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डाउनलोड करेंमंडीदीप. यदि सब कुछ ठीक रहा तो जल्दी ही हमारा भोजपुर भी विश्व धरोहर की श्रेणी में शामिल होगा। भोजपुर में दुनिया का सबसे बड़ा शिवलिंग स्थापित होने के कारण मप्र पर्यटन विकास विभाग इसे अब वर्ल्ड हैरिटेज साइड घोषित कराने की दिशा में काम कर रहा है। ताकि पुरासम्पदाओं और शैलचित्रों से समृद्ध हमारा जिला रायसेन वर्ल्ड हैरिटेज का कैपिटल बन सके। इसके लिए विभाग यूनेस्को द्वारा तय किए गए पैरामीटर्स को पूरा करने की तैयारी में जुटा हुआ है।
भोजपुर स्थित परमार कालीन शिव मंदिर देश-विदेश में प्रसिद्ध है। यह मंदिर स्थापत्य कला का अद्भुत उदाहरण है। इस मंदिर को दुनिया के सबसे बड़े शिवलिंग के रूप में पहचाना जाता है। गर्भगृह में स्थित 7.5 फीट लंबा और 17.8 फीट परिधि का यह शिवलिंग एक ही चट्टान को काटकर बनाया गया है, जो आश्चर्यजनक है। इसे देखते हुए यह विश्व धरोहर की श्रेणी में शामिल हो सकता है। यूनेस्को के पैरामीटर पर खरा उतरने के लिए विभाग यहां पर्यटकों को आकर्षित करने के लिए सुविधाएं उपलब्ध कराने की योजना बना रहा है। योजना के अंतर्गत सड़क संपर्क मार्ग को सुदृढ़ किया जाएगा।
क्षेत्र में वायु, सड़क और रेल परिवहन का विकास किया जाएगा। सर्किट विकसित किए जाएंगे। हेरिटेज पार्क, टूरिस्ट फेसिलिटेशन सेंटर बनाया जाएगा। विरासत स्थल का संरक्षण किया जाएगा। ईको टूरिज्म, एडवेंचर्स टूरिज्म, कल्चरल टूरिज्म, क्राफ्ट टूरिज्म को बढ़ावा, थीम पार्क, एम्यूजमेंट पार्क, वाटर पार्क, स्पोर्ट्स टूरिज्म पर ध्यान दिया जाएगा। इनमें निजी क्षेत्र की सहभागिता होगी। होटल शुरू करने पूंजी निवेश कराने के लिए व्यवसायियों को आकर्षित किया जाएगा। इससे रोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे।
दो विश्व धरोहर सांची और भीमबैठिका पहले से
प्रदेश में रायसेन ही एक मात्र ऐसा जिला है, जहां दो विश्व धरोहर सांची और भीमबैठिका है। यहां बड़ी संख्या में रॉक शेल्टर और रॉक पेंटिंग हैं। ऐतिहासिक काल एवं मध्यकाल में बनी यह रॉक पेंटिंग आज भी अपने मूल स्वरूप में विद्यमान हैं। जिला प्राकृतिक संपदाओं से समृद्ध है। इस तरह क्षेत्र में पर्यटन की दृष्टि से राष्ट्रीय पटल पर विशेष पहचान मिलने की बहुत संभावनाएं हैं। बस जरूरत है तो उन्हें पयर्टन स्थल के रूप में विकसित करने की। इससे यह क्षेत्र राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रदेश की पहचान भी बन जाएगा।
जिले में विश्व धरोहर सांची बौद्ध स्तूप तथा भीमबैठिका के साथ ही भोजपुर शिव मंदिर, रायसेन किला, जामगढ़-भगदेई मंदिर, आशापुरी मंदिर शृंखला, द ग्रेट वॉल ऑफ इंडिया तथा बौद्ध स्मारक सतधारा-सोनारी सहित कई दर्शनीय स्थल हैं। इनके अलावा यहां रॉक शेल्टर में वृहद संख्या में बनी रॉक पेंटिंग और शैल चित्रों को देखते हुए जिले को पुरातत्व धरोहरों की राजधानी भी कहा जा सकता है। भीमबैठिका जैसे 60 से 70 शैलाश्रय समूह जिले में हैं। जिनको देखने दुनिया भर से शोधार्थी आते हैं। अभी भी लगभग सारे शैलाश्रय समूह दुर्गम वन क्षेत्र एवं पहाड़ों की ऊंचाइयों पर स्थित हैं।
बनेगी होटल, पार्किंग स्टैंड
भोजपुर में अभी दूरदराज से आने वाले एवं विदेशी पर्यटकों के ठहरने की कोई सुविधा नहीं है। इसे ध्यान में रखते हुए यहां एक सर्वसुविधायुक्त होटल बनाया जाएगा। इस पर करीब दो करोड़ खर्च होंगे। यहां मकर संक्रांति एवं महाशिवरात्रि पर्व पर लगने वाले मेले एवं भोजपुर महोत्सव में पार्किंग समस्या को दूर करने के लिए विभाग द्वारा पार्किंग स्थल बनाने की योजना भी है।
ये भी बन सकते हैं रमणीय स्थल
रायसेन के गोरखपुर की दीवार, रातापानी अभयारण्य की खूबसूरती के अलावा यहां स्थित कंकाली मंदिर, गिन्नौरगढ़ किला, ऐेतिहासिक आशापुरी मंदिर, भदभदा जलप्रपात आदि दर्शनीय स्थल पर्यटकों को आकर्षित करने की क्षमता रखते हैं।
पैरामीटर को करेंगे पूरा
पर्यटन एवं संस्कृति विभाग, राज्यमंत्री सुरेन्द्र पटवा ने बताया कि भोजपुर विश्व का सबसे बढ़ा शिवलिंग है। हमारी कोशिश है कि वर्ल्ड हैरिटेज के सारे पैरामीटर को पूरा कराते हुए इसे विश्व धरोहर घोषित कराई जाए। प्रदेश में जितने भी पर्यटन स्थल हैं, उनको संवारने और पर्यटकों की उपस्थिति बढ़ाने के काम विभाग द्वारा किए जा रहे है।
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