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महाभारत 2019: 78 लोकसभा सीटों पर पड़ेगा एनआरसी का सीधा असर

इनमें असम के साथ-साथ पश्चिम बंगाल, जम्मू-कश्मीर और बिहार की सीटें भी शामिल

Dainik Bhaskar

Aug 10, 2018, 10:07 AM IST
गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने संसद गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने संसद

  • भाजपा ने कहा- एनआरसी 1980 से पार्टी का राजनैतिक प्रस्ताव रहा
  • एनआरसी से बाहर छूटे 40 लाख लोगों में 27 लाख मुस्लिम और 13 लाख हिंदू

जम्मू-कश्मीर में 68.3%, असम में 34.2%, बंगाल में 27% और बिहार में 16.9% मुस्लिम आबादी है। भाजपा ने एनआरसी को पूरी तरह राष्ट्रवाद से जोड़ दिया है, ताकि सांप्रदायिक तौर पर ध्रुवीकरण का आरोप न लगे। भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने स्पष्ट लाइन खींच दी है कि विपक्षी दल पहले स्पष्ट करें कि वे बांग्लादेशी घुसपैठियों के साथ हैं या विरोध में। भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव और पूर्वोत्तर के प्रभारी राम माधव कहते हैं, ‘भाजपा के लिए यह राजनीतिक मामला नहीं है। पार्टी ने 1980 से अब तक हर राजनीतिक प्रस्ताव में बांग्लादेशी घुसपैठियों को निकालने की बात की है और अब सत्ता में आने के बाद उसे पूरा करके दिखा दिया है। सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में पूरा मामला चल रहा है और आगे का कदम भी उसी के निर्देश पर उठाया जाएगा।’ दरअसल भाजपा ने घुसपैठ के मुद्दे को स्थानीय रोजगार, शिक्षा और अन्य मूलभूत सुविधाओं से जोड़ दिया है।

विदेशी ट्रिब्यूनल में भी जाने का अधिकार : सूत्रों के मुताबिक, एनआरसी से बाहर छूटे 40 लाख लोगों में 27 लाख मुस्लिम और 13 लाख हिंदू हैं। लेकिन अंतिम सूची में 10 लाख का आंकड़ा और एनआरसी में जुड़ सकता है। अगर बाकी 30 लाख लोग एनआरसी से बाहर रहते हैं और विदेशी घोषित होते हैं तो भी उनके पास विदेशी ट्रिब्यूनल में जाने का अधिकार होगा। कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई का कहना है कि भाजपा सरकार ने गड़बड़ की है। देश के लोगों को भी लिस्ट में शामिल कर दिया।

खास समुदाय को बड़ा संदेश देने की कोशिश : वहीं, सीएसडीएस के निदेशक संजय कुमार का कहना है कि राजनीतिक तौर से यह मसला एक खास समुदाय को बड़ा संदेश देने की कोशिश है कि 50-60 साल में जो नहीं हो पाया, वह हमने कर दिखाया। असम के जरिए भाजपा एक कड़ा संदेश दे रही है कि वह समुदाय विशेष के लिए खड़ी है। जहां तक वोटों के ध्रुवीकरण की कोशिश है तो असम में एनआरसी से उस माइंडसेट को थोड़ा और बढ़ावा मिलेगा। उधर, चुनाव आयोग से संकेत मिले हैं कि एनआरसी में जो लोग बाहर रहे हैं, उन्हें वोटर लिस्ट से बाहर नहीं किया जाएगा। हालांकि, एनआरसी से जुड़े एक अधिकारी ने स्वीकार किया कि अभी अगला रोडमैप तय नहीं है। फाइनल रजिस्टर सामने आने के बाद जो लोग अवैध नागरिक माने जाएंगे, उनके बारे में सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में सरकार कोई निर्णय लेगी। यह तय है कि इन लोगों को ‘डाउटफुल वोटर’ की सूची में तो नहीं रखा जाएगा।

वोट बैंक पर भी निशाना: पिछले लोकसभा चुनाव में भाजपा को 55 लाख वोट मिले थे, जो कुल मतदान का करीब 37% था। भाजपा को सात सीटें मिली थीं। कांग्रेस को करीब 30% वोटों के साथ 44 लाख से अधिक वोट मिले और उसे तीन सीटों से संतोष करना पड़ा था। असम की तीसरी सबसे बड़ी प्लेयर बदरुद्दीन अजमल की ऑल इंडिया यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट को 22 लाख से अधिक वोट मिले थे जो कुल पोलिंग का 15% थे। यह जाहिर है कि एआईयूडीएफ पर सबसे ज्यादा चोट पड़ेगी, जिसके प्रति मुस्लिम मतदाताओं की सहानुभूति रही है।

बड़े राज्यों की इन 40 सीटों पर हो सकता है असर : चार राज्यों की जिन मुस्लिम बहुल 40 सीटों पर एनआरसी का बड़ा असर पड़ सकता है उनमें से महज आठ बीजेपी के पास हैं। इनमें से बंगाल में उसके पास 17 में से एक भी सीट नहीं है।

चार राज्यों में किस सीट पर कितने फीसदी मुस्लिम

जम्मू कश्मीर-6 सीटें : बारामूला-97%, अनंतनाग-95.5%, श्रीनगर-90%, लद्दाख-46%, ऊधमपुर-31%, जम्मू-28%। इनमें से बीजेपी के पास तीन सीटें हैं।

प.बंगाल-17 सीटें : मुर्शिदाबाद-59%, रायगंज-56%, बेरहमपुर-44%, बशीरहाट- 44%, मालदा उत्तर-41%, मालदा दक्षिण-41%, डायमंड हार्बर-33%, जयनगर-30%, बीरभूम-36%, कृष्णानगर-33%, बोलपुर-25%, जंगीपुर-60%, कूच बिहार-23%, उलूबेरिया-22%, मथुरापुर-21%, जादवपुर-20%, बर्धवान-20%। बीजेपी के पास इनमें से कोई सीट नहीं।

असम-8 सीटें: धुबरी-56%, करीमगंज-45%, बरपेटा-39%, नौगांव-33%, सिलचर-30%, कलियाबोर-30%, गुवाहाटी-25%, मंगलदोई-24%। भाजपा के पास 3 सीटें। बाकी बदरुद्दीन अजमल की पार्टी ‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌व कांग्रेस की।

बिहार-9 सीटें: किशनगंज-67%, पूर्णिया-30%, अररिया-29%, कटिहार-38%, मधुबनी-24%, दरभंगा-22%, सीतामढ़ी-21%, पश्चिमी चंपारण-21%, पूर्वी चंपारण-20%। मधुबनी, दरभंगा, सीतामढ़ी व चंपारण की दोनों सीटें बीजेपी के पास हैं।

तय नहीं ये तीन बड़ी बातें

1. फाइनल रजिस्टर आने के बाद अवैध घोषित किए गए नागरिकों का क्या होगा?
2. अवैध नागरिकों को वोट देने के अधिकार से कब वंचित किया जाएगा?
3. जिन्हें अवैध नागरिक मान लिया जाएगा, उन्हें कहां भेजेंगे?

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