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डाउनलोड करेंढाका. हाल ही में बांग्लादेश हाई कोर्ट में गुरुवार को रेप विक्टिंग पर किया जाने वाला टू फिंगर टेस्ट को बैन कर दिया है। कोर्ट ने इसे घिनौना और पीड़ित के लिए अपमानजनक बताया। उन्होंने कहा कि इस टेस्ट न ही कोई वैज्ञानिक और कानूनी पहलू नहीं है। हाईकोर्ट ये फैसला पांच साल की रेप पीड़ित की सुनवाई के दौरान सुनाया। इसके अलावा कोर्ट ने वकीलों को सख्त आदेश दिया कि वे पीड़ित से ऐसा कुछ भी नहीं पूछ सकते, जो उसकी गरिमा के एकदम खिलाफ हो। इस पूरी घटना से कई सवाल खड़े होते हैं। क्या ये भारत में कानूनी तौर पर टू फिंगर टेस्ट बंद होगा। अगर पड़ोसी देश की अदालतें इस पर एक्शन ले सकती हैं तो भारत जैसे मुल्क में यह क्यों संभव नहीं है।
अभी क्या है भारत में स्थिति?
- दिसंबर 2017 में हेल्थ मिनिस्ट्री ने रेप विक्टिम के साथ व्यवहार को लेकर गाइडलाइन जारी की थीं।
- इसमें सबसे पहले टू फिंगर टेस्ट पर रोक लगाई थी और विक्टिम के लिए अलग से स्पेशल रूम बनाने को कहा था।
- भारत में टू फिंगर टेस्ट को लेकर कई शिकायतें आती थीं। जिसमें रेप विक्टिम के साथ खराब व्यवहार किया गया था।
- ये बहुत ही शर्मनाक और घिनौना तरीका माना जाता है, जो पीड़ित को फिजिकली और मेंटली कमजोर कर देती है।
- हालांकि मिनिस्ट्री ने अपनी तरफ से रोक लगाई है। इस पर रोक लगाने के लिए संसद में कानून बनना चाहिए।
सुप्रीम कोर्ट ने दी इससे बंद करने की सलाह
- मई 2013 में सुप्रीम कोर्ट ने इस टेस्ट पर आपत्ति जताई और कहा कि ये पूर्ण रूप से वैज्ञानिक परीक्षण नहीं है।
- इसीलिए इस पर बैन लगा देना चाहिए। बेहतर होगा किसी और टेस्ट की इजाजत दी जाए।
- जस्टिस जेएस वर्मा समिति ने जनवरी 2013 को अपनी रिपोर्ट में कहा था, "सेक्स क्राइम कानूनी विषय है, न कि मेडिकल डायग्नोसिस का। महिला की वजाइना के लचीलेपन का बलात्कार से कोई लेना-देना नहीं है।" इसमें टू फिंगर टेस्ट न करने की सलाह दी गई है।
क्या है टू फिंगर टेस्ट
- इस टेस्ट को अंग्रेजी में पर वैगिनल इग्जैमिनेशन कहते हैं। इस तरीके से वर्जिनिटी टेस्ट किया जाता है।
- ये पता करने के लिए कि महिला के साथ रेप हुआ है या नहीं।
- इसमें महिला की योनि का टेस्ट इस धारणा के साथ किया जाता है कि रेप के परिणामस्वरूप इसमें मौजूद हाइमन यानी योनिच्छद फट जाता है।
- इसमें डॉक्टर उंगलियों की नंबर के आधार पर बताते हैं कि महिला के साथ यौन संबंध बने हैं या नहीं।
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