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भास्कर संपादकीय: दो अंकों की वृद्धि दर का सपना कब होगा पूरा?

भारत में दो अंकों की विकास दर का सपना यूपीए सरकार के समय से ही दिखाया जा रहा है।

Danik Bhaskar | Jun 19, 2018, 12:44 AM IST

नीति आयोग की नियामक परिषद की बैठक में चौथी तिमाही की वृद्धि दर से उत्साहित प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने महंगे तेल के इस मौसम में दो अंकों की विकास दर का सपना सामने रखकर देश को नए प्रकार से प्रेरित करने का प्रयास किया है। भारत में दो अंकों की विकास दर का सपना यूपीए सरकार के समय से ही दिखाया जा रहा है। यूपीए-2 के कार्यकाल में जब मनमोहन सिंह सरकार ने मंदी के झटकों को संभाल लिया तो वित्तमंत्री प्रणब मुखर्जी भी दो अंकों की चर्चा कर रहे थे।

सरकार का मानना है कि किसानों की आय दोगुनी करने, देश के 115 आकांक्षी जनपदों के 15000 गांवों का विकास करने और आयुष्मान भारत, मिशन इंद्रधनुष, न्यूट्रिशन मिशन और महात्मा गांधी की डेढ़ सौवीं जयंती कार्यक्रम को गंभीरता से लागू किए जाने से हम उस लक्ष्य को पा सकेंगे।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का विश्वास है इस उद्‌देश्य में मुद्रा योजना, जनधन योजना और स्टैंडअप इंडिया से वित्तीय समावेशी माहौल बन रहा है, अब जरूरत आर्थिक असंतुलन को दूर करने की है। प्रधानमंत्री के इसी आह्वान के मद्‌देनज़र वित्त मंत्री अरुण जेटली ने पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम पर तंज किया है कि उनकी आशंकाएं निर्मूल साबित हुईं और नोटबंदी और जीएसटी से अर्थव्यवस्था में दो प्रतिशत की गिरावट नहीं आई। हालांकि, रिजर्व बैंक का दावा है कि नोटबंदी के बाद भारत की अर्थव्यवस्था कम नकदी के लक्ष्य को नहीं पा सकी है। लोगों ने नकदी चलन की पहले वाली स्थिति ला दी है।

विकास के लक्ष्य की अड़चन के तौर पर कई राज्यों ने निजी निवेश की कमी की शिकायत की और अरुणाचल का तो कहना था कि निजी निवेश की कमी के कारण 19 जलविद्युत योजनाएं रद्‌द हो चुकी हैं। दूसरे कई राज्यों को शिकायत थी कि छोटे राज्य जिन शर्तों पर बनाए गए थे उन्हें पूरा नहीं किया जा रहा है। दो अंकों की वृद्धि पाने के लिए कारगर राजनीतिक ढांचे के साथ आर्थिक सुधारों का रास्ता ही सर्वश्रेष्ठ माना जाता है पर चुनावी साल में वह ज्यादा तीव्रता से संभव नहीं है।

असली लक्ष्य राजनीतिक सर्वानुमति और निगरानी का होना चाहिए, ताकि राज्यों को विकास के लिए दी जाने वाली 11 लाख करोड़ रुपए की राशि का सही उपयोग हो सके। दो अंकों की अर्थव्यवस्था के लिए भारत को उस अवसर को भी लपकना होगा, जो जी-7 के विफल होने से उपस्थित है और ब्रिक्स देशों के माध्यम से प्राप्त हो रहा है।