--Advertisement--

कश्मीर को लेकर महबूबा की चेतावनी का मतलब- भास्कर संपादकीय

मुफ्ती की चेतावनी ब्लैकमेलिंग की रणनीति है, जिसे नेशनल कॉन्फ्रेंस तो कभी पीडीपी-अलगाववादी कश्मीरी पार्टियां अपनाती रहीं

Dainik Bhaskar

Jul 13, 2018, 10:24 PM IST
महबूबा मुफ्ती महबूबा मुफ्ती

अपनी पार्टी पीडीपी में मचे घमासान को दबाने के लिए केंद्र में सत्तारूढ़ भाजपा को 1987 जैसे हालात पैदा हो जाने के बारे में दी गई महबूबा मुफ्ती की चेतावनी ब्लैकमेलिंग की रणनीति है, जिसे कभी नेशनल कॉन्फ्रेंस तो कभी पीडीपी और कभी अलगाववादी कश्मीरी पार्टियां अपनाती रही हैं। भाजपा के समर्थन वापस लेने के बाद सत्ता गंवाकर और पार्टी में टूट की आशंका का मुकाबला कर रही महबूबा की पार्टी को जिस दक्षिण कश्मीर में सबसे ज्यादा सीटें मिली थीं वहां की बढ़ती हिंसा इस बात का संकेत है कि उनका जनाधार भी खिसक रहा है।

विकल्प के तौर पर उभर रहे उमर अब्दुल्ला विधायकों की खरीद-फरोख्त से बचने के लिए लगातार चुनाव की मांग कर रहे हैं। ऐसे में महबूबा का बयान एक क्षेत्रीय नेता के नैराश्य के तौर पर देखा जाना चाहिए। हालांकि, कश्मीर का दल-बदल विरोधी कानून देश के दूसरे हिस्सों के कानूनों के मुकाबले कठिन है और पार्टी तोड़ने वाले विधायकों को अपनी सदस्यता गंवानी ही पड़ेगी। इसलिए महबूबा को दल-बदल से ज्यादा चिंता आगामी चुनावों में धांधली की सता रही है। यही वजह है कि महबूबा के बयान में साफ कहा गया है कि अगर दिल्ली ने 1987 की तरह यहां के अवाम के वोट पर डाका डाला तो जिस तरह एक सलाहुद्दीन और एक यासीन मलिक ने जन्म लिया वैसी ही खतरनाक स्थिति आज भी हो सकती है। महबूबा की इस चेतावनी पर तमाम राष्ट्रीय चैनल महबूबा की मलानत करने में भी जुट गए हैं। ऐसे में उन विभाजनकारी ताकतों को और मौका मिलता है जो कश्मीर के लोकतंत्र और शांति के दुश्मन हैं।

कश्मीर के हालात जटिल हैं और वहां जब आतंकियों और सैनिकों के बीच जंग छिड़ी हो तब ज्यादा नैतिकता की बात मौजू नहीं है। इसके बावजूद केंद्र और भाजपा को यह कोशिश करनी चाहिए कि वह राष्ट्रहित में कश्मीर में एक नैतिक आचरण कायम रखे। उसे 1987 की आशंका को हवा में भी नहीं उड़ा देना चाहिए, क्योंकि कांग्रेस की उस जोड़-तोड़ का खामियाजा देश आज तक भुगत रहा है। चेतावनी का यह भी अर्थ है कि कश्मीर में जोड़-तोड़ से नई सरकार बनाने की कोई भी कोशिश अब शांति पैदा करने की बजाय ज्यादा बदमगजी और अशांति पैदा करेगी। इसलिए राज्यपाल को कोशिश करनी चाहिए कि जितनी जल्दी हो सके वहां पर चुनाव के लायक माहौल बनाया जाए ताकि समय रहते उसे संपन्न कराकर एक लोकतांत्रिक सरकार कायम की जाए।

X
महबूबा मुफ्तीमहबूबा मुफ्ती
Bhaskar Whatsapp

Recommended

Click to listen..