Hindi News »Abhivyakti »Editorial» Bhaskar Editorial On Baba Saheb Ambedkar

सामाजिक क्रांति को साकार करना आंबेडकर का सम्मान

समाजवादी पार्टी ने तय किया है कि इस साल 14 अप्रैल को वह बाबा साहेब की जयंती जोर-शोर से मनाएगी।

Bhaskar News | Last Modified - Apr 06, 2018, 07:27 AM IST

अगले साल होने वाले आम चुनाव के मद्‌देनजर राजनीतिक दलों में बाबा साहेब आंबेडकर का नाम भुनाने की होड़ मची है। इसका ताजा उदाहरण प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का यह कथन है कि उनकी सरकार ने आंबेडकर का जितना सम्मान किया है उतना किसी सरकार ने नहीं किया। उधर उत्तर प्रदेश में बहुजन समाज पार्टी से लगातार निकटता बढ़ा रही समाजवादी पार्टी ने तय किया है कि इस साल 14 अप्रैल को वह बाबा साहेब की जयंती जोर-शोर से मनाएगी।

जाहिर है कि प्रधानमंत्री ने यह बयान कांग्रेस पार्टी को निशाने पर लेते हुए उन दलित संगठनों को रिझाने के लिए दिया है जिन्होंने 2 अप्रैल को भारत बंद के दौरान देशव्यापी आक्रोश व्यक्त किया था। सही है कि दिल्ली में आंबेडकर भवन का निर्माण और फिर राजपुर रोड स्थित बाबा साहेब के आवास का जीर्णोद्धार कराने का फैसला एनडीए सरकार ने लिया और राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ ने बाबा साहेब को प्रातःस्मरणीय व्यक्तित्व के रूप में स्वीकार किया।

इसके बावजूद इस यथार्थ को नहीं भूलना चाहिए कि विश्वनाथ प्रताप सिंह ने जब 1990 में डॉ. आंबेडकर को मरणोपरांत भारत रत्न देने का फैसला किया तो उसके पीछे भाजपा की पैरवी नहीं, सामाजिक न्याय की राजनीति और कांशीराम के नेतृत्व में बहुजन समाज के आंदोलन का बढ़ता दबाव था। सवाल बाबा साहेब की शिक्षाओं को लागू करने और उनके संविधानवाद को समझने का है। डॉ. आंबेडकर ने व्यक्तिपूजा के खिलाफ सख्त हिदायत दी थी। उनका कहना था कि किसी की भी बात को आंख मूंदकर स्वीकार नहीं करना चाहिए।

विडंबना है कि आज बाबा साहेब की शिक्षाओं को छोड़कर उनकी पूजा की होड़ मची है। उनके विचार-दर्शन के मूल में जाति व्यवस्था का समूल नाश है और उस समाज को बनाने के लिए उन्होंने आजीवन संघर्ष किया। उसी दर्शन को उन्होंने संविधान में समाहित करने की कोशिश की। उनका कहना था कि हिंदू धर्म को अपने ग्रंथों में संशोधन करना चाहिए और उसे एक मिशनरी धर्म बनाना चाहिए।

बाबा साहेब की जय जयकार करने वाले राजनीतिक दल अपने एक भी बयान में यह नहीं कहते कि इस जाति व्यवस्था का नाश किए बिना बहुत सारी समस्याएं बनी रहेंगी। दरअसल बाबा साहेब आंबेडकर का वास्तविक सम्मान तभी संभव होगा जब उनकी मूर्तियां लगाने की बजाय उनके सामाजिक क्रांति के विचारों को मूर्त रूप दिया जाए।

दैनिक भास्कर पर Hindi News पढ़िए और रखिये अपने आप को अप-टू-डेट | अब पाइए News in Hindi, Breaking News सबसे पहले दैनिक भास्कर पर |

More From Editorial

    Trending

    Live Hindi News

    0

    कुछ ख़बरें रच देती हैं इतिहास। ऐसी खबरों को सबसे पहले जानने के लिए
    Allow पर क्लिक करें।

    ×