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भास्कर संपादकीय: ट्रम्प और किम के समझौते से दुनिया को मिली राहत

तमाम तरह की अमेरिकी पाबंदियों के बाद उत्तर कोरिया अपनी आर्थिक स्थिति को लेकर परेशान था।

Danik Bhaskar | Jun 12, 2018, 11:43 PM IST

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प और उत्तर कोरिया के चेयरमैन किम जाेंग उन के बीच मंगलवार को सिंगापुर के सेंटोसा द्वीप पर हुए परमाणु निरस्त्रीकरण के ऐतिहासिक समझौते से दुनिया ने बड़ी राहत महसूस की है। हालांकि, साल के आरंभ में दोनों नेताओं ने जैसे तेवर दिखाए थे उससे आशंकाओं ने घेर रखा था। दोनों नेताओं ने एक दूसरे को खूब गालियां और नाभिकीय युद्ध की धमकियां दी थीं और इस बीच उत्तर कोरिया ने जापान की तरफ कई मिसाइलें दागकर यह दिखाना चाहा था कि वह अमेरिका तक मार कर सकता है। बदले में अमेरिका के राष्ट्रपति ने भी कहा था कि वे उत्तर कोरिया को धूल में मिला देंगे। अच्छी बात यह है कि 90 मिनट की दो दौर की वार्ता के दौरान उत्तर कोरिया के चेयरमैन किम इस बात के लिए राजी हो गए कि वे परमाणु हथियारों को खत्म करने का सिलसिला जल्दी ही शुरू करेंगे। बदले में अमेरिका उत्तर कोरिया को संरक्षण देने पर राजी हो गया।

दरअसल, तमाम तरह की अमेरिकी पाबंदियों के बाद उत्तर कोरिया अपनी आर्थिक स्थिति को लेकर परेशान था। लेकिन तानाशाह किम को यह डर ज्यादा सता रहा था कि कहीं समझौते के लिए तैयार होने के बाद अमेरिका उनके साथ वही बर्ताव न करे जो उसने इराक के सद्‌दाम हुसैन और लीबिया के कर्नल गद्‌दाफी के साथ किया था। संभवतः अमेरिका के आश्वासन के बाद किम को यह भरोसा हो गया है कि उसके साथ वैसा व्यवहार नहीं होगा। हालांकि इस शिखर बैठक की पृष्ठभूमि कई तरह से तैयार की गई थी। इसमें किम की चीन यात्रा का भी योगदान है तो उत्तर और दक्षिण कोरिया के शासकों की वार्ता का भी।

इसमें सिंगापुर का भी योगदान है और वहां रहने वाले भारतीयों का भी। वार्ता के लिए 100 करोड़ रुपए का भव्य इंतजाम भी था। जाहिर है अगर युद्ध महंगा है तो शांति भी सस्ते में नहीं आती। अच्छी बात यह है कि अपने नागरिकों को भूखे मारने वाले और प्रतिद्वंद्वियों की हत्या करने वाले किम ने इस संधि के माध्यम से समझदारी भरा कदम उठाया है, जबकि पिछले हफ्ते ही अपने सहयोगी कनाडा और फ्रांस के राष्ट्राध्यक्षों पर कड़ी टिप्पणी करने वाले ट्रम्प ने उनके साथ सहज और सम्मान के भाव से पेश आकर सबको चौंकाया है। निश्चित तौर पर ट्रम्प के खाते में यह बड़ी उपलब्धि है और यह उपलब्धि किम के हिस्से में भी जाती है। देखना है इस साल का शांति का नोबेल इन्हें मिलता है या नहीं।