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दारु-हड़िया बेचना त्यागकर खूंटी की बिलासी देवी ने शुरू किया स्वरोजगार

एक वर्ष पहले
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जेएसएलपीएस से जुड़कर आत्मविश्वास से परिपूर्ण रनिया प्रखंड के जयपुर निवासी बिलासी देवी ने दारु-हड़िया बेचने के धंधे को तिलांजलि देकर खुद अपना व्यवसाय आरंभ किया और अपनी आर्थिक स्थिति को सुदृढ़ करने की ओर अग्रसर हैं। दारू-हड़िया बेचकर अपने परिवार का भरण-पोषण करने वाली बिलासी देवी आज जेएसएलपीएस के तहत आईसीआरपी के तौर पर न केवल खूंटी जिला बल्कि अन्य जिलों को भ्रमण कर सखी मंडलों के गठन का कार्य भी किया है। बाकौल बिलासी देवी (पति देवचद महतो) उनके 4 बच्चें हैं। जब वह स्वयं सहायता समूह से नहीं जुड़ी थीं तब उनकी आर्थिक स्थिति तो खराब थी ही सामाजिक स्थिति भी खस्ता थी । क्योंकि उनके पास अर्थोपार्जन के कोई अन्य साधन नहीं था। पति भी बेरोजगार थे। बच्चों की पढ़ाई- लिखाई एवं परिवार का भरण-पोषण करने के लिए दारु-शराब बनाकर जीवन यापन करना उनकी मजबूरी थी। इस वजह से समाज में भी लोग उनके परिवार को ठीक नजर से नहीं देखते थे। धीरे-धीरे समय गुजरता रहा। कालांतर में वह जेएसएलपीएस के संपर्क में आईं। इसके के माध्यम से सखी मंडलों से जुड़ीं। सखी मंडलों से जुड़ने के बाद उनमें आत्मविश्वास का सृजन हुआ। उन्होंने बताया कि वह आईसीआरपी के रूप मेें अन्य जिलों में जाकर सखी मंडलों का निर्माण करती हैं। उन्होंने कर्रा, खूंटी के अलावा मुसाबनी, देवघर और बहरागोड़ा जिले का दौरा कर वहां सखी मंडलों का गठन किया। वह बताती हैं कि उक्त गतिविधियों से उनके अंदर न केवल आत्म-विश्वास का सृजन हुआ बल्कि निर्णय लेने की भी क्षमता बढ़ी। सखी मंडलों के निर्माण के क्रम में उन्होंने आज तक लगभग 1,26,000 रूपए तक की आर्थिक सहायता प्राप्त की। इस तरह उनके समय ने करवट ली।

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