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हमें स्वास्थ्य पर ध्यान देने वाला सिस्टम चाहिए

ऐसी हेल्थकेयर हो, जो रोगों पर प्रतिक्रिया देने की बजाय लोगों के स्वास्थ्य पर फोकस रखे।

डॉ. नरेश त्रेहान | Last Modified - May 30, 2018, 11:40 PM IST

हमें स्वास्थ्य पर ध्यान देने वाला सिस्टम चाहिए

‘द फ्यूचर इज़ नाउ’ एक हिप-हॉप म्यूज़िक एलबम था। मैं यहां इसका इस्तेमाल यह रेखांकित करने के लिए कर रहा हूं कि हर ‌भविष्य वर्तमान में ही जन्म लेता है; हम ही इसे यहां और अभी रूप देते हैं, परिभाषित करते हैं। इसके लिए बड़ी जिम्मेदारी लेने की जरूरत है, हमें सहानुभूतिपूर्ण होने के साथ विज़नरी और इनोवेटिव होने की जरूरत है। और हेल्थकेयर में तो हमारे रोगियों के लिए प्रतिबद्धता का जुनून होना चाहिए। मैं देख सकता हूं कि भविष्य में हेल्थकेयर उत्तरोत्तर रोगी केंद्रित होता जाएगी और टेक्नोलॉजी के सहयोग से रोगी से सतत संपर्क उसका खास चरित्र होगा। पिछली सदी के मध्य में परिपक्व होने वाली हेल्थकेयर वास्तव में ‘िसककेयर’ सिस्टम है। हमने इलाज और टेक्नोलॉजी में अविश्वसनीय प्रगति की है लेकिन, जहां तक केयर यानी देखभाल की बात है वह उसी जगह बनी हुई है।


यह मोटेतौर पर अब भी ऐसी जगह है जहां बीमार लोग इलाज के लिए आते हैं। इसे कभी भी लंबे समय चलने वाली (क्रॉनिक) बीमारियों में अत्यधिक वृद्धि को ध्यान में रखकर डिज़ाइन नहीं किया गया, जिन पर अब हेल्थकेयर के खर्च का 80 फीसदी खर्च होता है। नए परिदृश्य में हमें हेल्थकेयर को रोगी के दृष्टिकोण से देखना होगा। यानी पहले तो रोगी को यह समझने में मदद करना कि वे कौन-सी बातें हैं जो उनकी क्रॉनिक स्थिति पर बेहतर प्रभाव डालते हैं ताकि वे बीमारी को काबू में रखने में अधिक सक्रिय भूमिका निभा सकें। यानी सिर्फ रोगी का इलाज करने की बजाय उसके स्वास्थ्य की बेहतरी में योगदान देना होगा। उद्‌देश्य लोगों को स्वस्थ रखने का हो और बजाय इसके कि उनके बीमार होने पर प्रतिक्रिया दी जाए। इसका मतलब सिर्फ यह बताना नहीं है कि उन्हें क्या करना है बल्कि सच्चे अर्थों में उन्हें इसमें शामिल करना, उन्हें स्मार्ट टेक्नोलॉजी उपलब्ध कराना है ताकि वे निकटता से खुद पर निगरानी रख सकें। रोगियों को विशेष ज्ञान रखने वाले विशेषज्ञों की जरूरत होगी लेकिन, रोगी और विशेषज्ञ को एक ही समय में एक जगह होने की जरूरत नहीं होगी।


हालांकि, कनेक्टेड केयर के नेटवर्क के जरिये कई विशेषज्ञ मामले को एकसाथ देख सकेंगे। इस तरह सतत निगरानी से स्वास्थ्य के किसी मुद्‌दे का गंभीर होने के पहले ही पता चल जाएगा। किसी बीमारी का इलाज करने की बजाय लोगों के स्वास्थ्य पर ध्यान देने का विचार एकदम सही है। हम पहले ही अस्पतालों को स्मार्ट होते, रोगी को अधिक साधन संपन्न होता देख रहे हैं। अच्छे माहौल के साथ टेक्नोलॉजी की सक्षमता व अचूकता देखने को मिल रही है। जो हम पहले ही इस्तेमाल में ला रहे हैं जरा उस पर विचार कीजिए: इंटरनेट ऑफ थिंग्स, सेन्सर, थ्री डी प्रिंटिंग, वर्चुअव रियलिटी, रोबोटिक्स, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, मशीन लर्निंग, एंटरप्राइज रिसोर्स प्लानिंग, सप्लाई चेन मैनेजमेंट, बिग डेटा, क्लाउड, रियल टाइम एनालिटिक्स, स्वचालित वाहन, ब्लॉकचेन आदि। अब उन उद्योगों पर विचार कीजिए, जो एक भविष्यदृष्टि वाले हेल्थकेयर सिस्टम को संभव बना सकते हैं : हेल्थकेयर, यूटिलिटीज, इंशोरेंस, फार्मा, ऑटोमोटिव, स्मार्ट होम, मैन्यूफैक्चरिंग। यह आसानी से समझा जा सकता है कि हमने जैसी भविष्य की कल्पना की है, एक सेक्टर को उसके जैसा बनाने के लिए हमें दूसरों को भी उसी रफ्तार व स्तर पर आगे बढ़ाना होगा। संगठन की दृष्टि से हम हेल्थकेयर में ठोस मजबूती देखेंगे।

हमारे देश के सिर्फ हेल्थकेयर के व्यापक पैमाने के कारण हेल्थकेयर इन्फ्रास्ट्रक्चर में निवेश आकर्षित होगा, जो इसका दायरा बढ़ाने और टेक्नोलॉजी लागू करने में बंट जाएगा। बिस्तर उत्तरोत्तर अस्पताल से बाहर होते जाएंगे और अस्पताल रोगों के निदान और इलाज पर फोकस करेंगे। इलाज या सर्जरी के बाद आरोग्य-लाभ घरों में होगा। मुझे उम्मीद है कि इतने बड़े दायरे के लिए माध्यम मुहैया कराने में भारत दुनिया का नेतृत्व करेगा। इससे स्वास्थ्य रक्षा को बेहतर ढंग से आगे बढ़ाने में मदद मिलेगी। इससे रोगी और हेल्थकेयर देने वाली एजेंसी के बीच अंतर और कम होगा।


डेटा और एनालिसिस तक पहुंच शरीर पर धारण करने योग्य डिवाइस को स्वास्थ्य समस्याओं का पूर्वानुमान लगाने में मददगार होंगे। ये डिवाइस रोगी के स्वास्थ्य व आनुुवांशिक इतिहास के आधार पर जीवनशैली में संभावित बदलाव की सलाह भी दे सकेंगे। वे ठीक होने में लगने वाली अवधि का पूर्वानुमान लगा सकेंगे और रोगी के प्रोफाइल के हिसाब से डॉक्टर के बारे में सिफारिश दे सकेंगे। भविष्य में अलगोरिदम्स रोगी का इतिहास मैप करने में मदद करेंगे, जिससे इलाज तीव्र व अधिक असरदार होगा। अप्रत्याशित रोगों और अप्रत्याशित इलाज की दहलीज पर हमारे सामने कुछ गहरे प्रश्न हैं : किसे, कौन-सी स्वास्थ्य रक्षा मिलेगी? कौन-से संसाधन अावंटित किए जा सकते हैं, कैसे और किसे? हेल्थकेयर का स्वीकार्य रूप क्या होगा? इन प्रश्नों के मूल में मेडिकल ज्ञान का समान वितरण है। जब तक हम कल्पनाशील तरीके से रचनात्मक और टिकाऊ समाधान लाकर उन्हें लागू नहीं करते, हम भारत के हेल्थकेयर संकट से निपट नहीं पाएंगे।


आखिर में मैं एक चीज पर आता हूं जो कभी नहीं बदलेगी: डॉक्टर व रोगी का संबंध। प्राचीन भारत में चरक ने डॉक्टरों के लिए चार सिद्धांत तय किए थे: मित्रता, रोगी के प्रति सहानुभूति, अपनी क्षमता के अनुसार मेडिकल के मामलों में रुचि और उपचार होने के बाद रोगी से कोई लगाव नहीं रखना।’ चरक संहिता उन मूल्यों पर जोर देती है, जो इस भद्र पेशे के केंद्र में है: ‘वह जो मानवता के प्रति दयालुता को अपना सर्वोच्च धर्म मानता है और उसी तरह रोगी का इलाज करता है अपने जीवन का उद्‌देश्य प्राप्त करने में सर्वश्रेष्ठ सफलता हासिल करता है और उसे अत्यधिक आनंद मिलता है।’

सुश्रुत संहिता में रोगी के प्रति डॉक्टर का कर्तव्य बताया है: रोगी अपने रिश्तेदारों, अपने बेटों और यहां तक कि पालकों पर भी संदेह कर सकता है पर अपने डॉक्टर पर उसे पूरा भरोसा होता है। वह खुद को डॉक्टर के हाथों में सौंप देता है। इसलिए यह डॉक्टर का कर्तव्य है कि वह रोगी की बेटे की तरह देखभाल करे। भूत व वर्तमान की सारी चिकित्सा प्रणाली का सारांश है डॉक्टर और रोगी के बीच समानुभूति और भरोसा। अब चूंकि हेल्थकेयर का भविष्य आकार ले रहा है तो यह बात और भी ज्यादा लागू होती है।

(ये लेखक के अपने विचार हैं)

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