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डाउनलोड करेंजयपुर. एसएमएस अस्पताल सहित सभी अस्पतालों में ब्लड की कमी है। ब्लड डोने के बाद भी 24 से 48 घंटे तक खून नहीं मिल पा रहा। ...तब जबकि जयपुर रक्तदान की मॉडल सिटी है। 16 जनवरी 2015 को तेरापंथ युवक परिषद की ओर से सबसे अधिक रक्त एकत्रित किया गया। देशभर इस दिन 1 लाख 64 हजार यूनिट रक्त एकत्र हुआ था। जयपुर ने 3,858 यूनिट खून दिया था। ...ताजा हालात में रक्तदान के ऐसे ही कई रिकॉर्ड्स बनाने होंगे।
एसएमएस के ब्लड बैंक को चाहिए खून
लोगों में रुचि की वजह से सर्दियों में अस्पताल के ब्लड बैंक के माध्यम हर दिन चार से अधिक रक्तदान शिविर लगाए जाते हैं, लेकिन गर्मियों में लोगों का रुझान नहीं होने की वजह से बैंक ने भी शिविरों में कमी करके दो कर दिए हैं, जो शिविर लग रहे हैं, उन्हें में भी पर्याप्त रक्तदान नहीं हो रहा है। तीन महीने में करीब 25 हजार यूनिट ब्लड की खपत हुई है, लेकिन इसके बदल मात्र 10 हजार यूनिट ब्लड शिविरों के माध्यम से आया है।
20 ब्लड बैंक हैं शहर में सरकारी व निजी।
700 यूनिट ब्लड की हर दिन जरूरत।
500 यूनिट रक्त एकत्र हो रहा रोज।
1300 लोगों को हर दिन चाहिए ब्लड।
60 %ब्लड स्वैच्छिक रक्तदान से।
30 % ब्लड रिप्लेसमेंट के बदले दे रहे हैं।
20 %लोगों को समय पर नहीं मिल रहा ब्लड।
महादान का वक्त- 300 यूनिट खून रोज चाहिए
रक्तदान को महादान कहा जाता है। खून देकर हम जिन्दगी बचाने का पुण्य कमा सकते हैं। यह महादान का सबसे सही वक्त है। एक महीने से एसएमएस अस्पताल में ब्लड नहीं होने से जिन्दगी और मौत के बीच जूझ रहे मरीजों के सामने ब्लड का संकट हो गया है। अस्पताल में हर दिन करीब 300 यूनिट ब्लड मरीजों को ब्लड बैंक से सप्लाई किया जाता है, लेकिन इसके बदल मात्र 100 यूनिट ही ब्लड आ रहा है। बाकी 200 मरीजों को महंगे दाम में इधर-उधर जुगाड़ करना पड़ रहा है या फिर रिप्लेस के जरिए ब्लड मिल रहा है। इन प्रयासों के बाद भी ब्लड नहीं मिलने वाले मरीजों को जिन्दगी से हाथ धोना पड़ रहा है।
हर मौका पुण्य देगा- डोनर बनकर जिंदगी बचाइए
डॉक्टरों का कहना है कि लोग जन्म-शादी की सालगिरह पर अस्पताल में ब्लड डोनेट करके पुण्य कमा सकते हैं। वर्ष में हर व्यक्ति एक बार ब्लड डोनेट करे तो ब्लड की कमी नहीं हो सकती। मरीज के परिजनों को बिना परेशान हुए ब्लड उपलब्ध हो सकता है। लोगों के ब्लड डोनेट करने के प्रति जागरूक किया जा सकता है। कॉलेजों-विश्वविद्यालयों में ब्लड के लिए शिविर लगाए जा सकते हैं। यहां पर स्टूडेंट्स को संस्था के माध्य से जागृत करके ब्लड डोनेट की मात्रा में वृद्धि की जा सकती है।
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