Hindi News »Abhivyakti »Editorial» Bhaskar Editorial On Krishna Ganga Project

भास्कर संपादकीय: कृष्णगंगा बांध पर फिर पाकिस्तान की किरकिरी

पाकिस्तान इस मामले में तब से अड़ंगा लगा रहा है जब से 2007 में इस परियोजना का प्रारूप बना।

Bhaskar News | Last Modified - Jun 07, 2018, 08:32 AM IST

भास्कर संपादकीय: कृष्णगंगा बांध पर फिर पाकिस्तान की किरकिरी

कृष्णगंगा बांध के मामले में विश्व बैंक के अध्यक्ष जिम यांग किम के सुझाव ने पाकिस्तान की फिर किरकिरी कर दी है। उनका यह कहना भारत के पक्ष में जाता है कि पाकिस्तान इस मामले में अंतरराष्ट्रीय प्रशासनिक न्यायालय में जाने की बजाय भारत के सुझाव के मुताबिक किसी तटस्थ विशेषज्ञ की सलाह मान ले। यही भारत चाहता भी है। जबकि पाकिस्तान इस मामले में तब से अड़ंगा लगा रहा है जब से 2007 में इस परियोजना का प्रारूप बना। बांदीपुर से पांच किलोमीटर दूर यह बांध कृष्णगंगा नदी का पानी झेलम के जलविद्युत संयंत्र को सप्लाई करता है। उस पानी के कारण वहां 330 मेगावाट के तीन संयंत्र संचालित होते हैं। 2011 में हेग की परमानेंट कोर्ट आॅफ एडमिनिस्ट्रेशन ने बांध का काम रोकने का सुझाव दिया था।

भारत के बांध निर्माण पर कुछ समय असर पड़ा। जो बांध 2016 में बन जाना था, वह 2018 में बन सका। इस दौरान एक और समिति ने भारत का समर्थन किया। 2014 में आई एनडीए सरकार ने तेजी से वह परियोजना पूरी कर दी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 19 मई 2018 को परियोजना का शुभारंभ भी कर दिया। इससे भारत का वह इलाका बिजली के मामले में आत्मनिर्भर होगा ही, अन्य राज्यों को भी बिजली आपूर्ति की जा सकेगी।

उधर, पाकिस्तान का कहना है कि इस बांध का निर्माण 1960 में विश्व बैंक के तत्वावधान में की गई संधि का उल्लंघन है। संधि कहती है कि भारत तभी बांध बना सकता है जब नदी के जल प्रवाह पर फर्क न पड़े और न ही उसकी दिशा बदले। भारत का कहना है कि यह संधि की गलत व्याख्या है। इस बीच, विशेषज्ञों की कमेटी ने कहा था कि भारत नदी का सारा पानी कहीं और ले जा सकता है बशर्तें वह पर्यावरणीय लिहाज से एक धारा पाकिस्तान की ओर बहते हुए छोड़ दे। निश्चित तौर पर इस मामले में भारत मजबूत स्थिति में है और बिजली उत्पादन शुरू होने के बाद वहां हुए निवेश का फायदा भी मिल रहा है।

दरअसल यह पाकिस्तान की प्रवृत्ति है कि वह हर छोटे-मोटे मसले का अंतरराष्ट्रीयकरण करना चाहता है और उसमें कोई तीसरा पक्ष लाना चाहता है, जबकि भारत उसका स्थानीयकरण और समाधान चाहता है। अगर पाकिस्तान विश्व बैंक के अध्यक्ष किम की बात मानकर एक तटस्थ विशेषज्ञ की नियुक्ति को स्वीकार करके उसके सुझावों का इंतजार करे, तो तनाव घट सकता है।

दैनिक भास्कर पर Hindi News पढ़िए और रखिये अपने आप को अप-टू-डेट | अब पाइए News in Hindi, Breaking News सबसे पहले दैनिक भास्कर पर |

More From Editorial

    Trending

    Live Hindi News

    0

    कुछ ख़बरें रच देती हैं इतिहास। ऐसी खबरों को सबसे पहले जानने के लिए
    Allow पर क्लिक करें।

    ×