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137 साल पहले 45 लाख रुपए में बना गोल्डन ब्रिज आज भी अडिग

3 वर्ष पहले
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भरुच। उत्तर प्रदेश के वाराणसी में गिरे पुल के बाद अब चारों तरफ जर्जर पुलों की ही चर्चा है। ऐसे में नर्मदा नदी पर 137 साल पहले यानी 1881 में उस वक्त के 45 लाख रुपए की लागत से बना यह पुल आज भी पूरी शिद्दत के साथ अडिग है। लोग इस पर आज भी गर्व करते हैं। 1877 में बनना शुरू हुआ था…

 

इस पुल के बारे में कहा जाता है कि इसके बनने की शुरुआत 7 दिसम्बर 1877 को हुई थी। उस समय इस पर 45.65 लाख रुपए की लागत आई थी। 16 मइ्र 1881 को इसे आम जनता के लिए खोल दिया गया था। सवा किलोमीटर लम्बे इस गोल्डन ब्रिज को बनाने के लिए केवल रिवेट का उपयोग किया गया है। इसके बाद नर्मदा नदी पर रेल्वे के लिए सिल्वर ब्रिज, वाहनों के लिए पुराना सरदार ब्रिज, फिर नया सरदार ब्रिज, केबल ब्रिज का निर्माण किया गया है।

 

मध्य-दक्षिण गुजरात की लाइफ लाइन

भूतकाल में भरुच शहर ट्राफिक जाम के लिए पहचाना जाता था। पर समय के साथ नए पुलों के निर्माण के बाद भरुच के माथे से यह कलंक मिट गया है। गोल्डन ब्रिज पर 2012 में रग रोगन के लिए 2.50 करोड़ रुपए खर्च किए गए थे। 137 साल से यह भरुच-अंकलेश्वर के अलावा मध्य और दक्षिण गुजरात के बीच लाइफ लाइन बना हुआ है। कई बाढ़ और भूकंप और प्राकृतिक आपदाओं के बाद भी इस पुल पर आज तक कोई खरोंच भी नहीं आई।

 

 
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