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डाउनलोड करेंमनीष शांडिल्य
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बिहार में बदलते राजनीतिक घटनाक्रमों के बीच सत्तारूढ़ जनता दल (यूनाइटेड) ने नीतीश कुमार को एक बार फिर विधायक दल का नेता चुन लिया है. पार्टी अध्यक्ष शरद यादव ने इसकी घोषणा की है.
लेकिन राजनीतिक घटनाक्रम यही थमता नज़र नहीं आ रहा है. अब सबकी नज़रें मुख्यमंत्री जीतनराम मांझी और राज्यपाल के फ़ैसले पर टिकी हुई है.
सुबह से ही चल रहे सियासी घमासान में पहले जीतनराम मांझी ने नीतीश कुमार से मुलाक़ात की. उस समय ऐसे कयास लगाए जाने लगे कि वे शायद अपने पद से त्यागपत्र दे देंगे.
लेकिन इसके बाद कैबिनेट की बैठक में जीतनराम मांझी समर्थक मंत्रियों ने विधानसभा भंग करने की सिफ़ारिश भेजने का प्रस्ताव रखा, लेकिन नीतीश समर्थक मंत्रियों के मुताबिक़ उसे सिर्फ़ सात मंत्रियों का ही समर्थन मिला.
प्रस्तावनीतीश कुमार के इस्तीफ़ा देने के बाद मांझी बने थे मुख्यमंत्री
बैठक से बाहर निकलते हुए नीतीश खेमे के माने जाने वाले मंत्रियों ने बताया कि प्रस्ताव का समर्थन केवल सात मंत्रियों ने किया जबकि 21 मंत्रियों ने इसका विरोध किया. इस संबंध में मंत्री श्याम रजक ने बताया कि बैठक में मंत्री नरेंद्र सिंह ने विधानसभा भंग करने का प्रस्ताव पेश किया जिसे ज्यादातर मंत्रियों ने खारिज कर दिया गया.
अब आगे ये देखना होगा कि मुख्यमंत्री जीतनराम मांझी इस मुद्दे पर क्या करते हैं.
इस बीच बिहार के कार्यकारी राज्यपाल केसरीनाथ त्रिपाठी ने मुख्यमंत्री मांझी के उस अनुशंसा को स्वीकार कर लिया है जिसमें उन्होंने अपने दो मंत्रियों को बर्खास्त करने की अनुशंसा की थी.
राजभवन से जारी विज्ञप्ति में कहा गया है- मुख्यमंत्री की सलाह पर महामहिम राज्यपाल ने यह निर्णय लिया है कि प्रशांत कुमार शाही और राजीव रंजन सिंह उर्फ लल्लन सिंह तत्कालीन प्रभाव से राज्य के मंत्री और मंत्री परिषद के सदस्य नहीं रहेंगे.
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