--Advertisement--

महाभारत 2019: बिहार एनडीए में सीटों के बंटवारे पर खींचतान, विशेष राज्य का दर्जा बड़ा मुद्दा

सीटों का 2009 का फॉर्मूला चाहती है जदयू, पर इसमें कई पेंच, क्योंकि अब लोजपा, रालोसपा भी साथ।

Danik Bhaskar | Jun 08, 2018, 08:27 AM IST
बिहार में एनडीए के घटक दलों के बीच अागामी चुनावों में सीटों के बंटवारे को लेकर रस्साकशी जारी है।   - फाइल बिहार में एनडीए के घटक दलों के बीच अागामी चुनावों में सीटों के बंटवारे को लेकर रस्साकशी जारी है। - फाइल

  • रालोसपा प्रमुख उपेन्द्र कुशवाहा चाहते हैं कि सीटें पहले ही फाइनल हो जाएं
  • जदयू ने सीट बंटवारे का 25:15 वाला पुराना फॉर्मूला सामने रखा है

पटना. 26:14, 25:15, 30:7:3 - ये महज संख्याएं नहीं है। बल्कि ये आंकड़े बिहार में 2004 में जदयू-भाजपा, 2009 में जदयू-भाजपा और 2014 में भाजपा-लोजपा-रालोसपा के बीच लोकसभा चुनावों में सीटों के बंटवारे का फॉर्मूला रहा है। एनडीए के इन घटक दलों के बीच 2019 में फॉर्मूला क्या होगा? फिलहाल बिहार में इसी सवाल पर रस्साकशी जारी है। वहीं, बिहार को विशेष राज्य का दर्जा राज्य की राजनीति में फिर गर्मा रहा है।

2014 का फॉर्मूला चला, तो जदयू के लिए 9 सीटें ही मिलेंगी

- सीटों के बंटवारे पर संघर्ष की स्थिति जदयू की एनडीए में वापसी से बनी है। जदयू सीट बंटवारे का 2009 वाला हिसाब-किताब चाहता है, लेकिन इस मांग पर उलझन इसलिए है कि 2014 लोकसभा की चुनावी लड़ाई त्रिकोणीय थी। एनडीए बनाम यूपीए बनाम जदयू। तब जदयू, भाजपा से नाता तोड़ चुका था। इसके पहले 2009 में भाजपा-जदयू मैदान में साथ उतरे थे और 32 सीटें जीती थीं।

- जदयू का साथ छूटने के बाद भाजपा ने 2014 में रामविलास पासवान की लोजपा और उपेन्द्र कुशवाहा की रालोसपा से नाता जोड़ा था। तीनों दलों ने मिलकर 31 सीटें जीतीं। इस बार अगर 2014 का फॉर्मूला चला, तो जदयू के लिए 9 सीटें ही बचेंगी।

- हालांकि, जदयू प्रवक्ता अजय आलोक ने सीट बंटवारे का 25:15 वाला पुराना फॉर्मूला सामने रखा है। इधर, लोजपा प्रमुख रामविलास पासवान के अनुसार सीट बंटवारा कोई मुद्दा ही नहीं है।

कांग्रेस गठबंधन भी फिलहाल सीटों के बंटवारे पर चुप

- 27:12:1 (राजद-कांग्रेस-राकांपा) के फॉर्मूले के साथ 2014 में उतरा यूपीए सीट शेयरिंग पर मौन है। गठबंधन के नए साथी जीतनराम मांझी की पार्टी ‘हम’ को एडजस्ट करने में यहां भी काट-छांट तो करनी ही होगी।

विशेष राज्य के दर्जे पर पार्टियों में खींचतान, केंद्र भी उलझन में

- बिहार को विशेष राज्य का दर्जा देने के मामले पर नीतीश कुमार स्पष्ट कह चुके हैं कि उन्होंने इस मुद्दे को एक पल के लिए भी नहीं छोड़ा है। उनकी ओर से 15वें वित्त आयोग को ताजा चिट्‌ठी 29 मई को लिखी गई है। केंद्र के सामने परेशानी यह है कि बिहार की बात मानी गई तो भानुमति का पिटारा खुल जाएगा। राजस्थान, ओडिशा और झारखंड तो लाइन में लगे ही हैं। आरजेडी के तेजस्वी यादव का कहना कि केंद्र और राज्य में एक ही सरकार है, फिर किससे विशेष राज्य का दर्जा मांगा जा रहा है?

- राजद उपाध्यक्ष शिवानंद तिवारी कहते हैं कि नीतीश कुमार ने एनडीए में रहते हुए प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को कहा था कि विशेष राज्य का दर्जा दें तो हम यूपीए का समर्थन कर सकते हैं, ऐसी ही शर्त उन्होंने एनडीए में वापसी के दौरान क्यों नहीं रखी?

- एनसीपी सांसद तारिक अनवर कहते हैं कि मुख्यमंत्री को केंद्र पर दबाव बनाना चाहिए। नहीं तो चंद्राबाबू नायडू की तरह भाजपा से नाता तोड़ सकते हैं।

लोगों ने कहा- जब नियम ही नहीं है, तो विशेष राज्य का दर्जा कहां से मिले

- विशेष राज्य की मांग के मुद्दे को यहां आम जनता भी समझती है। कैमूर के किसान परमेश्वर दयाल सिंह कहते हैं कि अफसोस है इस मांग पर कोई गंभीर नहीं दिखता।

- डॉ. संतोष कुमार सिंह के मुताबिक विशेष राज्य के दर्जे से मानव विकास सूचकांक तेजी से सुधरेगा।

- पूर्णिया चैंबर ऑफ कॉमर्स के अध्यक्ष जगतलाल वैश्यंत्री ने कहा कि जनता को गुमराह किया जा रहा है।

- मोदनगंज की सुधा कुमारी की राय में विशेष राज्य का मामला पार्टियों के लिए बहाना है। जब नियम ही नहीं है, तो दर्जा कहां से मिलेगा?

चेहरे पर चर्चा

- जदयू चाहती है नीतीश चुनावी चेहरा हों। पर लोजपा के चिराग पासवान और केंद्रीय मंत्री रामकृपाल यादव इससे इत्तेफाक नहीं रखते। हालांकि, भाजपा नेता सुशील कुमार मोदी ने कहा है कि प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री दोनों ही चेहरे होंगे।

- उप चुनावों में राजद को सफलता मिली है। वह भी तब, जब पार्टी प्रमुख लालू प्रसाद प्रचार से दूर रहे। स्थितियां बता रही हैं कि इस बार लड़ाई त्रिकोणीय नहीं, बल्कि दो बड़े गठबंधनों के बीच होगी।

राजद ने कहा- बिहार के साथ कभी इंसाफ नहीं हुआ

- लोजपा सुप्रीमो रामविलास पासवान के मुताबिक, हम बिहार को विशेष राज्य की मांग के पक्ष में हैं। कोई इससे इनकार नहीं कर सकता कि बिहार पिछड़ा राज्य है। राजद उपाध्यक्ष शिवानंद तिवारी का कहना है कि बिहार के साथ कभी इंसाफ नहीं हुआ। बिहार हमेशा आंतरिक उपनिवेश जैसा रहा है। विशेष राज्य की मांग पर हवाबाजी हो रही है।

- कांग्रेस प्रभारी शक्ति सिंह गोहिल ने कहा कि हम बिहार को विशेष राज्य का दर्जा दिलवाने के समर्थन में हैं। इसके लिए कांग्रेस पार्टी अभियान चलाएगी।

40 लोकसभा सीटों की स्थिति

बीजेपी 31
जेडीयू 02
आरजेडी 04
कांग्रेस 02
एनसीपी 01