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स्विस बैंकों में भारतीयों का जमा धन बढ़ने का अर्थ- भास्कर संपादकीय

क्या वजह है 2016 स्विस बैंक में जमा होने वाला भारतीयों का पैसा 45 प्रतिशत गिरा था लेकिन, अगले ही वर्ष उसमें उछाल आ गया।

Dainik Bhaskar

Jun 30, 2018, 12:52 AM IST
2017 में 7000 करोड़ रुपए का स्विस बै 2017 में 7000 करोड़ रुपए का स्विस बै

स्विस नेशनल बैंक ने 28 जून को अपने यहां विदेशियों की जमा राशि के बारे में जो आंकड़े जारी किए हैं वे भारत सरकार के दावे को धता बताने वाले हैं और भ्रष्टाचार के विरुद्ध होने वाली लड़ाई के दावे की पोल खोलते हैं। वहां जमा होने वाली भारतीयों की राशि में 2017 में पचास प्रतिशत से ज्यादा बढ़ोतरी यह बताती है कि कालेधन के कारोबारी सरकार से ज्यादा चतुर हैं। सरकार अगर डाल डाल है तो वे पात पात हैं। वरना क्या वजह है 2016 स्विस बैंक में जमा होने वाला भारतीयों का पैसा 45 प्रतिशत गिरा था लेकिन, अगले ही वर्ष उसमें उछाल आ गया। वहां जमा होने वाले भारतीयों के धन में तीन वर्षों तक ह्रास का दौर रहा और उससे भारतीय अर्थव्यवस्था और सरकार को एक प्रकार की खुशी का अनुभव होता था।

सरकार भी यह दावा करने में लग गई थी कि उसके प्रयासों के अच्छे परिणाम आने लगे हैं। भ्रष्टाचार मिटाने, विदेशों में जमा काला धन देश में वापस लाने और हर खाते में 15 लाख जमा करने के वादे के साथ सत्ता में आई मोदी सरकार ने कालेधन पर कार्रवाई के लिए कई कदम उठाए थे। सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका के तहत विशेष जांच दल (एसआईटी) गठित किया गया। विदेशी बैंकों ने कई खातेदारों के नाम भी सरकार को दिए। हालांकि, वे नाम उजागर नहीं किए गए। सरकार ने न सिर्फ दूसरे देशों के साथ ऐसे समझौते किए, जिनके तहत जांच में सुविधा होती है बल्कि मनी लॉन्डरिंग विरोधी कानून भी पास किया गया। सरकार ने अन्य देशों के साथ सूचना विनिमय की व्यवस्था की, जिसके तहत स्वाभाविक रूप से जानकारियां उजागर की जाती हैं।

इस बीच 2016 में नोटबंदी जैसा सख्त और चौंकाने वाला कदम भी भारत सरकार ने उठाया। जिसके चमत्कारिक प्रभाव के बारे में किए गए दावे यथार्थ की कसौटी पर खरे नहीं उतरे। रिजर्व बैंक अभी भी घरेलू कालेधन के बारे में स्पष्ट रूप से कोई ब्योरा जारी नहीं कर सका है। इस मौके पर स्विस बैंक की ओर से जारी आंकड़े यह सोचने को मजबूर करते हैं कि क्या यह नोटबंदी के दुष्प्रभाव से बचने के लिए अमीर भारतीयों की तरफ से उठाया गया कदम तो नहीं है, क्योंकि जब घरेलू स्तर पर कालेधन को रखने और चलाने की गुंजाइश नहीं बचती तभी उसे बाहर ले जाया जाता है। संतोष इतना ही है कि 2017 में 7000 करोड़ रुपए का स्विस बैंक में जमा धन 2006 के 23,000 करोड़ रुपए से काफी कम है।

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2017 में 7000 करोड़ रुपए का स्विस बै2017 में 7000 करोड़ रुपए का स्विस बै
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