भास्कर संपादकीय: असम में उठे नागरिकता के सवाल का जवाब आसान नहीं / भास्कर संपादकीय: असम में उठे नागरिकता के सवाल का जवाब आसान नहीं

असम में 40 लाख लोगों का एनआरसी के अंतिम मसौदे से बाहर होना इंसानियत और राष्ट्रीयता के बीच गंभीर समस्या का खड़ा होना है

Bhaskar News

Jul 31, 2018, 11:22 PM IST
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असम में 40 लाख लोगों का राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर(एनआरसी) के अंतिम मसौदे से बाहर होना इंसानियत और राष्ट्रीयता के बीच गंभीर समस्या का उपस्थित होना है। केंद्र और राज्य में सत्तारूढ़ भाजपा और उसकी सरकार ने यह साबित करने की कोशिश की है कि जो काम मुस्लिम वोट बैंक के चलते कांग्रेस सरकार टाल रही थी उसे उसने कर दिखाया। दूसरी ओर इसके पश्चिम बंगाल और देश के अन्य हिस्सों में पड़ने वाले प्रभाव को देखते हुए मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और दूसरे विपक्षी नेताओं ने सरकार पर पक्षपात का आरोप लगाया है और इसे संवेदनशील मानवीय तरीके से हल करने की मांग की है।

40 लाख लोगों का आकार न सिर्फ असम की आबादी का 10 प्रतिशत है बल्कि दुनिया के तकरीबन सौ देशों की जनसंख्या से भी ज्यादा है। अगर सरकार कहना चाहती है कि भारत के भीतर पूरा देश अवैध तरीके से रह रहा है तो विपक्ष कह रहा है कि इतनी बड़ी आबादी को हम जेलों और शिविरों में रख नहीं सकते और बांग्लादेश को एक साथ वापस भी नहीं कर सकते। असम में अस्सी के दशक का छात्र आंदोलन असमिया लोगों की अस्मिता की समस्या और बांग्लाभाषियों की घुसपैठ के विरुद्ध चला था और उसे देश के तमाम धर्मनिरपेक्ष समूहों को समर्थन भी हासिल था। इंदिरा गांधी ने उसे सांप्रदायिक रंग दिया और बाद में अल्पसंख्यकों के नेल्ली नरसंहार के बाद समस्या हिंदू बनाम मुस्लिम का रूप लेती गई। उसे धीरे धीरे भाजपा ने अपना मुद्‌दा बना लिया।

हालांकि, राजीव गांधी ने 1985 में वहां की असम गण परिषद की सरकार से एक समझौता किया, जिसके तहत विदेशी नागरिकों को चिह्नित करने और उन्हें वापस भेजने का निर्णय लिया गया लेकिन, राजनीतिक इच्छा शक्ति के अभाव में व्यावहारिक धरातल पर समझौता लागू नहीं हो पाया। अब अगर पहचान करने का काम हुआ है तो उसे लागू करने की चुनौती सामने है। निश्चित तौर पर इस मसले पर ऐसी राजनीति छिड़ेगी, जिससे 2019 के चुनाव में एक राजनीतिक ध्रुवीकरण होगा और इसका असर असम ही नहीं पश्चिम बंगाल और त्रिपुरा पर भी पड़ेगा। देखना है कि सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में चल रही इस पहचान प्रक्रिया में न्यायालय संविधान और संयुक्त राष्ट्र के चार्टर के बीच झूलने वाले देशभक्ति और वसुधैव कुटुंबकम के सिद्धांत के माध्यम से टकराव टालने वाला कौन-सा व्यावहारिक फैसला करता है।

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