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भास्कर संपादकीय: चीन के दबाव में गिलगित पर पाक का गलत कदम

अब तक वह क्षेत्र पाक अधिकृत कश्मीर की ही तरह स्वायत्त क्षेत्र की मान्यता रखता था।

Bhaskar News | Last Modified - May 29, 2018, 08:48 AM IST

चीन की मदद से गिलगित और बालटिस्तान को हजम करने की पाकिस्तानी कोशिश कामयाब नहीं हो सकती, यह संदेश न सिर्फ भारत के विरोध बल्कि उस इलाके में उठे जनता के विरोध प्रदर्शन से स्पष्ट हो जाना चाहिए। पाकिस्तान के कमजोर प्रधानमंत्री शाहिद खकन अब्बासी ने अपने को मजबूत करने के लिए 2009 के उस आदेश को पलट कर एक विवादित कदम उठाया है, जिसके तहत उस क्षेत्र के स्थानीय निवासियों को स्वशासन के अधिकार प्राप्त थे।

उन्होंने 21 मई 2018 को गिलगित-बालटिस्तान विधानसभा से एक ऐसा आदेश पारित करा दिया, जिसके तहत खनिज और जलविद्युत परियोजनाओं के बारे में फैसला लेने का हक अब विधानसभा को प्राप्त हो गया और गिलगित स्वायत्त परिषद के पास महज सलाहकार की भूमिका रह गई। यही वजह है कि भारत को पाकिस्तान के उच्चायुक्त सैयद हैदर शाह को बुलाकर कहना पड़ा कि वह क्षेत्र भारत का अविभाज्य अंग है और उसे किसी भी तरह से पाकिस्तान का चौथा प्रांत बनाने का प्रयास भारत को मंजूर नहीं होगा।

दूसरी तरफ गिलगित के इलाके में अवामी एक्शन कमेटी के नेता सुल्तान रईस के नेतृत्व में सभी पार्टियां इस फैसले के विरुद्ध लगातार प्रदर्शन कर रही हैं और सुरक्षा बलों का दमन झेल रही हैं। अब तक वह क्षेत्र पाक अधिकृत कश्मीर की ही तरह स्वायत्त क्षेत्र की मान्यता रखता था। चीन और पाकिस्तान का 50 अरब डॉलर का आर्थिक गलियारा इसी क्षेत्र से गुजर रहा है और चीन की विस्तारवादी नीति के तहत वह इस क्षेत्र की भौगोलिक और राजनीतिक स्थिति को बदलने की गंभीर कोशिश है।

गिलगित और बालटिस्तान का इलाका 1947 में कबाइली हमले में भारत के कब्जे से निकल गया था और तबसे संयुक्त राष्ट्र के प्रस्ताव में इसे विवादित समझा जाता है। अपनी ऊंची पहाड़ियों और प्राकृतिक सौंदर्य के कारण यह क्षेत्र पर्यटन और पर्वतारोहण के लिहाज से प्रसिद्ध होता जा रहा है। यहां पर चीन और पाकिस्तान की गतिविधियां स्थानीय आबादी की स्वायत्तता और भारतीय सम्प्रभुता दोनों के लिए चुनौती हैं। भारत को चाहिए कि इस प्रयास का न सिर्फ विरोध करे बल्कि स्थानीय जनता की आवाज को वैश्विक स्तर पर उठाए। गिलगित पर पाकिस्तान का नया आदेश संयुक्त राष्ट्र के प्रस्ताव का भी उल्लंघन है और क्षेत्र की शांति के लिए खतरा है, यह बात दुनिया को पता चलनी चाहिए।

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