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मुख्यमंत्री निशुल्क दवा केंद्रों पर फार्मासिस्ट की जगह बैठते हैं 8वीं और 10वीं पास हेल्पर-ऑपरेटर, वही देते हैं मरीजों को दवाएं

3 वर्ष पहले
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उदयपुर. संभाग के सबसे बड़े एमबी अस्पताल में मुख्यमंत्री निशुल्क दवा योजना के काउंटर्स पर 8वीं, 10वीं पास हेल्पर, कम्प्यूटर ऑपरेटर और नॉनमेडिकोज व्यक्ति मरीजों को दवाएं दे रहे हैं। खास बात यह है कि काउंटर्स पर दवाई देने के लिए फार्मासिस्ट तो लगे हैं लेकिन वे हेल्परों को यहां लगाकर खुद ड्यूटी से नदारद ही रहते हैं। भास्कर ने पड़ताल की तो कई मरीजों ने बताया कि दवाई देने वाले हेल्परों-ऑपरेटरों से जब  दवाई के बारे में कुछ जानकारी पूछी जाती है तो वे कुछ भी बोलने से मना कर देते हैं। उन्हें दवाओं के नुकसान-फायदे तक नहीं मालूम है।  

 

फार्मासिस्टों का बैठना जरूरी क्योंकि यहां 700 किस्म की दवाइयां हैं

 

मरीज, तीमारदार या अस्पताल प्रबंधन इन हेल्परों और ऑपरेटरों को दवाई देते बाहर से देख न ले इसके लिए फार्मासिस्टों ने दवा केंद्रों को पर्दों/कार्डबोर्ड आदि से छुपा दिया है। बड़ी बात यह है कि मरीजों की जान के साथ यह सरेआम लापरवाही आरएनटी मेडिकल कॉलेज के उस परिसर में हो रही है जहां प्रिंसिपल डॉ. डीपी सिंह, एडिशनल प्रिंसिपल डॉ. एके वर्मा, एडिशन प्रिंसिपल डॉ. ललित रैगर, एमबी अस्पताल अधीक्षक डॉ. विनय जोशी जैसे आला अधिकारी दिनभर ड्यूटी पर तैनात रहते हैं। हैरानी की बात यह भी है कि ये आला अधिकारी यहां से दिन में कई बार गुजरते हैं लेकिन किसी का ध्यान नहीं जाता। मरीजों की शिकायतों पर दैनिक भास्कर ने शुक्रवार को दोपहर 12 से 1 बजे तक दवा केंद्र में पर्दे के पीछे का रियलिटी चेक किया तो चार दवा केंद्रों में से एक में भी फार्मासिस्ट नहीं था और मरीजों को ऑपरेटर व हेल्पर दवाई दे रहे थे। वहीं ट्रोमा के केंद्र पर ताला जाड़ा था।

 

पांच हजार मरीज रोज आते हैं, गांवों के होते हैं ज्यादा

 

एमबी-बाल चिकित्सालय, जनाना में रोज 5 हजार से ज्यादा मरीज आते हैं। इनमें ग्रामीण क्षेत्रों के मरीज ज्यादा होते हैं जो कम पढ़े-लिखे होते हैं। ऐसे में फार्मासिस्ट की ड्यूटी बनती है कि वे मरीजों को दवाएं देते समय टेबलेट्स पर लिखें और समझाएं कि कौन-सी दवा कब और कितनी लेनी हैं। कुछ खाकर या फिर भूखे पेट खानी है। इसके अलावा मरीज दवाई को लेकर कई तरह के सवाल भी पूछते हैं जिसे सही तरीके से बताया जाना जरूरी है।

 

गंभीर हो सकता है परिणाम

 

आरएनटी के डॉक्टरों ने बताया अगर हेल्पर, कम्प्यूटर ऑपरेटर या अन्य कोई नॉनमेडिकोज गलती से मरीज को Diamol की जगह Dionil टेबलेट दे दे तो रोगी की जान जा सकती है। एक्टिवेट चारकोल की Diamol टेबलेट एक दिन में ही 16 दी जाती हैं ताकि वे सोनोग्राफी, एक्स-रे के लिए तैयार हो सकें। अगर Diamol की जगह डायबिटीज की Dionil टेबलेट दे दें और मरीज ने एक दिन में ही 16 खा लीं तो रोगी का शुगर निम्न स्तर पर पहुंच जाएगा। यह तो दो टेबलेट का उदाहरण है, निशुल्क दवा योजना में तो 700 से ज्यादा दवाएं मिलती हैं। हैवी डोज से उल्टी, दस्त, पेट दर्द, जी घबराना, शुगर, बीपी का गिर जाना, चक्करों से गिर जाना, बेहोश होने जैसी भी परेशानी हो जाती है।