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भास्कर संपादकीय: भारतीयों का पुनर्निर्माण और तालिबानियों का विध्वंस

अफगानिस्तान का संसद भवन भी भारतीयों ने ही बनाकर दिया है, जिसका उद्‌घाटन हमारे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किया था।

Danik Bhaskar | May 07, 2018, 10:20 PM IST
सांकेतिक तस्वीर। सांकेतिक तस्वीर।

अफगानिस्तान के बागलान प्रांत से छह भारतीय इंजीनियरों समेत बिजली कंपनी केईसी के सात कर्मचारियों के अगवा किए जाने से वहां चल रहे पुनर्निर्माण के काम पर असर पड़ेगा और इससे हिंसा और बढ़ने की आशंका है। अगवा करने वाला संगठन तालिबान चाहता है कि उसके कब्जे वाले इलाके में बिजली की आपूर्ति चलती रहे और साथ ही वह कर्मचारियों की जान भी जोखिम में डालता रहे, जो एक कट्‌टर और हिंसक संगठन की जटिल व दोमुंही रणनीति है।

कुछ समय पहले तालिबान ने सरकार से कहा था कि वह उसके कब्जे वाले प्रांत कुंदुज और बागलान में बिजली बहाल करे। जब वह काम सुचारू रूप से नहीं हो पाया तो उसने बिजली का एक टावर गिरा दिया और काबुल की बिजली कई दिनों तक कटी रही। अफगानिस्तान की अशरफ गनी सरकार और अमेरिका की ट्रम्प सरकार चाहती है कि तालिबान बातचीत करे और आगामी चुनाव में हिस्सा ले, जबकि तालिबानी हथियार बंद लड़ाई में हिस्सा लेने में यकीन करते हैं। इसलिए 2014 में अपनी थल सेनाओं को वापस कर चुका अमेरिका हवाई हमले कर रहा है और उसमें तालिबानियों को नुकसान हो रहा है। इस बीच भारत बिजली, शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि, सिंचाई और दूसरी ढांचागत योजनाओं के माध्यम से ध्वस्त और नष्ट हुए अफगानिस्तान का पुनर्निर्माण कर रहा है।

अफगानिस्तान के 31 प्रांतों में भारत की 116 परियोजनाएं चल रही हैं और 16 वर्षों के इस काम में उनकी लागत दो अरब डॉलर तक पहुंच चुकी है। बताया जाता है कि तालिबानियों ने भारतीयों को सरकारी कर्मचारी समझकर अगवा किया, जबकि वे एक निजी कंपनी के मुलाजिम हैं। निजी और सरकारी से ज्यादा सवाल उन इनसानों की जोखिम में पड़ी जान का है, जो ध्वस्त हो चुके अफगानिस्तान को फिर से संवार रहे हैं।

अफगानिस्तान का संसद भवन भी भारतीयों ने ही बनाकर दिया है, जिसका उद्‌घाटन हमारे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किया था। हालांकि भारत अफगानिस्तान में सैन्य गतिविधियों में शामिल नहीं है लेकिन, अपने नागरिकों की रक्षा का दायित्व उसे निभाना ही होगा। बागलान प्रांत के गवर्नर अब्दुलहाई नीमाती ने कहा है कि अगवा किए गए लोगों को रिहा कराने का प्रयास जारी है पर इतना आश्वासन पर्याप्त नहीं है। सरकार सारे राजनयिक संबंधों का पुरजोर इस्तेमाल करके भारतीयों को सकुशल रिहा कराए। इसमें भारत के साथ अफगानिस्तान का भी भला है।