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हमें स्वास्थ्य के साथ विकास चाहिए या बीमारी के साथ

सर्वाधिक प्रदूषित शहरों में भारत के 14 शहरों का शामिल होना इस देश के नागरिकों के स्वास्थ्य के लिए गंभीर चिंता का विषय है

Dainik Bhaskar

May 03, 2018, 08:37 AM IST
bhaskar  editorial on world health organisation report

विश्व स्वास्थ्य संगठन के वैश्विक आंकड़ों के अनुसार दुनिया के बीस सर्वाधिक प्रदूषित शहरों में भारत के 14 शहरों का शामिल होना इस देश के नागरिकों के स्वास्थ्य के लिए गंभीर चिंता का विषय है। सारे के सारे शहर उत्तर भारत के हैं और उनमें भी कानपुर का नंबर सबसे ऊपर है। गौरतलब है कि कानपुर वह शहर है जहां औद्योगिक विकास ठप हो चुका है। पिछले साल की सूची में ईरान का शहर सबसे ऊपर था। लेकिन अगर भारत इस दौड़ में आगे निकला है तो इसके दो कारण संभव हैं। या तो हमारे यहां प्रदूषण नियंत्रण में लापरवाही हुई है या फिर प्रदूषण को मापने वाली मशीनें मुस्तैदी से लग गई हैं। निश्चित तौर पर दिल्ली जो कि देश का सर्वाधिक प्रदूषित शहर हुआ करता था उसे पछाड़कर कानपुर का आगे निकलना इस बात का द्योतक है कि वहां न तो नियंत्रण के उपकरण स्थापित हो सके हैं और न ही उसके नियमों का क्रियान्वयन हो रहा है।

इस स्थिति के बावजूद न तो दिल्ली और एनसीआर की स्थिति अच्छी है और न ही वाराणसी, आगरा, श्रीनगर, जयपुर और जोधपुर की। हालांकि अंतरराष्ट्रीय संगठन ने इस बात को स्वीकार किया है कि भारत में एलपीजी गैस के कनेक्शन देने से लेकर सरकार की तरफ से अन्य कई उपाय किए जा रहे हैं लेकिन, सच्चाई यह भी है कि भारत में प्रदूषण से होने वाली बीमारी से 11 लाख लोग सालाना मरते हैं। यह आंकड़ा दुनिया में प्रदूषण से होने वाली 70 लाख मौतों का लगभग सातवां हिस्सा है।

कभी भारत की प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी यह दलील दिया करती थीं कि हमें प्रदूषण और गरीबी में से एक को चुनना है। जाहिर है भारत ने गरीबी को दूर करने के लिए प्रदूषण को चुना पर अब वह स्थिति बदल चुकी है। प्रदूषण से होने वाली बीमारी और मौतों का आंकड़ा जिस गति से बढ़ रहा है उससे अर्थव्यवस्था पर अच्छे की बजाय बुरे असर दिखाई पड़ेंगे। एक सीमा से ज्यादा यह बोझ उत्पादन को कम करने के साथ-साथ स्वास्थ्य सेवाओं का खर्च बढ़ाएगा।

यही कारण है कि दुनिया के विकसित देशों के साथ ही चीन जैसी आर्थिक शक्ति भी प्रदूषण कम करने के लिए युद्ध स्तर पर जुट गई है। चीन ने अपने सर्वाधिक प्रदूषित शहरों को उस सूची से बाहर भी किया है। इसलिए भारत को देखना है कि उसे स्वास्थ्य के साथ विकास चाहिए या बीमारी के साथ। यह ऐसा प्रश्न है जिसकी अब उपेक्षा नहीं की जा सकती।

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