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राशि अनुसार कैसा रुद्राक्ष आपकी किस्मत चमका सकता है?

Dainik Bhaskar

May 16, 2018, 04:45 PM IST

मेष से मीन तक, सभी के लिए अलग-अलग रुद्राक्ष होता है भाग्यशाली, जानिए रुद्राक्ष धारण करने की विधि

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रिलिजन डेस्क। शिव पुराण के अनुसार शिवजी के अांसुओं से रुद्राक्ष की उत्पत्ति हुई है। रुद्राक्ष धारण करने से महादेव की कृपा मिलती है और परेशानियां दूर होती हैं। जो व्यक्ति इसे धारण करता है, उस नकारात्मकता हावी नहीं हो पाती है। उज्जैन के ज्योतिषाचार्य पं. दयानंद शास्त्री के अनुसार सभी 12 राशियों के लिए अलग-अलग रुद्राक्ष भाग्यशाली होते हैं।

यहां जानिए मेष से मीन राशि तक के लिए शुभ रुद्राक्ष...

1. मेष राशि का स्वामी ग्रह मंगल है। इस राशि के लोगों को तीन मुखी रुद्राक्ष धारण करना चाहिए।

2. वृषभ राशि का स्वामी ग्रह शुक्र है। इस राशि के लोगों के लिए छ: मुखी रुद्राक्ष ज्यादा फायदेमंद होता है।

3. मिथुन राशि का स्वामी बुध ग्रह है। इनके लिए चार मुखी रुद्राक्ष लाभदायक होता है।

4. कर्क राशि के स्वामी चंद्रदेव हैं। इस राशि के लिए दो मुखी रुद्राक्ष सबसे अच्छा माना जाता है।

5. सिंह राशि का स्वामी ग्रह सूर्य है। इस राशि के लिए एक या बारह मुखी रुद्राक्ष श्रेष्ठ होता है।

6. कन्या बुध ग्रह की राशि है। इस राशि के लिए चार मुखी रुद्राक्ष लाभदायक होता है।

7. तुला राशि का स्वामी शुक्र ग्रह है। तुला राशि के लिए छ: मुखी रुद्राक्ष और तेरह मुखी रुद्राक्ष लाभदायक होता है।

8. वृश्चिक राशि का स्वामी मंगल है। इनके लिए तीन मुखी रुद्राक्ष सबसे अच्छा माना जाता है।

9. धनु राशि का स्वामी ग्रह गुरु यानी बृहस्पति है। इस राशि के लिए पांच मुखी रुद्राक्ष शुभ होता है।

10. मकर राशि का स्वामी ग्रह शनि है। इन लोगों को सात या चौदह मुखी रुद्राक्ष धारण करना चाहिए।

11. कुंभ राशि का स्वामी ग्रह शनि है। कुंभ राशि के लिए सात या चौदह मुखी रुद्राक्ष सबसे अच्छा होता है।

12. मीन गुरु ग्रह की राशि है। इस राशि के लोगों के लिए पांच मुखी रुद्राक्ष श्रेष्ठ होता है।


कैसे धारण करें रुद्राक्ष

अगर आप रुद्राक्ष धारण करना चाहते हैं तो किसी शुभ मुहूर्त या सोमवार को अपनी राशि के लिए शुभ रुद्राक्ष लेकर आएं। इसके बाद किसी शिव मंदिर में रुद्राक्ष को कच्चे दूध, पंचगव्य, पंचामृत या गंगाजल से पवित्र करें। अष्टगंध, केसर, चंदन, धूप-दीप, फूल आदि से पूजा करें। शिव मंत्र ऊँ नम: शिवाय का जाप 108 बार करें। लाल धागे में, सोने या चांदी के तार में पिरो कर धारण करना चाहिए।

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