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बिहार भाजपा में गुटबाज़ी उफ़ान पर

8 वर्ष पहले
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मणिकांत ठाकुर

बीबीसी संवाददाता, पटना

भाजपा के असंतुष्ट विधायकों के निशाने पर पूर्व उप-मुख्यमंत्री सुशील मोदी है.

भारतीय जनता पार्टी की बिहार प्रदेश इकाई में लंबे समय से पल रही गुटबाजी या अंदरूनी खटपट इन दिनों फिर से सतह पर दिखने लगी है.

यहाँ कुछ असंतुष्ट पार्टी विधायकों के जो बग़ावती स्वर उभरे हैं, उनमें पूर्व उप मुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी के प्रति रोष ज्यादा झलक रहा है.

कम से कम चार भाजपा विधायकों ने पार्टी के मौजूदा प्रदेश नेतृत्व के प्रति अपना क्षोभ खुलकर ज़ाहिर किया है.

इनमें सबसे मुखर होकर सामने आए अमरनाथ गामी को अनुशासनहीनता के आरोप में दल से निलंबित कर दिया गया है.

उन्होंने सुशील मोदी को तानाशाही और स्वार्थी प्रवृत्ति वाला नेता कहा था.

अन्य नाराज़ विधायकों में विजय कुमार मिश्र, राणा गंगेश्वर सिंह और अवनीश कुमार सिंह को शामिल माना जा रहा है.

निलंबन से रोष

जाले के भाजपा विधायक विजय कुमार मिश्र ने अमरनाथ गामी के निलंबन को अलोकतांत्रिक और अन्यायूर्ण बताते हुए कहा है कि पार्टी के कई विधायक मौजूदा प्रदेश नेतृत्व के बर्ताव से खिन्न और परेशान हैं.

जनता दल यूनाइटेड (जदयू) और भाजपा के बीच गठबंधन के दौरान, या अब गठबंधन टूटने के बाद भी, बिहार भाजपा में सुशील मोदी का वर्चस्व कई भीतरी विरोधों के बावज़ूद कायम है.

उधर सुशील कुमार मोदी ने इस प्रसंग में मुख्यमंत्री नीतिश कुमार पर निशाना साधते हुए कहा है- “वो अपने दल (जदयू) के भीतर उठ रहे बगावती स्वर से घबराकर अन्य दलों के विधायकों को प्रलोभनों के बूते तोड़ने में लगे हैं.”

जदयू के एनडीए से नाता तोड़ने के बाद से भाजपा और जदयू नेताओं के बीच तल्ख़ी लगातार बढ़ती जा रही है.

उन्होंने आगे कहा है कि, “नीतिश जी को पता होना चाहिए कि वो हमारा एक विकेट डाउन करेंगे तो हम उनका दो विकेट उखाड़ फ़ेंकेंगे. अगर हिम्मत है तो पहले अपने मंत्रीमंडल का विस्तार करके देखें कि उसके बाद वहाँ कैसी भगदड़ मचती है.”

लेकिन बिहार में भाजपा के ही दो वरिष्ठ नेताओं- डॉक्टर सी पी ठाकुर और गोपाल नारायण सिंह ने कहा है कि दल के नाराज विधायकों की बात ठंडे दिमाग से सुननी चाहिए और शिकायतों पर ग़ौर किए बिना किसी सख़्त कार्रवाई से बचना चाहिए.

दूसरी ओर सुशील मोदी गुट की तरफ से कहा जा रहा है कि पद की चाहत और जदयू से मिल रहे प्रलोभनों के मद्देनजर कोई बहाना बनाकर कुछ लोग विक्षुब्ध की भूमिका में दिख रहे हैं.

उधर तीन दिनों के प्रवास पर पटना आए आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने सोमवार को यहाँ प्रदेश भाजपा के वरिष्ठ नेताओं, पूर्व मंत्रियों और विधायकों के साथ एक बैठक की.

माना जा रहा है कि आगामी लोकसभा चुनाव और नरेन्द्र मोदी से जुड़े मसलों के अलावा पार्टी की प्रदेश इकाई के ताजा अंदरूनी विवादों पर उन्होंने विचार मंथन किया.

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