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महाभारत 2019: लोग यह देखकर वोट नहीं करेंगे कि नेहरू-इंदिरा ने क्या किया, देखेंगे कि भाजपा ने क्या वादे किए थे- यशवंत सिन्हा

सिन्हा बोले-2019 में लोग ये देख वोट नहीं करेंगे कि नेहरू-इंदिरा ने क्या किया, भाजपा ने क्या वायदे किए थे, ये देखेंगे।

Danik Bhaskar | May 31, 2018, 08:32 AM IST
यशवंत सिन्हा ने साफ किया कि वे 2019 न तो चुनाव नहीं लड़ेंगे, न किसी पार्टी का प्रचार करेंगे। यशवंत सिन्हा ने साफ किया कि वे 2019 न तो चुनाव नहीं लड़ेंगे, न किसी पार्टी का प्रचार करेंगे।

नई दिल्ली. महाभारत 2019 के तहत दैनिक भास्कर ने मोदी सरकार की नीति और कार्य प्रणाली की आलोचना कर रहे पूर्व वित्त और विदेश मंत्री 81 वर्षीय यशवंत सिन्हा से बात की। जिसमें उन्होंने कहा कि कई बार मोदी के भाषण में मर्यादा का उल्लंघन, तथ्यों की गलतियां होती हैं। साथ ही उनका कहना था कि 2019 में लोग यह देखकर वोट नहीं करेंगे कि नेहरू-इंदिरा ने क्या किया, ये देखेंगे कि भाजपा ने क्या वायदे किए थे। वाजपेयी सरकार में मंत्री रहे सिन्हा से जब यूपीए सरकार के समय में सीबीआई को ताेता कहे जाने पर सवाल पूछा गया तो उन्होंने कहा कि आयकर, सीबीआई और ईडी तो तोते से भी बदतर हो गए हैं।

Q. 2019 के चुनाव में आपकी क्या भूमिका होगी?

A. मैं चुनाव नहीं लडूंगा। किसी दल का प्रचार नहीं करूंगा। मुद्दों पर जरूर बात रखेंगे, फिर वो वर्तमान सरकार के पक्ष में जाए या विरोध में। }

Q. आपने मंच बनाया है लेकिन वह कागज से आगे नहीं बढ़ पाया है? कार्यकर्ता कैसे आएंगे?

A. दिल्ली में 30 जनवरी को मंच लॉन्च किया, तब मैंने कहा था कि इसके कोई पदाधिकारी या सदस्य नहीं होंगे। यह एक आंदोलन है।

Q. ऐसा क्या हुआ कि आप मोदी सरकार की मुखालफत करने लगे?

A. बहुत सारी गलत बातें हो रहीं हैं, उसके बारे में आवाज उठाई। फिर ये हुआ कि पार्टी में है, पार्टी की ही खिलाफत कर रहे हैं तो पार्टी छोड़ दी।

Q. डॉ. मनमोहन सिंह ने राष्ट्रपति को पत्र लिखा है कि कर्नाटक में प्रधानमंत्री ने जिस भाषा का प्रयोग किया वह नहीं करना चाहिए था। आप क्या मानते हैं?

A. कभी-कभी जुबान फिसल जाती है। हमारी भी फिसली है, पर प्रधानमंत्री की नहीं फिसलनी चाहिए। मर्यादा में रहकर तथ्यात्मक बातें रखें और सत्य से परे बात नहीं करनी चाहिए।

Q. तो क्या कर्नाटक में प्रधानमंत्री ने मर्यादा का ध्यान नहीं रखा और तथ्य से परे बोले?

A. मैं सिर्फ कर्नाटक की ही बात नहीं कर रहा हूं। प्रधानमंत्रीजी ने जितने भी भाषण दिए हैं उनमें कई बार दो चीजें हुई हैं- एक, मर्यादा का उल्लंघन। दूसरा, तथ्यों से परे बातें। गुजरात चुनाव में मनमोहन सिंह पर आरोप लगाया कि वे पाकिस्तान से मिले हुए हैं। वह सर्वथा अनुचित था। मणिशंकर अय्यर ने मुझे भी खाने पर बुलाया था, उस समय तो मैं भाजपा में ही था। मैं जा नहीं पाया। दिल्ली में होता तो जरूर जाता। तो मुझ पर भी आरोप लगता कि पाकिस्तान के पूर्व विदेश मंत्री के साथ मिलकर षड्यंत्र कर रहे हैं, गुजरात चुनाव में। अभी कर्नाटक में उन्होंने जनभावनाओं को भड़काने के लिए कहा कि जनरल थिमैय्या और जनरल करिअप्पा के साथ कांग्रेस पार्टी ने दुर्व्यवहार किया। पुरानी बातें उठा रहे हैं, सन् 1948, 1950 की। जो तथ्यात्मक दृष्टिकोण से भी गलत हैं। थिमैय्या 1948 में कमांडर इन चीफ नहीं थे। कोई अंग्रेज था। एक महत्वपूर्ण बात कहना चाहता हूं कि 2019 के लोकसभा चुनाव में लोग फैसला यह देखकर नहीं करेंगे कि पंडित नेहरू ने क्या किया? इंदिरा गांधी ने क्या किया? वो ये देखकर करेंगे कि भाजपा ने क्या वायदे किए थे? और उनका क्या हुआ? ये होगा मुख्य मुद्दा। उस पर बात करनी चाहिए।

Q. जब अरुण जेटली ने कहा कि जॉब एप्लीकेंट एट 80 ईयर, उसी के बाद आप इतने नाराज हो गए?

A. नहीं, मैंने एक लेख में देश की आर्थिक स्थिति पर टिप्पणी की थी। उस पर काफी हंगामा मचा। उसके बाद सरकार की तरफ से इसे निचले स्तर पर पहुंचाने का प्रयास हुआ। दूसरे दिन हमारे बेटे ने भी एक लेख लिखा। इस पर एेसा बताने का प्रयास हुआ कि पिता-पुत्र में झगड़ा हो गया है। मैं उससे बचकर निकल गया। दूसरी बात, इस बात को पर्सनल बनाओ कि मुझे नौकरी (पद) चाहिए, ताकि लोग मुद्दे से भटक जाएं। मैंने दोनों को नकार दिया। मैंने ही नहीं, सभी ने नकार दिया।

Q. आपके बेटे जयंत बीजेपी से हजारीबाग से चुनाव लड़ेंगे तो आप क्या करेंगे?

A. वो देखेंगे। अभी चुनाव में एक वर्ष का वक्त है। लेकिन एक बात तो स्पष्ट है कि मैं भारतीय जनता पार्टी में नहीं हूं। तो उस पार्टी के लिए वोट कैसे मांग सकता हूं? अभी थोड़ा समय और बीतने दीजिए। इसके बाद हमारा आगे क्या रुख होगा, उनका क्या रुख होगा, वो क्लियर होगा।

Q. आप और अरुण शौरी इसलिए आलोचना करते हैं, क्योंकि महत्वपूर्ण पद नहीं मिला?
A. ऐसा वही व्यक्ति कहेगा जो मेरी पृष्ठभूमि नहीं जानता है। नंबर एक, मेरी 12 साल की आईएएस की नौकरी बची थी, जब मैंने उसे छोड़ा। मैं उस समय की रूलिंग पार्टी कांग्रेस में नहीं गया, जहां 1984 में चुनाव जीतकर मंत्री बन जाता। मैं विपक्ष में गया, जनता पार्टी का सदस्य बना। फिर 1989 में वीपी सिंह की सरकार बनी। तब हम वापस लौट आए थे राष्ट्रपति भवन से, क्योंकि पता चला कि मुझे राज्यमंत्री बना रहे हैं। इसलिए (हंसते हुए) मेरा इतिहास रहा है कि मैंने पद छोड़ा है, ना कि पद के पीछे भागा हूं। शायद वो इस बात को समझ ही नहीं पाए कि मुद्दों का भी महत्व होता है।


Q. आपको मोदी सरकार में खामी नजर आती है, मोदी में खामी नजर आती है या अरुण जेटली में?
A. मैं साफ शब्दों में कहना चाहता हूं कि मोदी मुद्दा नहीं है। देश की वर्तमान परिस्थितियां और मोदी सरकार की नीतियां मुद्दे हैं। हम ना मोदी का विरोध कर रहे हैं, ना जेटली का।

Q. राजनीति में उम्र की कोई अधिकतम सीमा तय होनी चाहिए?
A. अभी-अभी मलेशिया में 92 साल के महातिर मोहम्मद प्रधानमंत्री बने। महत्वपूर्ण यह नहीं है कि उम्र क्या होगी? महत्वपूर्ण यह है कि स्वास्थ्य कैसा है? उम्र तो सिर्फ नंबर है।

Q. मोदी सरकार की पांच बड़ी नाकामियां आप क्या मानते हैं?
A. पहला, मोदीजी ने कहा कि विदेश से काला धन लाएंगे, 15-15 लाख रुपए सबको देंगे। ये दूर-दूर तक नजर नहीं आ रहा। दूसरा, उन्होंने कहा कि दो करोड़ नौकरियां प्रतिवर्ष नौजवानों को देंगे। नौकरियां घट रहीं है, बढ़ नहीं रहीं। तीसरा, ‘सबका साथ-सबका विकास नारा’ था। विकास हो ही नहीं रहा है। चौथा, देश में वातावरण बन गया है हिंसा का, प्रतिशोध का। ये वातावरण सदियों से चली आ रही देश की मूल्य व्यवस्था के बिलकुल विपरीत है। फिर आप देखिए, देश के सुप्रीम कोर्ट को सरकार कैसे ट्रीट कर रही है। सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठतम चार जज प्रेस कॉन्फ्रेंस करके जनता को कहते हैं कि प्रजातंत्र खतरे में है। हमने अपना फर्ज निभा दिया, आपको बता दिया। आगे सोचें। तो क्या देश की जनता और हम लोग चुप बैठे रहेंगे?

Q. मोदी मंत्रिमंडल के किसी भी सदस्य पर भ्रष्टाचार का आरोप सामने नहीं आया है?
A. (हंसते हुए) अभी तक नहीं आया है। 2004 से 2009 तक की यूपीए-1 की सरकार पर भी 2009 के पहले तक भ्रष्टाचार का कोई भी आरोप नहीं लगा था। 2004 से 2009 के बीच हुए भ्रष्टाचार का खुलासा 2009 के बाद हुआ। इसलिए अभी हम किसी नतीजे पर ना पहुंचे, लेकिन भ्रष्टाचार हुआ है। नीरव मोदी, मेहुल चौकसी और बैंक फ्रॉड्स, ये सब तो हो ही रहा है, जो सबके सामने है।

Q. यूपीए के समय में सीबीआई को ताेता कहते थे। अब आप सीबीआई, इनकम टैक्स और ईडी की भूमिका कैसे देख रहे हैं?
A. इनकम टैक्स, सीबीआई और ईडी तीनों तोते से भी बदतर बन गए हैं। जैसे कोई छोड़ता है ना कुत्ते को कि इसको काटो-भौंको। उसी तरह इनको छोड़ा जाता है और वे आदेश का पालन कर रहे हैं। किसी को परेशान करना हो- आपको, हमको या किसी और को, तो कोई केस शुरू कर दो। जाे व्यक्ति पब्लिक लाइफ में है उसके बारे में अगर कहा जाए कि इसने इतना बड़ा घपला किया है, तो सहसा लोग उस पर विश्वास कर लेंगे कि यह तो सत्य होगा।

Q. आडवाणी-जोशी से भी मोदी सरकार पर कभी बात की?
A.
चर्चा होती रहती है, मुलाकात होती रहती है। वो मुझसे क्या बोलते हैं यह मैं सार्वजनिक नहीं करूंगा। मैं उन पर ही छोड़ता हूं कि वे अपनी मंशा स्पष्ट करें।