विज्ञापन

तेल के साथ तेल की धार भी देख रही है केंद्र सरकार

Dainik Bhaskar

May 21, 2018, 10:59 PM IST

अमेरिकी अर्थव्यवस्था के साथ-साथ यूरोपीय संघ और चीन की स्थिति भी अच्छी है। ऐसे में तेल की मांग कम होने की कोई गुंजाइश नही

सांकेतिक तस्वीर। सांकेतिक तस्वीर।
  • comment

केंद्रीय पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने तेल के बढ़ते दामों पर अपनी प्रतिक्रिया से जता दिया है सरकार तेल के साथ तेल की धार भी देख रही है। इसे बाजार और सरकार की खींचतान कहें या अंतरराष्ट्रीय स्थितियां लेकिन, हकीकत यही है कि तेल को बाजार के हवाले कर चुकी सरकार ने कर्नाटक चुनाव के कारण 19 दिनों तक तेल के दामों में बढ़ोतरी को रोक रखा था। पिछले कुछ दिनों से चल रही तेल के दामों की बढ़ोतरी रविवार को सर्वाधिक हुई और पेट्रोल में 33 पैसे और डीज़ल में 25 पैसे का उछल आ गया।

हमारे केंद्रीय मंत्री ने दामों में हो रही बढ़ोतरी के जो कारण बताए हैं वे दुनियाभर में विदित हैं। ओपेक ने उत्पादन कम किए हैं तो वेनेजुएला में राजनीतिक अस्थिरता है और अमेरिका ने ईरान से नाभिकीय समझौते रद्‌द करने की धमकी देकर उसके तेल को बाजार से बाहर करने की ठानी है। दूसरी ओर दुनियाभर की अर्थव्यवस्थाओं में वृद्धि की रफ्तार ठीक है। भारत की आर्थिक वृद्धि की रफ्तार भी दुनिया में प्रभावशाली है। अमेरिकी अर्थव्यवस्था के साथ-साथ यूरोपीय संघ और चीन की स्थिति भी अच्छी है। ऐसे में तेल की मांग कम होने की कोई गुंजाइश नहीं है।

उधर अगर बाजार से वेनेजुएला और ईरान बाहर हुआ तो दूसरे उत्पादक भी उपस्थित हो सकते हैं। अमेरिका में करों में कटौती हुई है, यूरोपीय केंद्रीय बैंक ने अपनी नीतियों को सख्त किया है। यह देखते हुए मंदी की कोई गुंजाइश नहीं दिखती। मौजूदा स्थितियां तेल के दाम को 80 डालर प्रति बैरल तक ले जा सकती हैं और उससे रुपया भी डॉलर के मुकाबले 67 से बढ़कर सत्तर तक जा सकता है। इन स्थितियों के बावजूद अगर सरकार आश्वस्त है तो इसलिए कि अर्थव्यवस्था की बुनियाद मजबूत है।

सरकार का दावा है कि वह व्यापार घाटा संभालने की स्थिति में है। हालांकि वह इस साल 160 अरब डॉलर तक पहुंच गया है ,जो कि पिछले साल 40 से 50 अरब डॉलर तक था। सरकार एक तरफ बैंकों की स्थिति संभालने और रुपए को मजबूत करने के लिए बॉन्डों की संरचना में बदलाव करने को तैयार है तो उत्पाद कर को कम करने का भी प्रस्ताव रख रही है। उत्पाद कर में कटौती की बात सरकार ने बहुत दिनों बाद की है। शायद उसे 2019 में होने वाले चुनावों का अहसास है और अगर उस समय तक तेल के दाम बढ़ते रहे तो महंगाई को रोकना मुश्किल होगा। उम्मीद करनी चाहिए सरकार कारगर कदम उठाएगी।

X
सांकेतिक तस्वीर।सांकेतिक तस्वीर।
COMMENT
Astrology

Recommended

Click to listen..
विज्ञापन
विज्ञापन