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गुजरात के बड़ौदा शहर के लोगों ने बाढ़ का पानी कम होने के बाद भी चैन की सांस नहीं ली है क्योंकि अब शहर में दिखाई पड़ रहे हैं मगरमच्छ.
बड़ौदा में बीते रविवार की रात को भी पंद्रह फुट बडा मगरमच्छ गुजरात स्टेट प्रिवेन्शन ऑफ़ क्रुएलिटी टू एनीमल्स (जीएसपीसीए)संस्था ने पकडा है.
इस प्रकार की कम से कम 12 घटनाएं पिछले तीन दिनों में हुई है. इस साल मगरमच्छ के इंसानों पर हमले की 8 घटनाएँ हुई हैं और कम से कम एक व्यक्ति की इससे मौत भी हुई है.
जीएसपीसीए के राज भावसार ने बीबीसी को बताया कि, ‘‘शहर के बीच में से जाती हुई नदी विश्वामित्री में पानी ना ही के बराबर होता है. मगरमच्छ या जिसे मॉस क्रोकोडाईल कहा जाता है वह कीचड़ में ज़्यादा पाए जाते हैं. बाढ़ का पानी भरता है तब ये बहाव के साथ खिंचे चले आते हैं. जलभराव कम होने के साथ ही मगरमच्छ शहर में दिखाई देने लगते हैं.’’
बारिश के मौसम में बड़ौदा में मगरमच्छ दिखना बहुत ही सामान्य हो चुका है. दिसम्बर तक ऐसी घटनाएं होती रहेती हैं, क्योंकि सर्दियों में मगरमच्छों का हाईबरनेशन का वक्त शुरू होता है.
पानी के बहाव में रिहाईशी इलाक़ों में आ जाने वाले इन मगरमच्छों को जीएसपीसीए की बचाव टीम पकड़ कर वन विभाग को सौंप देती है, जो इन्हें नर्मदा डैम या आजवा तालाब के पानी में छोड देते हैं.
राज भावसार के मुताबिक पिछले साल बड़ौदा में की गई गिनती में 210 मगरमच्छ पाए गए थे, यह संख्या इस वर्ष और ज़्यादा होने की संभावना है.
इस साल मगरमच्छों के इन्सानों पर हमले की आठ घटनाएं हो चुकी हैं.
बड़ौदा में विश्वामित्री नदी के आसपास जहां झुग्गियां हैं वहां मगरमच्छों से सावधान रहने के बोर्ड्स भी लगाए गए हैं.
इस बाढ़ के दौरान एक बार अजगर जैसा बडा सांप भी जीएसपीसीए की बचाव टीम ने पकड़ा है.
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