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भास्कर संपादकीय: आधार नंबर पर ‘शक्तिमान’ बनने से बचना बेहतर होगा

Dainik Bhaskar

Jul 30, 2018, 10:38 PM IST

ट्राई के अध्यक्ष ने आधार नंबर सार्वजनिक कर उसे पूर्ण सुरक्षित दिखाने का जो प्रयास किया, उससे नए किस्म के विवाद खड़े हुए

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भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (ट्राई) के निवर्तमान अध्यक्ष डॉ. रामसेवक शर्मा ने अपना आधार नंबर सार्वजनिक करके उसे पूर्ण सुरक्षित दिखाने का जो प्रयास किया है उससे नए किस्म के विवाद उठ खड़े हुए हैं। हैकरों ने उनकी बहुत सारी निजी सूचनाएं उजागर करके उनके खाते में एक रुपए भी डाल दिया है, जबकि उनका कहना है कि इससे उनका कोई नुकसान नहीं हुआ है और जितनी निजी जानकारियां हासिल करने का दावा किया जा रहा है वे भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण के डेटाबैंक से नहीं गूगल और दूसरी साइटों से प्राप्त की गई हैं।

डॉ. शर्मा की इस चुनौती का सैद्धांतिक पहलू इस लिहाज से ठीक है कि इससे आधार के आंकड़ों की सुरक्षा के बारे में प्राधिकरण और चौकस हो जाएगा और हाल में आई श्रीकृष्ण पैनल की रिपोर्ट के सुझावों पर गौर करेगा। पैनल ने अपनी रिपोर्ट में कहा था कि आधार कानून में और संशोधन किए जाने की जरूरत है ताकि किसी की पहचान प्रमाणित करने का अधिकार सिर्फ सरकारी अधिकारी के पास ही रहे और पहचान प्रमाणित करने का तरीका ऑनलाइन न होकर ऑफलाइन हो। सुप्रीम कोर्ट में आधार परियोजना की संवैधानिकता और निजी गोपनीयता की सुरक्षा के सवाल पर चल रही सुनवाई के बीच इस तरह के सवालों और सुझावों की बहुत उपयोगिता है। इससे न्यायालय को इस परियोजना को दोषरहित बनाने और सरकार को चौकसी के आदेश देने में मदद ही मिलेगी। आरएस शर्मा पहले भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण के सीईओ रहे हैं और हो सकता है कि उनको उसकी प्रौद्योगिकी के बारे में गहरी जानकारी भी हो।

इसके बावजूद अगर उन्हीं की तर्ज पर देश के दूसरे सामान्य नागरिक अपना आधार नंबर सार्वजनिक करने लगें तो उनके साथ वही हो सकता है जो शक्तिमान की नकल में अभिनय करने वाले बच्चों का हो सकता है। संभव है डॉ. शर्मा ने अपने अकाउंट नंबरों को दोहरे पासवर्ड से सुरक्षित कर रखा हो जो काम सामान्य नागरिक नहीं कर पाता। लेकिन, नुकसान की परिभाषा हर व्यक्ति की अलग-अलग भी होती है। सामान्य जन अपनी सूचनाओं के कारण अक्सर साइबर अपराधियों के निशाने पर होते हैं। इसलिए अच्छा हो कि इन तमाम सैद्धांतिक और व्यावहारिक पहलुओं पर सुप्रीम कोर्ट विधिवत विचार करे और एक ऐसा फैसला दे, जिससे आधार परियोजना जनता को दुख नहीं सुख देने वाली साबित हो।

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