होगी : डॉ कौशिक

News - राष्ट्रीय स्तर पर क्षमतावान फसलों की खेती को विशेष महत्व नहीं दिया गया है। इन फसलों के देश में मौजूद विभिन्न फसलें...

Jan 16, 2020, 07:51 AM IST
Ranchi News - bakala39s vegetable variety will grow from bau dr kaushik
राष्ट्रीय स्तर पर क्षमतावान फसलों की खेती को विशेष महत्व नहीं दिया गया है। इन फसलों के देश में मौजूद विभिन्न फसलें काफी पसंद किए जाते है और दैनिक भोज्य पदार्थ में इनका काफी उपयोग होता है। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) ने नेशनल ब्यूरो ऑफ प्लांट जेनेटिक रिसोर्स को क्षमतावान फसलों के उपयोग, गुण व भावी संभावनाओं को देखते हुए फसल प्रजाति का संरक्षण, नई किस्मों का विकास, जागरूकता अभियान और फसल विस्तारीकरण का कार्य सौपा है। इस संस्था के माध्यम से राष्ट्रीय व क्षेत्रीय स्तर पर कुल 12 केन्द्रों में शोध कार्यक्रम चलाया जा रहा है। इन शोध कार्यक्रमों की सभी केन्द्रों में आईसीएआर महानिदेशक द्वारा गठित पांच वर्षीय समीक्षा दल मूल्यांकन कर रहा है। उक्त बातें बीएयू में भ्रमणरत पांच वर्षीय समीक्षा दल के अध्यक्ष पूर्व बीएयू कुलपति डॉ. एमपी पांडे ने कहीं।

दल ने बुधवार को रबी मौसम के बाकला, रामदाना व बथूआ क्षेत्रों का भ्रमण किया। इस दौरान डॉ. पांडे ने कहा कि बीएयू, रांची केंद्र में क्षेत्रीय केंद्र के रूप में शोध कार्यक्रम चलाए जा रहे है। इस केंद्र के शोध तकनीक झारखण्ड से सटे समान जलवायु व मौसम वाले राज्यों बिहार, बंगाल, छत्तीसगढ़, ओड़िशा के लिए काफी महत्वपूर्ण होगी। प्रदेश में छह प्रकार के क्षमतावान फसलों की खेती की काफी संभावना है। इस क्षेत्र में बाकला, रामदाना, बथूआ, पंखिया सेम, खेकसा, कुल्थी और बोदी की सीमित स्तर पर खेती की जाती है। मौके पर निदेशक अनुसंधान डॉ डीएन सिंह ने प्रदेश के लिए उपयुक्त एवं लाभकारी क्षमतावान फसलों को प्राथमिकता देने पर बल दिया।

फसलों के बारे में जानकारी लेते कृषि वैज्ञानिक।

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