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हमें क्यों नहीं मिल पाती तूफान के आने की आहट?

प्रश्न उठता है कि इस वैज्ञानिक युग में हमारे पास इस तूफान की सही सूचना क्यों नहीं थी?

Dainik Bhaskar

May 04, 2018, 08:36 AM IST
bhaskar editorial on storm natural calamity

बुधवार को राजस्थान और उत्तर प्रदेश में करीब सौ लोगों की जान लेने वाला और दर्जनों लोगों को घायल करने वाला तूफान प्राकृतिक आपदा है और इस पर प्रशासनिक स्तर पर समुचित राहत की दरकार है। लेकिन, बड़ा सवाल यह है कि हमें उसकी आहट क्यों नहीं मिली? हर चुनाव में सुनामी और तूफान की आहट देखने वाले प्रशासकों से सवाल है कि उन्होंने ऐसी व्यवस्था क्यों नहीं निर्मित की कि हम प्राकृतिक आपदा आने की सही भनक पा सके? तकरीबन सौ किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से आए इस तूफान से संपत्ति को हुए नुकसान का आकलन अभी होना है।

इसमें रिहाइशी इलाके तो तबाह हुए ही हैं उन फसलों को भी भारी नुकसान हुआ है, जो खेत में खड़ी थीं या खलिहान में आ गई थीं। प्रश्न उठता है कि इस वैज्ञानिक युग में हमारे पास इस तूफान की सही सूचना क्यों नहीं थी?

भारत सरकार के मौसम विभाग ने 1 मई से 4 मई तक तूफान और बारिश की भविष्यवाणी तो की थी लेकिन, वह पूर्वोत्तर और पूर्वी भारत के लिए थी। जबकि तूफान आ गया उत्तरी भारत में। करोड़ों रुपए की मशीनों और विशेषज्ञों के माध्यम से चलने वाले भारत सरकार के मौसम विभाग को यह अनुमान नहीं था लेकिन, निजी प्रबंधन में चलने वाले स्काईमेट नामक संगठन को इस तरह के विक्षेप और असमान्य स्थिति का अनुमान था। हालांकि, पिछले कुछ वर्षों से हमारे मौसम विभाग का अनुमान लगभग सही होने लगा था और उड़ीसा के जबरदस्त तूफान से जानमाल की रक्षा में उसका विशेष योगदान रहा था।

दरअसल सुनामी जैसे भयंकर तबाही वाले तूफान के बाद सरकार चेती थी और उसने न सिर्फ उपग्रह और मशीनों पर बल्कि विशेषज्ञों पर पूंजी और बौद्धिकता का निवेश किया था। मौजूदा चूक अपवाद स्वरूप भी हो सकती है और उसका कड़वा घूंट पीते हुए मौसम विभाग के अधिकारियों को चेतावनी देकर शांत हुआ जा सकता है।

इसके विपरीत अगर हमारे वैज्ञानिक विभाग लापरवाह हो रहे हैं और उनमें वैज्ञानिक चेतना की बजाय गैर-वैज्ञानिक चेतना का समावेश हो रहा है तो यह प्रवृत्ति घातक है। यह प्रवृत्ति न तो इंद्रियजन्य अनुभववादी ज्ञान के लिए उचित है और न ही विज्ञान के लिए। प्री-मानसून का एक सामान्य अनुमान अनुभव के आधार पर होता है और विज्ञान उसका क्षेत्र और समय निश्चित करता है। हमें उस मार्ग को छोड़ना नहीं चाहिए।

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