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सूज गया था शरीर, विकसित नहीं हो पाई थी कोख, फिर भी दिया जुड़वां बच्चों को जन्म: मशहूर सिंगर बियोंसे के लाइफटाइम अनुभव

टॉक्सेमिया प्रेग्नेंसी से जुड़ी एक गंभीर स्थिति है जिसे प्री-एक्लेमप्शिया के नाम से भी जाना जाता है।

Danik Bhaskar | Aug 07, 2018, 08:17 PM IST

हेल्थ डेस्क. फैशन मैग्जीन वोग को दिए एक इंटरव्यू में जानी मानी अमेरिकी सिंगर बियॉन्से ने बताया कि पिछले साल प्रेग्नेंसी के दौरान वह टॉक्सेमिया नाम की बीमारी से जूझ रही थीं। बियॉन्से के अनुसार डिलीवरी के पहले उनके शरीर में काफी सूजन आ गई थी। डॉक्टर ने एक माह के बेड रेस्ट की बात कही थी और इस दौरान मैं और मेरे बच्चे दोनों खतरे में थे। बियॉन्से को वोग मैग्जीन के सितंबर के अंक में कवर पेज पर फीचर किया गया है। स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. राखी आर्य से जानते हैं क्या है टॉक्सेमिया और क्या है इसका इलाज....

क्या है टॉक्सेमिया
टॉक्सेमिया प्रेग्नेंसी से जुड़ी एक गंभीर स्थिति है जिसे प्री-एक्लेमप्शिया के नाम से भी जाना जाता है। यह स्थिति तब बनती है जब प्लेसेंटा ठीक से डेवलप नहीं होता है। प्लसेंटा एक ट्यूबनुमा आकार की संरचना होती है जिससे गर्भ में पल रहे भ्रूण को माता से पोषण मिलता है। ऐसी स्थिति में ब्लड प्रेशर बढ़ जाता और शरीर में सूजन अधिक होने लगती है। यह सूजन चेहरे, हाथों और पैरों में अधिक होती है। इसके कारण वजन तेजी से बढ़ता है। ऐसा प्रेग्नेंसी की तीसरी तिमाही के दौरान होता है। इस दौरान भ्रूण तक ऑक्सीजन और पोषक तत्वों की सप्लाई ठीक से न होने के कारण उसके विकास पर असर पड़ सकता है।

कब हो जाएं अलर्ट
शरीर में सूजन और ब्लड प्रेशर बढ़ने के अलावा भी कुछ लक्षणों के आधार पर इसे पहचाना जा सकता है। तेज सिरदर्द होना, वजन काफी बढ़ जाना, मिचली आना या पेटदर्द होना जैसे लक्षण दिखते हैं तो अलर्ट होने की जरूरत है। ऐसी स्थिति में स्त्री रोग विशेषज्ञ से संपर्क करें।

ब्लड टेस्ट से होती है पुष्टि
प्रेग्नेंसी के दौरान 140/90 मिमी एचजी से अधिक बीपी होना आसामान्य है लेकिन एक ही बार हाई ब्लड प्रेशर आने का मतलब यह नहीं कि आपको प्री-एक्लेमप्शिया ही है। इसकी पुष्टि के लिए ब्लड टेस्ट, यूरिन एनालिसिस और अल्ट्रासाउंट किया जाता है।

इलाज में दवाएं और रेस्ट की दी जाती है सलाह
विशेषज्ञ लक्षण और जांच रिपोर्ट के आधार पर ट्रीटमेंट तय करते हैं। ऐसी स्थिति में ब्लड प्रेशर और पेट की ऐंठन कम करने की दवाएं देते हैं। इसके अलावा रेस्ट करने की सलाह भी जरूरी तौर पर दी जाती है। स्थिति गंभीर होने पर अस्पताल में भर्ती भी होना पड़ सकता है।

पहले क्या बरतें सावधानी
- अगर पहले क्रॉनिक हायपरटेंशन से परेशान रही हैं तो प्री-एक्लेमप्शिया का जोखिम बढ़ सकता है। इसलिए बेहतर होगा कि ये जानकारी डॉक्टर को जरूर दें।
- पहली प्रेग्नेंसी के दौरान ऐसा होने का खतरा अधिक होता है। इसलिए डॉक्टर की सलाह को पूरी सावधानी से फॉलो करें।
- ऐसी महिलाएं जो मोटापे से परेशान हैं उनमें ऐसा हो सकता है।
- प्री-एक्लेमप्शिया की स्थिति ऐसी महिलाओं में आमतौर पर देखी जाती है जो जुड़वा या तीन बच्चों को जन्म देती हैं।
- अगर महिला माइग्रेन, डायबिटीज, किडनी रोग से परेशान है तो इनमें प्री-एक्लेमप्शिया की आशंका अधिक रहती है।