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एनपीए से निपटने के लिए 85 बैंकों और वित्तीय संस्थानों में समझौता, 50 करोड़ से ज्यादा के लोन दायरे में आएंगे

लीड बैंक पर रिजॉल्यूशन प्लान बनाने और अमल की जिम्मेदारियां होंगी

Dainik Bhaskar

Jul 24, 2018, 02:45 PM IST
समझौते के तहत अगर रिजॉल्यूशन प समझौते के तहत अगर रिजॉल्यूशन प

- रिजॉल्यूशन प्लान लागू करने के लिए कंसोर्टियम के दो-तिहाई बैंकों की मंजूरी जरूरी होगी
- 66% बैंकों की सहमति चाहिए, बाकी सहमत न हुए तो भी बात माननी पड़ेगी

नई दिल्ली. फंसे हुए कर्ज यानी एनपीए को जल्दी निपटाने के लिए देश के 85 बैंकों और वित्तीय संस्थानों ने सोमवार को इंटर क्रेडिटर एग्रीमेंट किया। एग्रीमेंट करने वालों में इंडिया पोस्ट पेमेंट बैंक समेत 22 सरकारी, 19 निजी और 32 विदेशी बैंक और एलआईसी जैसे 12 बड़े वित्तीय संस्थान शामिल हैं। एग्रीमेंट के दायरे में बैंक समूह यानी कंसोर्टियम द्वारा दिए गए 50 करोड़ रुपए से ज्यादा के कर्ज आएंगे। लीड बैंक पर रिजॉल्यूशन प्लान बनाने और अमल की जिम्मेदारियां होंगी। अमल के लिए कंसोर्टियम के दो-तिहाई बैंकों की मंजूरी जरूरी होगी। एक अनुमान के मुताबिक आधे से ज्यादा मामलों में एसबीआई ही लीड बैंक होगा। वित्त मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि बैंकिंग इंडस्ट्री की समस्याएं दूर करने की दिशा में यह बहुत बड़ा कदम है।
पीएनबी के प्रमुख सुनील मेहता की अध्यक्षता वाली कमेटी ने 'सशक्त' योजना के तहत इस एग्रीमेंट की सिफारिश की थी। इंटर क्रेडिटर एग्रीमेंट इस योजना का पहला चरण है। इसे बैंकों और वित्तीय संस्थानों के बोर्ड ने पहले ही मंजूरी दे दी है। आईसीआईसीआई समेत कुछ बैंक और वित्तीय संस्थान बोर्ड की मंजूरी के बाद समझौते में शामिल होंगे। मेहता ने कहा कि बैंकों के बीच एक राय ना होना बड़ी समस्या थी। एग्रीमेंट से उसका काफी हद तक समाधान हो जाएगा। मेहता ने कहा कि यह एग्रीमेंट रिजर्व बैंक के दिशानिर्देशों के मुताबिक ही है। रिजर्व बैंक ने फंसे कर्ज पर फरवरी में नए दिशानिर्देश जारी किए थे। इसके मुताबिक बैंकों को डिफॉल्ट के 180 दिन के भीतर रिजॉल्यूशन प्लान लाना पड़ेगा। प्लान पर 90% बैंकों की सहमति जरूरी थी।
समझौते के मुताबिक रिजॉल्यूशन प्लान बनाने और उस पर अमल की जिम्मेदारी लीड बैंक पर होगी। वह इसके लिए दूसरे बैंकों से फीस ले सकता है। फीस कंसोर्टियम में शामिल बैंक मिलकर तय करेंगे। बैंक कर्ज के अनुपात में ही फीस देंगे। पूरी प्रक्रिया में किसी बैंक को नुकसान होता है तो उसके लिए लीड बैंक के कर्मचारी, डायरेक्टर या एजेंट जिम्मेदार नहीं होंगे। उनकी जिम्मेदारी विलफुल डिफॉल्ट और धोखाधड़ी के मामलों में ही होगी। प्लान पर अमल के समय दूसरे बैंक कर्ज लेने वाले के खिलाफ कोई सिविल मुकदमा नहीं करेंगे, हालांकि आपराधिक मुकदमे की छूट होगी।

प्लान से असहमत बैंक बेच सकते हैं अपना हिस्सा : कंसोर्टियम में शामिल कोई बैंक रिजॉल्यूशन प्लान से असहमत है तो लीड बैंक लिक्विडेशन या रिजॉल्यूशन वैल्यू के 85% के बराबर पैसे देकर उसका हिस्सा खरीद सकता है। यह उसके लिए बाध्यकारी नहीं होगा। असहमत बैंक कंसोर्टियम से बाहर दूसरे को भी अपना हिस्सा बेच सकता है। लेकिन यह बिक्री लिक्विडेशन या रिजॉल्यूशन वैल्यू के 125% मूल्य पर होगी।

बैंक कर्ज की अवधि और ब्याज में बदलाव कर सकेंगे : रिजॉल्यूशन प्लान काफी हद तक दिवालिया प्रक्रिया की तरह होगा। बड़ा फर्क यह होगा कि दिवालिया प्रक्रिया में जाने के बाद कंपनी का कामकाज प्रमोटर के हाथ में नहीं रहता, इसमें रहेगा। कर्ज लेने वाले के सभी एसेट या उसके कुछ हिस्से की बिक्री या ट्रांसफर किया जा सकता है। रिस्ट्रक्चरिंग की तरह बैंक कर्ज की अवधि और ब्याज दर में भी बदलाव कर सकते हैं।

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