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भास्कर संपादकीय: अमरनाथ यात्रा का उत्साह और सरकारी चौकसी

यात्रा की हर गाड़ी पर रेड फ्लैग आईडेंटीफिकेशन कार्ड लगाया गया है और उन सभी की एक केंद्रीय स्थल से निगरानी की जा रही है।

Danik Bhaskar | Jun 28, 2018, 12:08 AM IST

आतंकी और प्रकृति की चुनौतियों के बीच 2018 की अमरनाथ यात्रा अब तक के सबसे मजबूत सुरक्षा घेरे में हो रही है। यह एक धार्मिक यात्रा है, जिसमें देश के कोने-कोने से भगवान शिव के भक्त 3,880 मीटर की ऊंचाई पर स्थित मनोरम प्राकृतिक गुफा में उनके दर्शन के लिए बेहद कठिन मार्ग को पार कर आते हैं। कश्मीर में बढ़ते अलगाववाद के मद्‌देनज़र आस्थावान लोगों और सरकार ने इसकी सफलता को भारतीय राष्ट्र की शक्ति और कश्मीर पर उसके दावे के प्रदर्शन की एक कसौटी बना दिया है। इसलिए यह एक राजनीतिक यात्रा भी बन चुकी है, जिसके निरापद रहने या जिसमें विध्न पड़ने पर घाटी से लेकर पूरे देश में राजनीतिक बयानबाजी होती है।

विडंबना देखिए कि जिस अमरनाथ गुफा में भगवान शिव द्वारा माता पार्वती को अमरत्व की कथा सुनाए जाने का मिथक वहां जाने के लिए उद्वेलित करता है उसके मार्ग में बर्फीले तूफान और ठंडी हवाएं ही नहीं आतंकी हमले भी श्रद्धालुओं को बार-बार नश्वर साबित करने पर आमादा रहते हैं। इससे लगता है कि मनुष्य की अमरत्व की यात्रा कितनी दुर्गम है। हाल में महबूबा सरकार से समर्थन वापस लेकर राज्यपाल शासन लगाने वाली केंद्र सरकार ने इस बार सुरक्षा के लिए चालीस हजार अर्धसैनिक बलों और राज्य पुलिस बल की तैनाती की है, जिनके पास हमले का मुकाबला करने के लिए आधुनिक हथियारों के साथ निगरानी के लिए ड्रोन व हेल्मेट कैमरे भी हैं। यात्रा की हर गाड़ी पर रेड फ्लैग आईडेंटीफिकेशन कार्ड लगाया गया है और उन सभी की एक केंद्रीय स्थल से निगरानी की जा रही है।

राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन बल की कश्मीर शाखा को भी हर समय तैयार रहने को कहा गया है। हालांकि, आतंकी संगठन हिजबुल मुजाहिदीन ने कहा है कि यात्री उनके मेहमान हैं और वे उन्हें नुकसान नहीं पहुंचाएंगे और बदले में यात्रियों को भी कश्मीर के मामले में हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए।

पिछले वर्ष 10 जुलाई 2017 को जब गुजरात और महाराष्ट्र के यात्रियों पर हमला करके सात लोगों को मार दिया गया था तब कश्मीर में महबूबा मुफ्ती की सरकार थी। तब उन्होंने हमलावरों के विरुद्ध घाटी में एक किस्म का सद्‌भाव का माहौल बनाया था और उस समय हुर्रियत के साथ आतंकी संगठन भी घटना की निंदा करने के लिए मजबूर हुए थे। उम्मीद है यात्रा बिना किसी विध्न के सफल होगी और कश्मीर को भारत के साथ और ज्यादा जोड़ेगी।