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डाउनलोड करेंभोपाल. मप्र में 9602 एटीएम हैं, इनमें से आधे खाली हैं। बैंकों में जमा और निकासी का अंतर रोजाना 700 करोड़ रुपए तक पहुंच चुका है। प्रदेश में इस किल्लत की सबसे बड़ी वजह मंडियों में हो रही सरकारी खरीद को बताया जा रहा है। बैंकों को अप्रैल-मई में मप्र सरकार का 30,000 करोड़ रुपया बांटना है। आपूर्ति निगम की ओर से पूरे 51 जिलों में भारी कैश की डिमांड है। अब तक बैंक केवल 4000 करोड़ रु. ही बांट सके हैं। यानी अभी 26,000 करोड़ रु. बांटना शेष है।
शहरभर के एटीएम में कैश की किल्लत की शिकायतों के बाद टीम भास्कर ने मंगलवार को विभिन्न बैंकों के 50 एटीएम की पड़ताल की। इनमें से 40 जगह नो कैश की तख्ती टंगी मिली। सुरक्षा गार्ड्स ने बताया कि मशीनों में कैश रोजाना भरा जा रहा है, लेकिन कैश ट्रे रुपए भरने के दो घंटे के भीतर खाली हो रही है।
प्रदेश में पिछले 7 दिन में भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) की शाखाओं में जमा और निकासी का अंतर 1400 करोड़ से ज्यादा रहा। बैंक से 3600 करोड़ रु. निकले, लेकिन जमा केवल 2200 करोड़ रुपए ही हुए। इस दौरान पूरे प्रदेश में सभी बैंकों में 23,100 करोड़ रु. निकल गए, लेकिन जमा 17,500 करोड़ रुपए ही हुए।
अक्षय तृतीया पर सैकड़ों शादियां, कैश के संकट ने दिक्कतें बढ़ाईं, नोटबंदी के बाद पहली बार यह हाल
अक्षय तृतीया पर बुधवार को हजारों शादियां हैं। एटीएम में कैश के संकट ने कई परिवारों के लिए मुसीबत खड़ी कर दी है। शादी की खरीदारी अधूरी हैं या लोग दूसरों से उधार लेकर काम चला रहे हैं। दुर्गा चौक तलैया निवासी खेमचंद राठौर की बिटिया की शादी है। वे खरीदारी करने जुमेराती पहुंचे। आसपास के दो एटीएम में पैसे नहीं मिले तो हमीदिया रोड पहुंचे। उन्हें एसबीआई के एक एटीएम में पैसे मिले पर इसमें दो सौ के नोट नहीं थे। गूजरपुरा निवासी ब्रज वर्मा की बेटी की भी शादी है। कुछ रिश्तेदारों को कपड़ों व जेवर की खरीदी करना थी।
लखेरापुरा व सोमवारा के एटीएम में पैसे नहीं मिले। इमामी गेट के पास एक एटीएम पर लंबी कतार थी। आधा घंटे के इंतजार के बाद पैसे मिले। काजीपुरा के आशीष सोनी की बहन और आरसी सोनी की बिटिया की शादी होना है। इन्हें भी ऐसे एटीएम तलाश करने की मशक्कत करना पड़ी जिनमें पैसे हों। टैगोर छात्रावास में विवाह सम्मेलन समिति के सदस्य शैलेंद्र शैलू ने बताया कि सम्मेलन में विवाह रचाने वाले सुदामा नगर के राहुल पवार ने दिन में एटीएम से पैसे निकालना चाहे, पर उन्हें नहीं मिले। शाम को न्यू मार्केट के एटीएम से पैसे मिले।
दोपहर 1 बजे: अशोका गार्डन
आखिर दोस्त से मंगवाने पड़े पैसे
अशोका गार्डन निवासी शैलेंद्र राजपूत प्रभात पंप पर पेट्रोल भरवाने पहुंचे। पर्स में रुपए नहीं थे। डेबिट कार्ड दिया। लेकिन मशीन नहीं चल रही था। कैश मांगे गए। विवाद हुआ। बाइक वहीं पर खड़ी कर आसपास के 7 एटीएम भटके। सब खाली मिले। आखिर दोस्त को पैसे लेकर बुलवाना पड़ा।
दोपहर 2 बजे : 80 फीट रोड
पैसे निकले नहीं, मैसेज आ गया
स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के एटीएम में खंडवा निवासी योगेश रुपए निकालने पहुंचे। सिर्फ एक हजार रुपए निकालने की कोशिश की, लेकिन असफलता ही हाथ लगी। योगेश ने बताया कि एटीएम से रुपए तो नहीं निकले लेकिन रकम खाते से कटने की सूचना जरूर आ गई।
शाम 5 बजे: अर्जुन नगर
मोबाइल एटीएम वैन से मिले पैसे
32 वर्षीय प्रमोद उपाध्याय विधानसभा में इलेक्ट्रीशिन हैं। जेपी अस्पताल के नजदीक कैनरा बैंक की मोबाइल वैन एटीएम पर उन्होंने बताया कि वह विधानसभा एटीएम, नानके पेट्रोल पंप और रेडक्रास हॉस्पिटल के नजदीक स्थित एसबीआई के एटीएम में गए थे। कहीं भी रुपए नहीं थे।
कैश नहीं था, गार्ड ने गिरा दिया शटर
हबीबगंज रेलवे स्टेशन पर ही एसबीआई एटीएम कैशलेस हुआ तो गार्ड ने शटर गिरा दिया। मानसरोवर कॉम्पलेक्स से लेकर अरेरा हिल्स, पद्मनाभ नगर, गोविंद गार्डन, अशोका गार्डन तक में मौजूद एसबीआई एटीएम पर कैश नहीं मिला। केवल अरेरा हिल्स के एक एसबीआई एटीएम की तीन में से एक मशीन में कैश था, जबकि अन्य दो बंद थीं। जिस मशीन से कैश निकल रहा था, उसमें अधिकतम 500 के नोट ही थे। वहीं, हबीबगंज स्टेशन पर पीएनबी के एटीएम से पैसा तो निकल रहा था पर 500 तक के नोट ही थे। केवल अरेरा हिल्स स्थित यूनियन बैंक का एटीएम ऐसा था, जिससे दो हजार रुपए तक के नोट थे।
यहां नो कैश की तख्ती
रेडक्रॅास हॉस्पिटल के पास एसबीआई, हबीबगंज थाने के पास एसबीआई, पं. खुशीलाल आयुर्वेद अस्पताल के बाहर के एसबीआई, आईडीबीआई, जेके हॉस्पिटल रोड स्थित बैंक ऑफ इंडिया एटीएम।
किसानों के खाते में पहुंचे 1650 करोड़, लेकिन निकाल नहीं पाए
राज्य सरकार की ओर से सोमवार को प्रदेश के 10 लाख किसानों के खाते में एक क्लिक कर 1650 करोड़ रुपए तो डाल दिए गए, लेकिन यह राशि किसान नहीं निकाल पा रहे हैं। बुधवार को अक्षय तृतीया है। अधिकांश जगह विवाह समारोह है। लेकिन कैश की कमी से लोगों को दिक्कत हो रही है।
कैश मैनेजमेंट कमेटी का गठन
राज्य स्तरीय बैंकर्स समिति के समन्वयक अजय व्यास ने बताया कि हमने कैश मैनेजमेंट कमेटी का गठन किया है। मंडियों में हो रही खरीद का भुगतान इस कैश संकट की सबसे बड़ी वजह है।
किसानों को भुगतान करना है
आपूर्ति निगम के एमडी विकास नरवाल ने बताया कि अब तक किसानों को भुगतान के लिए बैंकों से बराबर पैसा मिल रहा है। हम चाहते हैं कि किसानों को पूरे माह भुगतान आसानी से हो। इसलिए हम बैंकों पर दबाव बना रहे हैं।
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