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करंट अफेयर्स पर अंडर 30 के युवाओं की सोच- डेबिट कार्ड धोखाधड़ी से बचा सकता है बायोमैट्रिक डेटा

3 वर्ष पहले
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हाल ही के दिनों में क्रेडिट व डेबिट कार्ड सबंधी धोखाधड़ी की घटनाओं की बाढ़-सी आ गई है। ऐसे वरिष्ठ नागरिक इसके अधिक शिकार हो रहे हैं, जिन्हें क्रेडिट व डेबिट कार्ड के उपयोग के लिए किसी की सहायता लेनी पड़ती है। इस तरह की धोखाधड़ी में लोग मेहनत से कमाए गए पैसे एक ही झटके में गवां बैठते हैं। इसके लिए पृथक शिकायत निवारण प्रकोष्ठ न पुलिस विभाग में हैं न बैंकों में। ऐसे में सभी हितधारकों को मिलकर ठोस कदम उठाने होंगे।
डेबिट और क्रेडिट कार्ड से संबंधित धोखाधड़ी पर लगाम लगाने के लिए इनके उपयोग की प्रक्रिया में शामिल टेक्नोलॉजी में बदलाव की जरूरत है। एटीएम मशीन व पॉइंट ऑफ सेल मशीन में किसी भी प्रकार से छेड़छाड़ न की जा सके, ऐसी व्यवस्था करनी होगी। सर्वर को हैक रोधी बनाना होगा। पुलिस विभाग के साइबर सेल के सदस्यों को विशेष रूप से प्रशिक्षित करना होगा। डेबिट कार्ड व क्रेडिट कार्ड के उपयोगकर्ता के बायोमेट्रिक डेटा के उपयोग के विषय में सोचा जाना चाहिए। अंगूली की छाप से आधार नंबर की पुष्टि करने की प्रणाली का उपयोग सभी प्रकार के लेन-देन के लिए किया जा सकता है। किसी भी लेन-देन के पूर्व पंजीकृत मोबाइल नंबर पर वन टाइम पासवर्ड आने की प्रणाली को वैकल्पिक न रखकर अनिवार्य बनाने की जरूरत है। वरिष्ठ नागरिकों के लिए बैंकों के पास लगे एटीएम व पीओएस मशीनों पर विश्वसनीय सहायक उपलब्ध कराए जा सकते हैं। वरिष्ठ नागरिकों को भी संदिग्ध लगने वाले एटीएम अथवा पीओएस मशीन का उपयोग करने से बचना होगा। पिन नंबर डालते समय आसपास किसी अन्य व्यक्ति अथवा कैमरे की अनुपस्थिति सुनिश्चित करनी होगी।
अपने कम्प्यूटर या फोन में एंटीवायरस का प्रयोग करना चाहिए। पिन नंबर, सीवीवी या पासवर्ड किसी से भी साझा न करते हुए नियमित अंतराल पर पिन नंबर बदलते रहना चाहिए। इन सावधानियों से किसी भी प्रकार की धोखाधड़ी व आर्थिक क्षति से काफी हद तक बचा जा सकता है।

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