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भास्कर संपादकीय: फिर धूल और धुंध से घिर गई देश की राजधानी

वास्तव में पिछले तीन दिनों से यह स्तर गंभीरता के पैमाने को भी धता बता चुका है और ऐसे में दिन में भी दृश्यता ठीक नहीं है।

Dainik Bhaskar

Jun 15, 2018, 12:47 AM IST
सांकेतिक तस्वीर। सांकेतिक तस्वीर।

देश की राजधानी दिल्ली धूल और धुंध से इतनी बुरी तरह घिर गई है कि न तो सूरज ठीक से चमक पा रहा है और न ही लोग अच्छी तरह सांस ले पा रहे हैं। यह देश की राजनीतिक स्थिति पर की गई कोई व्यंग्यात्मक टिप्पणी नहीं बल्कि राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र की पर्यावरणीय स्थिति की हकीकत है। देश और दुनिया भर से आकर बसे लोगों से बनने वाली दिल्ली के बारे में कहा जाता है कि न तो यहां की संस्कृति अपनी है, न यहां के लोग अपने हैं और न यहां की जलवायु अपनी है।

फिलहाल दिल्ली को ईरान और दक्षिण अफगानिस्तान की ओर से आने वाली धूल भरी हवाओं ने घेर लिया है और दिल्ली के नागरिक और वैज्ञानिक राजस्थान के हवाले से ईरान और अफगानिस्तान को बहुत याद कर रहे हैं। दिल्ली के कई इलाकों में पीएम 10 का स्तर 700 से 800 तक पहुंच गया है और नोएडा में तो इसका स्तर 1,135 का है। वायु गुणवत्ता सूचकांक यानी एक्यूआई का 50 का स्तर अच्छा माना जाता है और 100 के करीब का स्तर संतोषजनक होता है। जबकि 400 से पांच सौ का स्तर गंभीर माना जाता है।

वास्तव में पिछले तीन दिनों से यह स्तर गंभीरता के पैमाने को भी धता बता चुका है और ऐसे में दिन में भी दृश्यता ठीक नहीं है। उधर नोएडा में पीएम 2.5 अगर 444 है तो गाजियाबाद में 458 है। अगर पीएम 10 का सामान्य और अच्छा स्तर 50 है तो पीएम 2.5 का स्तर 60 माना जाता है। इस लिहाज से पीएम 2.5 भी कम खतरनाक स्तर पर नहीं है। पीएम 2.5 सीधे फेफड़ों और दिल पर असर डालता है और स्वास्थ्य संबंधी दिक्कतें पैदा करता है। धूल से बने इस प्रदूषण के चलते बुधवार को दिल्ली में पिछले आठ सालों की सबसे गर्म सुबह रिकॉर्ड की गई और तापमान 34 डिग्री तक पहुंच गया।

सवाल यह है कि हमारे समाज और उसकी संस्थाओं के पास प्रकृति के इन प्रतिकूल प्रभावों का क्या समाधान है? सरकार के स्तर पर यह तैयारी यह है कि अगर यह स्तर ऐसे ही रहा तो दिल्ली में ट्रकों का प्रवेश रोक दिया जाएगा। दूसरी उम्मीद 16 जून को संभावित बारिश से है। अगर बारिश नहीं हुई तो पानी के छिड़काव का उपाय भी अपनाया जाना चाहिए। इन समाधानों के अलावा दिल्ली को अगर रेगिस्तान की धूल भरी हवाओं से ही नहीं, रेगिस्तान की चपेट में आने से भी बचाना है तो अरावली पर्वत माला को बचाना होगा, क्योंकि लगातार होने वाले निर्माण और खनन ने अरावली को ध्वस्त कर दिया है।

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सांकेतिक तस्वीर।सांकेतिक तस्वीर।
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