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इस साल मानसून देश में लाना चाहता है अच्छे दिन

भविष्यवाणी पर भरोसा करें तो पिछले दो वर्षों की तरह इस साल भी मानसून सामान्य रहेगा।

Bhaskar News | Last Modified - Apr 18, 2018, 08:28 AM IST

इस साल मानसून देश में लाना चाहता है अच्छे दिन

अगर हम भारतीय मौसम विज्ञान विभाग की भविष्यवाणी पर भरोसा करें तो पिछले दो वर्षों की तरह इस साल भी मानसून सामान्य रहेगा। मौसम विभाग का यह अनुमान औसतन सही बैठता है, लेकिन जब इसके ब्योरे में जाते हैं तो कई किस्म की कमियां उजागर होती हैं। पिछले साल भी यह अनुभव रहा और उससे पहले भी।

मौसम विभाग अपनी भविष्यवाणियों में पांच प्रतिशत की गलती का हिसाब मानकर चलता है, लेकिन पिछले साल के 96 प्रतिशत के अनुमान में सिर्फ एक प्रतिशत की कमी रह गई थी और कुल बारिश 95 प्रतिशत हुई थी। गड़बड़ी उसके अखिल भारतीय प्रसार में थी और देश के 15 प्रतिशत जिलों में बाढ़ आई तो 40 प्रतिशत जिले सूखे रहे। विडंबना देखिए कि राजस्थान जैसे अपेक्षाकृत सूखे रहने वाले क्षेत्र में बारिश बढ़ रही है तो आमतौर पर बारिश से गीले रहने वाले पूर्वोत्तर और मध्य भारत में पानी गिरने की मात्रा कम हो रही है।

आधुनिक वैज्ञानिक उपकरणों से सुसज्जित हमारे मौसम विभाग की सामान्य मौसम की भविष्यवाणी देश के सिर्फ 40 प्रतिशत जिलों के लिए सही रही। यही कारण है कि इस बार मौसम विभाग ने कहा है कि वह 15 मई के बाद जो अनुमान जारी करेगा उसमें क्षेत्रवार विवरण होगा। भारत जैसे विविधता वाले विशाल प्रायद्वीप के लिए यह प्रक्रिया बहुत पहले अपनाई जानी चाहिए थी। शुक्र है अब यह बात हमारे वैज्ञानिकों को समझ में आ रही है। असल में मानसून का अनुमान पूरी तरह से वैज्ञानिक पद्धति पर आधारित नहीं है और न ही पूरी तरह से अनुभवजन्य ज्ञान पर। इसमें दोनों का मिलाजुला रूप दिखाई पड़ता है।

इस अनुमान के लिए अगर सौ साल के अनुभव का अध्ययन होता है तो तकरीबन 28 मॉडलों को भी गणना के लिए इस्तेमाल किया जाता है। इस साल अल नीनो प्रभाव न्यूट्रल बताया जा रहा है और उम्मीद है कि प्रशांत महासागर और हिंद महासागर की सतह गरम होगी और मानसून बनेगा। वास्तव में प्रकृति में दारिद्रय नहीं है, वैविध्य है। उद्योगीकरण से प्रकृति में बदलाव हुआ है। यह प्रकृति की अपनी प्रकृति के कारण भी हो रहा है। अगर वैज्ञानिक सभी कारकों को सही प्रकार से गणना में लाकर सही अनुमान करें तो किसान उस लिहाज से अपनी फसलों की योजना बना सकते हैं। सरकार को भी उसी लिहाज से सिंचाई, बिजली और डीज़ल की व्यवस्था करनी चाहिए। मतलब मानसून के साथ हमें अपने अच्छे दिनों की योजना बनानी चाहिए।

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