भास्कर संपादकीय: उपचुनाव के नतीजों से विपक्ष की एकता को संजीवनी / भास्कर संपादकीय: उपचुनाव के नतीजों से विपक्ष की एकता को संजीवनी

Bhaskar News

Jun 01, 2018, 01:34 AM IST

कैराना और भंडारा-गोंदिया की सीट पर विपक्ष का कब्जा भाजपा के लिए खतरे की घंटी की तरह है।

सांकेतिक तस्वीर। सांकेतिक तस्वीर।

दक्षिण से उत्तर और पश्चिम से पूरब तक फैले देश की चार लोकसभा और 11 विधानसभा सीटों के उपचुनाव ने साफ संदेश दिया है कि अगर कर्नाटक से शुरू हुई गैर-भाजपा दलों की एकता का कोई स्पष्ट समीकरण बनता है तो 2019 का चुनाव भाजपा और उसके गठबंधन राजग के लिए आसान नहीं होगा। कैराना और गोंदिया-भंडारा की लोकसभा सीट भाजपा से छीनकर विपक्षी दलों ने दिखा दिया है कि उनकी एकता न सिर्फ वोटों का जीतने लायक गणित कायम कर सकती है बल्कि उनके भीतर आपस में जुड़ने के लिए एक रसायन और बीजगणितीय फॉर्मूला भी तैयार कर सकती है। हालांकि भाजपा ने महाराष्ट्र की पालघर और नगालैंड की सीट अपने पास बरकरार रखी है लेकिन, कैराना और भंडारा-गोंदिया की सीट पर विपक्ष का कब्जा भाजपा के लिए खतरे की घंटी की तरह है।

कैराना की सीट भाजपा के लिए बेहद प्रतिष्ठा की सीट बन गई थी क्योंकि यह भाजपा के चर्चित सांसद हुकुम सिंह के निधन से खाली हुई थी और भाजपा ने उनकी बेटी मृगांका सिंह को वहां से उम्मीदवार बनाया था। इस सीट पर रालोद उम्मीदवार तबस्सुम का जीतना पूरे विपक्ष की जीत है।

इसी लोकसभा क्षेत्र की नूरपुर विधानसभा सीट पर समाजवादी पार्टी की विजय भी विपक्षी एकता के पक्ष में एक मजबूत पाए के रूप में उपस्थित हुई है। उपचुनाव अगर महाराष्ट्र जैसे पश्चिमी राज्य में राजग की आंतरिक दरार को प्रदर्शित करता है तो नगालैंड जैसे पूर्वोत्तर राज्य में भाजपा और उसके सहयोगी दल एनडीडीपी की पकड़ को दर्शाता है। वहीं यह उपचुनाव उत्तर प्रदेश और बिहार जैसे राज्य में राजग के मुख्यमंत्रियों के डगमगाते आधार का भी संकेत है। योगी सरकार लगातार तीसरा लोकसभा उपचुनाव हारी है और यह उनकी अजेय हिंदूवादी छवि के लिए झटका है।

वहीं नीतीश कुमार भी भाजपा का दामन पकड़ने के बाद पिछड़े, अल्पसंख्यक और अतिपिछड़े मतदाताओं से दूर हो रहे हैं और राजद उनके करीब जा रही है यह पिछले उपचुनावों के परिणामों से जाहिर हो रहा है। हालांकि भाजपा और राजग अभी भी एक व्यवस्थित गठबंधन है और विपक्ष के गठबंधन का निर्माण होना है। इधर नरेंद्र मोदी जैसे लोकप्रिय और आत्मविश्वास से भरे नेता हैं तो इधर नेताओं का कॉलेजियम है। इसलिए 2019 का मुकाबला दिलचस्प होगा।

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