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पिछले साल 434 शहरों में हम दूसरे नंबर पर, इस बार 4203 शहरों के बीच हुआ मुकाबला

3 वर्ष पहले
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भोपाल.  स्वच्छ सर्वेक्षण 2018 के बुधवार को जारी हुए परिणाम में भोपाल ने अपनी जगह कायम रखी। हालांकि भोपाल का ख्वाब नंबर वन आने का था। फिर भी इन नतीजों में सबसे खास बात यह है कि  पहले  मुकाबला 434 शहरों के बीच था, इस बार 4203 शहर दौड़ में थे।  बुधवार शाम जैसे ही नतीजे आए महापौर आलोक शर्मा, निगम आयुक्त प्रियंका दास सहित तमाम अधिकारी और कर्मचारी जश्न मनाने वीआईपी रोड स्थित राजाभोज की प्रतिमा के पास पहुंचे। वे यहां ढोल और नगाड़ों की थाप पर जमकर थिरके। साफ-सफाई की पिछले साल की तैयार बुनियाद भी काफी काम आई।

 

पहले स्थान पर आने के लिए ये थी चुनौतियां

1. जगह-जगह कचरे को ढेर को डंपिंग साइट तक पहुंचाना। इसके लिए निगम ने 250 नए वाहन जोड़े। 
2.लोग कचरे के सेग्रिगेशन से पूरी तरह से अनभिज्ञ थे। अभियान चलाकर जागरूक किया। जगह-जगह नीले और हरे डस्टबिन रखवाए गए। 
3. सड़कों और नाले-नालियों की नियमित साफ-सफाई और  बाजारों में सफाई भी चुनौती थी। इन पर बराबर ध्यान रखा गया। 

 

 

ये 6 बड़े बदलाव किए

- वर्षों पुरानी कचरा खंती की साइट बदली भानपुर कचरा खंती को बंद किया गया। पूरे इलाके को राहत मिली। 
- 200 नए कर्मचारी उतारे थे मैदान में- काम होता हुआ नजर आए इसके लिए सड़कों पर 200 सफाई कर्मियों की एक टीम उतारी। इसके अलावा वार्ड और जोन की टीमों ने अलग-अलग हाट और बाजारों सहित रहवासी इलाकों में लगातार चालानी कार्रवाई की। 
- ओडीएफ में मिले पूरे अंक- शहर काे खुले में शौच से मुक्त (ओडीएफ) बनाने के लिए महापौर ने मोर्चा संभाला।  रोको-टोको अभियान चलाए। सुबह-सुबह रेल पटरी पर समझाइश दी गई। मॉड्यूलर टॉयलेट लगे। 
- एप के माध्यम से हो रही सफाई- गंदगी की शिकायत के लिए नगर निगम स्वच्छ मैप एप ने भी भूूमिका निभाई।  फोटो खींचकर एप पर अपलोड करने पर संबंधिते एएचओ के पास सूचना पहुंची नहीं कि गाड़ी भेजकर सफाई शुरू। सफाई के बाद का फोटो एप पर डालकर फौरन पुष्टि भी। 
- मॉनीटरिंग के लिएनोडल अधिकारी साफ-सफाई पर बारीकी से नजर रखने के लिए नोडल अधिकारी लगे। अपर आयुक्त और उपायुक्त स्तर के अधिकारियों को दो-दो तीन-तीन जोन दिए गए थे। नोडल अधिकारी सुबह-शाम अपने इलाकों में गश्त करके सफाई व्यवस्था पर नजर रखते थे। आयुक्त आकस्मिक दौरे करके नजर रखती थीं। 
- पब्लिक कनेक्टिविटी- लोगों को पॉजीटिव फीडबैक देने के लिए तैयार करने के लिए निगम ने अलग-अलग स्तर पर अभियान चलाए। नुक्कड़ नाटक हुए। स्कूल और कॉलेजों में बच्चों को सफाई के लिए जागरूक किया।

 

ये काम हो जाते तो भोपाल हाे सकता था नंबर वन

1. वेस्ट टू एनर्जी प्लांट शुरू नहीं हो पाया। शुरू हो जाता तो बिजली बनना शुरू हो जाती और कचरा भी निपट जाता।  

2.  कचरे के सेग्रिगेशन  काे निगम का अमला अंजाम तक नहीं पहुंचा पाया।

3. कंपोस्ट यूनिट बने जरूर, लेकिन यहां कचरे से खाद बनना शुरू ही नहीं हो पाया।

4.  पीपुल कनेक्टिविटी कम रही, पिछले साल की अपेक्षा अभियान देर से शुरू हुए।

5.   पिछले बार के बजाय निगम अमला कम सक्रिय रहा। निगम आयुक्त भी मौके पर कम नजर आईं।

 

ऐसे हुआ सर्वेक्षण  

- 4203 छोटे-बड़े शहर हुए  शामिल।
- 37.66 लाख सिटीजन फीडबैक मिले।
- 53.58 लाख स्वच्छता एप्प हुए डाउनलोड।
- 1.18 करोड़ कंप्लेंट दर्ज हुईं एप्प पर।
- 1.13 करोड़ कंप्लेंट का हुआ निराकरण।
 
ये रहे बेस्ट परफॉर्मिंग स्टेट
1. झारखंड, 2. महाराष्ट्र, 3. छत्तीसगढ़
 
पहला स्थान न मिल पाने की कसक 
मेयर आलोक शर्मा ने बताया कि पहले मुकाबला 434 शहरों से था, लेकिन इस बार 4200 शहरों से। ऐसे में दूसरा स्थान बरकरार रखना बड़ी बात है। पहला स्थान न मिल पाने की कसक है। एस्सेल इंफ्रा कंपनी ने वेस्ट टू एनर्जी प्लांट शुरू नहीं हो पाया। इस कारण हमारे ये नंबर कट गए। बरन ताे हम नंबर वन ही होते। हम इसकी समीक्षा करेंगे। 
 
 
छोटे शहरों का प्रदर्शन निराशाजनक , एक भी अवाॅर्ड नहीं मिला
नेशनल कैटेगरी में भले ही प्रदेश के दो शहर पहले और दूसरे स्थान पर हों, पर इनके अलावा प्रदेश का एक भी शहर किसी भी कैटेगरी में जगह नहीं बना पाया। यहां 10 लाख से अधिक आबादी वाले, तीन लाख से 10 लाख और 1 लाख से 3 लाख तक की आबादी वाले शहर 20 कैटेगरी में से एक भी अवाॅर्ड नहीं जीत पाए। यही नहीं, पांच जाेन के एक लाख से कम आबादी वाले शहरों के बीच हुए कॉम्पटीशन की 20 कैटेगरी में भी एक भी शहर को अवॉर्ड नहीं मिला है।
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